अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि जो भी देश अमेरिकी कंपनियों पर डिजिटल सेवा कर लगाएगा, उस देश से अमेरिका में आयात होने वाले सभी सामानों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि यह शुल्क उन देशों के साथ किए गए किसी भी मौजूदा या भविष्य के व्यापार समझौते से ऊपर होगा। ट्रंप ने यह घोषणा अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर की और अपनी सरकार के उस लंबे समय से चले आ रहे रुख को दोहराया, जिसमें अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों को निशाना बनाने वाले डिजिटल करों का विरोध किया जाता रहा है।
ट्रंप की नई शुल्क चेतावनी
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जो देश डिजिटल सेवा कर लगाना जारी रखेंगे, उनके खिलाफ अमेरिका तुरंत कार्रवाई करेगा। उन्होंने लिखा, "जो भी देश ऐसा कर लगाएगा, उसे तुरंत संयुक्त राज्य अमेरिका भेजे जाने वाले सभी सामानों पर 100 प्रतिशत शुल्क का सामना करना पड़ेगा।"
उन्होंने आगे कहा कि यह नया शुल्क किसी भी व्यापार समझौते से ऊपर होगा। उनके शब्दों में, "यह शुल्क उस देश के साथ किए गए सभी व्यापार समझौतों का स्थान ले लेगा, चाहे वे लागू हो चुके हों, उन पर हस्ताक्षर हो चुके हों या अभी लागू न हुए हों।"
ट्रंप प्रशासन का लंबे समय से यह कहना रहा है कि डिजिटल सेवा कर अमेरिका की प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों, जैसे अल्फाबेट इंक. और मेटा प्लेटफ़ॉर्म्स इंक., को अनुचित रूप से निशाना बनाते हैं।
भारत पर इस शुल्क का असर पड़ने की संभावना नहीं
हालांकि, भारत के इस प्रस्तावित शुल्क से प्रभावित होने की संभावना नहीं है क्योंकि वह पहले ही समानीकरण उपकर (इक्वलाइजेशन लेवी), जिसे आमतौर पर "गूगल कर" कहा जाता है, समाप्त कर चुका है।
भारत ने वर्ष 2016 में यह उपकर लागू किया था ताकि विदेशी डिजिटल कंपनियों द्वारा ऑनलाइन विज्ञापन सेवाओं से अर्जित आय पर कर लगाया जा सके। यह 6 प्रतिशत कर उन विदेशी प्रौद्योगिकी कंपनियों पर लागू होता था, जो भारतीय व्यवसायों से विज्ञापन के माध्यम से आय कमाती थीं, भले ही उनकी भारत में कोई भौतिक उपस्थिति न हो।
बाद में भारत ने वित्त अधिनियम, 2024 के माध्यम से गैर-निवासी ई-कॉमर्स संचालकों पर लगने वाला 2 प्रतिशत समानीकरण उपकर समाप्त कर दिया। इसके बाद वित्त विधेयक, 2025 के जरिए डिजिटल विज्ञापन सेवाओं पर लगने वाला 6 प्रतिशत उपकर भी 1 अप्रैल 2025 से समाप्त कर दिया गया। उस समय सरकार ने कहा था कि इस फैसले से अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव कम करने में मदद मिलेगी।
यूरोपीय देशों पर पड़ सकता है सबसे अधिक असर
वहीं, कई यूरोपीय देशों पर ट्रंप के प्रस्तावित शुल्क का सबसे अधिक प्रभाव पड़ सकता है क्योंकि वे अब भी डिजिटल सेवा कर लागू किए हुए हैं। गौरतलब है कि ट्रंप की यह घोषणा ऐसे समय आई, जब एक दिन पहले ही यूरोपीय संघ के सदस्य देशों ने अमेरिका के साथ एक व्यापार समझौते को मंजूरी दी थी, जिसके तहत यूरोपीय आयात पर अधिकतम 15 प्रतिशत शुल्क तय किया गया। हालांकि, इस समझौते में डिजिटल सेवा कर को शामिल नहीं किया गया, जिससे यह विवाद जारी रहने की संभावना बनी हुई है।
ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि ये कर अमेरिकी कंपनियों के साथ भेदभाव करते हैं क्योंकि दुनिया की अधिकांश बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियां अमेरिका में स्थित हैं।
विवाद के केंद्र में फ्रांस
इस महीने की शुरुआत में ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि फ्रांस अपना डिजिटल सेवा कर वापस नहीं लेता है, तो फ्रांसीसी वाइन और शैंपेन पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा।
फ्रांस ने वर्ष 2019 में देश के भीतर बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों—फेसबुक, अमेज़न, एप्पल और अल्फाबेट (गूगल की मूल कंपनी)—द्वारा अर्जित आय पर 3 प्रतिशत डिजिटल सेवा कर लागू किया था। इसके बाद से यह कर वॉशिंगटन और पेरिस के बीच सबसे बड़े व्यापारिक विवादों में से एक बना हुआ है।
यूरोपीय संघ ने जवाब देने की चेतावनी दी
इसके जवाब में यूरोपीय संघ ने कहा कि वह अपने हितों की रक्षा करेगा।
एजेंस फ़्रांस-प्रेस (एएफपी) के अनुसार, यूरोपीय आयोग के एक प्रवक्ता ने कहा कि यूरोपीय संघ "अपने अधिकारों और नियामकीय स्वायत्तता की रक्षा के लिए तेज़ और निर्णायक जवाब देगा।"
इस बीच, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय कई बार फ्रांस, ब्रिटेन, ऑस्ट्रिया, स्पेन और अन्य यूरोपीय देशों को चेतावनी दे चुका है कि यदि वे अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों पर डिजिटल सेवा कर लगाना जारी रखते हैं, तो उन्हें जवाबी शुल्क का सामना करना पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, डोनाल्ड ट्रंप की यह नई चेतावनी संकेत देती है कि डिजिटल कराधान आने वाले समय में अमेरिका और उसके कई प्रमुख यूरोपीय सहयोगी देशों के बीच व्यापारिक तनाव का एक प्रमुख कारण बना रहेगा।