लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र के पुरनिया सेक्टर-डी स्थित एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में सोमवार दोपहर भीषण आग लगने से कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों के अनुसार, मृतकों में अधिकांश छात्र और युवा पेशेवर थे, जो एक एनीमेशन प्रशिक्षण संस्थान और गेमिंग जोन से जुड़े हुए थे। इस हादसे में एक दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं।
अधिकारियों का मानना है कि दोपहर करीब 2 बजे बेसमेंट में लगे एक एलईडी बिलबोर्ड में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी। देखते ही देखते आग पूरी इमारत में फैल गई और घने धुएं ने एकमात्र प्रवेश और निकास मार्ग को बंद कर दिया, जिससे कई लोग अंदर फंस गए।
मृतकों में अधिकांश की उम्र 20 से 25 वर्ष के बीच थी। इनमें एनीमेशन प्रशिक्षण केंद्र के छात्र, प्रशिक्षक और गेमिंग सुविधा में मौजूद अन्य लोग शामिल थे।
भगदड़ और जान बचाने की कोशिशें
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग लगने के बाद इमारत में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए संघर्ष करने लगे।
घटनास्थल के वीडियो में कई लोग जोखिम उठाकर बाहर निकलने की कोशिश करते दिखाई दिए। कुछ बिजली के तारों के सहारे नीचे उतरे, जबकि कुछ ने आग से बचने के लिए इमारत से छलांग लगा दी। बचाव दल ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और फंसे लोगों को बाहर निकाला।
बताया गया कि एक छात्र पहली मंजिल से नीचे लगी लोहे की जाली पर कूदकर अपनी जान बचाने में सफल रहा। हालांकि वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना का वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
अधिकारियों ने बताया कि इस इमारत को मूल रूप से आवासीय उपयोग के लिए मंजूरी मिली थी, लेकिन इसका इस्तेमाल व्यावसायिक परिसर के रूप में किया जा रहा था। लखनऊ के मुख्य अग्निशमन अधिकारी अंकुश मित्तल के अनुसार, इमारत के पास फायर नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) नहीं था।
उन्होंने बताया कि 15 मीटर से अधिक ऊंची इमारतों के लिए यह प्रमाणपत्र अनिवार्य होता है, जबकि यह इमारत उस सीमा से नीचे थी। उन्होंने कहा, "संचालकों ने एनओसी के लिए हमसे संपर्क नहीं किया था।"
उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है, जो यह जांच करेगा कि भवन नियमों के उल्लंघन और अग्नि सुरक्षा में कमी ने इस हादसे को कितना गंभीर बनाया।
आवासीय संपत्ति में चल रही थीं व्यावसायिक गतिविधियां
अधिकारियों के अनुसार, बेसमेंट, भूतल और पहली मंजिल पर एक पेट शॉप और क्लिनिक संचालित हो रहे थे। दूसरी मंजिल पर ‘लर्निंग स्पेस: हेड हॉपर स्टूडियो’ नाम का एनीमेशन प्रशिक्षण केंद्र और गेमिंग जोन था, जो 3डी आर्ट प्रोडक्शन और गेम एसेट आउटसोर्सिंग का काम करता है।
इस हादसे ने यह सवाल खड़े कर दिए हैं कि आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत भवन में वर्षों तक व्यावसायिक गतिविधियां कैसे चलती रहीं।
घंटों तक आग बुझाने में जुटे रहे दमकलकर्मी
आग तेजी से फैलने के कारण दमकल विभाग को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। घटनास्थल पर 15 से 16 दमकल गाड़ियों को लगाया गया। आग पर पूरी तरह काबू पाने और क्षेत्र को सुरक्षित करने में चार घंटे से अधिक का समय लगा।
प्रधानमंत्री ने मुआवजे की घोषणा की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख व्यक्त किया और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) से आर्थिक सहायता की घोषणा की।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की सहायता दी जाएगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अलीगढ़ का दौरा बीच में छोड़कर लखनऊ लौटने का फैसला किया। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया, बचाव कार्यों की समीक्षा की और बाद में केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में घायलों से मुलाकात की।
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि हादसे के लिए जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने मृतकों के परिजनों के लिए पांच-पांच लाख रुपये और प्रत्येक घायल के लिए 50,000 रुपये की सहायता की घोषणा की।
राजनाथ सिंह ने तय करने की बात कही जिम्मेदारी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी लखनऊ पहुंचकर घटनास्थल का दौरा किया। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से जानकारी लेने के बाद उन्होंने कहा कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी।
ब्रजेश पाठक ने बताया कि घायलों की सहायता के लिए तुरंत मेडिकल टीमें और एंबुलेंस भेजी गईं। उन्होंने एक्स पर लिखा, "घायलों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है और अधिकारियों को उचित इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। मौके पर छह एंबुलेंस और मेडिकल टीमें मौजूद हैं। मैं भगवान से घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।"
उन्होंने यह भी पुष्टि की कि उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
अस्पतालों में पहुंचाए गए पीड़ित
घटना के बाद 20 से 21 लोगों को किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रेम राज सिंह के अनुसार, 15 लोगों को अस्पताल पहुंचने पर मृत घोषित कर दिया गया।
पांच से छह घायलों को उपचार के लिए भर्ती किया गया और डॉक्टरों ने उनकी स्थिति स्थिर बताई। कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेजा गया।
आवासीय भूखंड को बनाया गया व्यावसायिक परिसर
इस हादसे ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की निगरानी और नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, 1,992 वर्ग फुट की यह संपत्ति वर्ष 2013 में वीरेंद्र और सुरेंद्र नामक दो भाइयों ने खरीदी थी। 2014 में भवन योजना को केवल आवासीय उपयोग के लिए मंजूरी दी गई थी।
इसके बावजूद बाद में यहां व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो गईं। नियमों के अनुसार, व्यावसायिक परिसर कम से कम 24 मीटर चौड़ी सड़क पर होना चाहिए, जबकि यह भवन केवल 18 मीटर चौड़ी सड़क पर स्थित है, जो स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है।
एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेेश कुमार ने स्वीकार किया कि भवन स्वीकृत नक्शे के विपरीत उपयोग में लाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि मंजूर नक्शा आवासीय था और वर्तमान व्यावसायिक उपयोग नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
जांच जारी
बचाव अभियान समाप्त होने के बाद जांच एजेंसियां इस त्रासदी के कारणों और उन कथित उल्लंघनों की जांच कर रही हैं, जिनकी वजह से हादसा इतना भयावह बना।एसआईटी यह भी जांच करेगी कि आवासीय भवन को व्यावसायिक परिसर में कैसे बदला गया, सुरक्षा उपायों की कमी क्यों थी और स्पष्ट नियम उल्लंघनों के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। इस जांच से लखनऊ की हाल के वर्षों की सबसे भीषण अग्नि दुर्घटनाओं में से एक के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो सकती है।
