दक्षिण-पश्चिम मानसून ने महाराष्ट्र में फिर रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार अगले 48 घंटों के भीतर इसके मुंबई पहुंचने की संभावना है। मौसम विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि सोमवार को मुंबई में हुई बारिश मानसूनी वर्षा नहीं, बल्कि प्री-मानसून बारिश थी।
संक्षिप्त विराम के बाद मानसून ने फिर पकड़ी रफ्तार
पिछले सप्ताह मानसून की प्रगति काफी धीमी पड़ गई थी, जिससे कई क्षेत्रों में बारिश में देरी को लेकर चिंता बढ़ गई थी। हालांकि, अब IMD अधिकारियों का कहना है कि खासकर भारत के पश्चिमी तट पर परिस्थितियों में सुधार हुआ है, जिससे मानसून ने फिर आगे बढ़ना शुरू कर दिया है।
इस पुनर्जीवन से महाराष्ट्र के अधिक हिस्सों और मध्य भारत के अंदरूनी इलाकों तक मानसून के धीरे-धीरे आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन गई हैं। इसके बावजूद देशभर में बारिश सामान्य से काफी कम बनी हुई है। IMD के आंकड़ों के अनुसार सोमवार तक देश में कुल वर्षा की कमी 43 प्रतिशत दर्ज की गई।
विशेषज्ञों को धीरे-धीरे प्रगति की उम्मीद
IMD के जलवायु निगरानी और पूर्वानुमान समूह के प्रमुख वैज्ञानिक ओपी श्रीजीत ने कहा कि विभाग ने पहले ही 22 और 23 जून के आसपास मानसून के फिर सक्रिय होने का अनुमान लगाया था।
उन्होंने कहा, “मानसून में हल्का पुनर्जीवन देखा गया है, खासकर पश्चिमी हिस्से में। हमने कुछ दिन पहले ही अनुमान लगाया था कि 22 और 23 जून के आसपास इसकी रफ्तार फिर बढ़ेगी। हालांकि, बंगाल की खाड़ी में अभी तक निम्न दबाव का क्षेत्र नहीं बना है और इसके महीने के अंत तक विकसित होने की संभावना है।”
उन्होंने आगे कहा, “मजबूत मौसमी प्रणाली बनने तक मानसून धीरे-धीरे आगे बढ़ेगा। महीने के अंत तक ही इसकी तीव्रता में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद की जा सकती है।”
निम्न दबाव प्रणाली के अभाव से धीमी हुई रफ्तार
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र नहीं बनने से मानसून की ताकत और विस्तार प्रभावित हो रहा है। निजी मौसम एजेंसी स्काइमेट के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने कहा कि मौजूदा सुधार को फिलहाल अस्थायी पुनर्जीवन के रूप में ही देखा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि 29 जून के आसपास बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है, जिससे मानसूनी गतिविधियां काफी मजबूत हो सकती हैं।
उन्होंने कहा, “इसी कारण उत्तर प्रदेश और दिल्ली तक मानसून की प्रगति में देरी हो रही है। अब इसके जुलाई के पहले सप्ताह तक पहुंचने की उम्मीद की जा सकती है।” सामान्य तौर पर दिल्ली में दक्षिण-पश्चिम मानसून 27 जून के आसपास पहुंचता है।
कई राज्यों में आगे बढ़ा मानसून
IMD के अनुसार 22 जून को दक्षिण-पश्चिम मानसून मध्य अरब सागर के अतिरिक्त हिस्सों, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और बिहार के अन्य क्षेत्रों तक आगे बढ़ गया।
मौसम विभाग ने कहा कि अगले दो दिनों में मानसून के मध्य अरब सागर के शेष हिस्सों और मुंबई समेत महाराष्ट्र के अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। इसके अलावा तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के और हिस्सों में भी इसका विस्तार होने की संभावना है। सोमवार को मानसून की उत्तरी सीमा अलीबाग, पुणे, निजामाबाद, दंतेवाड़ा, बलांगीर, सुंदरगढ़, चतरा, गया और मुजफ्फरपुर से होकर गुजर रही थी।
महाराष्ट्र में मानसूनी गतिविधियां हुई थीं धीमी
IMD ने 8 जून को महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में मानसून के आगमन की घोषणा की थी, जो केरल पहुंचने के केवल चार दिन बाद था। हालांकि, इसके बाद राज्य के अधिकांश हिस्सों में बहुत कम बारिश हुई।
मौसम विशेषज्ञों ने इसकी वजह बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों में स्थानीय मौसमी प्रणालियों का अभाव तथा एल नीनो की परिस्थितियों को बताया। सामान्य परिस्थितियों में मुंबई में मानसून लगभग 11 जून के आसपास पहुंच जाता है।
देशभर में बारिश की भारी कमी
वर्षा के आंकड़े देशभर में बड़ी कमी दिखा रहे हैं। 22 जून तक दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के अनुसार देश में 106 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल 60.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है।
मध्य भारत में सबसे अधिक 67 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में वर्षा सामान्य से 40 प्रतिशत कम रही है, जबकि दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में 28 प्रतिशत की कमी है। उत्तर-पश्चिम भारत में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन वहां भी मौसमी औसत की तुलना में 15 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
एल नीनो का असर पड़ सकता है
IMD ने अनुमान लगाया है कि 2026 के मानसून सीजन के दौरान भारत में दीर्घकालिक औसत वर्षा का लगभग 90 प्रतिशत बारिश होगी। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि एल नीनो की स्थिति विशेष रूप से मानसून के दूसरे हिस्से में वर्षा के पैटर्न को प्रभावित करती रहेगी।
इससे कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होने का खतरा बढ़ सकता है।
फिलहाल मौसम वैज्ञानिक बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव के क्षेत्र के बनने पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इसके बनने से मानसून को मजबूती मिल सकती है और उत्तरी तथा मध्य भारत में इसकी प्रगति तेज हो सकती है।
