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नाजुक युद्धविराम, परमाणु विवाद और होर्मुज जलडमरूमध्य की चिंताओं के बीच अमेरिका-ईरान वार्ता जारी
स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के अधिकारियों ने एक नाजुक शांति ढांचे को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण वार्ता शुरू की है। हालांकि, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर मतभेद और इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष से जुड़े तनाव इन बातचीतों की कठिन परीक्षा ले रहे हैं।

अमेरिका और ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने रविवार को स्विट्जरलैंड में प्रत्यक्ष वार्ता शुरू की, जहां दोनों पक्ष पिछले सप्ताह हुए नाजुक अंतरिम समझौते को आगे बढ़ाते हुए दोनों देशों के बीच संघर्ष समाप्त करने के लिए स्थायी समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।

लेक ल्यूसर्न के पास स्थित एक पर्वतीय रिसॉर्ट में आयोजित इन वार्ताओं का उद्देश्य प्रारंभिक समझौते को एक व्यापक समझौते में बदलना है, जिसमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दे और होर्मुज जलडमरूमध्य का भविष्य शामिल है। हालांकि, इजरायल और हिजबुल्लाह से जुड़ा लगातार तनाव इस कूटनीतिक प्रक्रिया के लिए खतरा बना हुआ है।

अंतरिम समझौते के बाद शुरू हुई सीधी बातचीत

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने ईरान के शीर्ष वार्ताकारों, जिनमें संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल थे, से मुलाकात की। पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधि भी मध्यस्थ के रूप में मौजूद रहे।

बैठक से पहले ईरानी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से लगभग कोई उपस्थिति नहीं दर्ज कराई। वांस के पत्रकारों से संक्षिप्त बातचीत करने के कुछ समय बाद ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने पुष्टि की कि चार पक्षों के बीच आधिकारिक बातचीत शुरू हो चुकी है।

यह वार्ता उस समझौते के बाद हो रही है, जिस पर पिछले सप्ताह हस्ताक्षर किए गए थे और जिसके तहत दोनों देशों को स्थायी व्यवस्था के विवरण तय करने के लिए 60 दिन का समय दिया गया है। इस समझौते के वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजारों पर बड़े प्रभाव पड़ सकते हैं।

परमाणु कार्यक्रम सबसे अहम मुद्दा

वाशिंगटन इन वार्ताओं के जरिए तेहरान से उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर प्रतिबद्धताएं हासिल करना चाहता है। बातचीत शुरू होने से पहले वांस ने इस क्षण के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “अब हमारे सामने सवाल यह है कि हम मिलकर और कितना हासिल कर सकते हैं? क्या हम एक नई शुरुआत कर सकते हैं?”

उन्होंने आगे कहा, “क्या हम मध्य पूर्व के संबंधों को स्थायी रूप से बदल सकते हैं, या फिर हम पुराने तरीके पर लौट जाएंगे, जो हमारी पसंद नहीं है, लेकिन ऐसा होना पूरी तरह संभव है।”

अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं स्वीकार करे, जबकि ईरान लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने तेहरान के रुख को दोहराते हुए कहा, “एक बात निश्चित है कि हम यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार से कभी पीछे नहीं हटेंगे और दूसरे पक्ष को भी इसे स्वीकार करना होगा।”

लेबनान संघर्ष से बढ़ीं चुनौतियां

कूटनीतिक सफलता के बावजूद लेबनान में फिर से शुरू हुई हिंसा ने बातचीत को जटिल बना दिया है। अंतरिम समझौते में क्षेत्रीय शत्रुता समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने की बात कही गई थी। लेकिन समझौते के कुछ ही दिनों बाद इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष तेज हो गया।

शनिवार को हुआ युद्धविराम रविवार तक प्रभावी दिखाई दिया, लेकिन दोनों पक्ष सतर्क बने हुए हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि वार्ता के दौरान तेहरान का मुख्य ध्यान इजरायल और लेबनान के बीच जारी संघर्ष पर रहेगा।

बघाई के अनुसार, ईरान चाहता है कि समझौते का क्रियान्वयन सभी चल रहे संघर्षों को समाप्त करने वाली शर्त से शुरू हो, जिसमें हिजबुल्लाह से जुड़ी लड़ाई भी शामिल है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका या तो इजरायल से युद्धविराम का पालन कराने में असमर्थ है या ऐसा करने की इच्छाशक्ति नहीं दिखा रहा।

पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता जारी

पाकिस्तान और कतर पूरे संघर्ष के दौरान वाशिंगटन और तेहरान के बीच संवाद कायम रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। ईरानी अधिकारियों से मुलाकात से पहले वांस ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से अलग-अलग बातचीत की। आसिम मुनीर पहले की वार्ताओं में भी प्रमुख मध्यस्थ रहे हैं।

आसिम मुनीर का स्वागत करते हुए वांस ने कहा, “क्या हाल है दोस्त! आपसे मिलकर अच्छा लगा।”

इसके बाद शहबाज शरीफ ने गालिबाफ और अराघची से अलग-अलग मुलाकात की। कतर के प्रतिनिधियों ने भी व्यापक समझौते की दिशा में गति बनाए रखने के उद्देश्य से चर्चा में हिस्सा लिया।

अंतरराष्ट्रीय परमाणु निगरानी एजेंसी की नजर

इन वार्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रमुख राफेल ग्रोसी ने सम्मेलन के दौरान स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्री इग्नाजियो कैसिस से मुलाकात की।

आईएईए ने 2015 में हुए उस परमाणु समझौते की निगरानी की थी, जो पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में अमेरिका और ईरान के बीच हुआ था। यह समझौता 2018 में समाप्त हो गया, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को इस समझौते से बाहर कर लिया था।

देरी के बाद आखिरकार शुरू हुई बैठक

यह बैठक लगभग रद्द होने की स्थिति में पहुंच गई थी। जेडी वांस को शुक्रवार को स्विट्जरलैंड पहुंचना था, लेकिन लेबनान में बढ़ती हिंसा के कारण ईरानी अधिकारियों ने शुरुआती योजना रद्द कर दी थी।

बाद में नए कूटनीतिक प्रयासों और लेबनान में अस्थायी युद्धविराम के बाद वार्ता फिर से शुरू करने पर सहमति बनी। वेंस के साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर भी स्विट्जरलैंड पहुंचे। दोनों उपराष्ट्रपति के पहुंचने से पहले ही बातचीत के तकनीकी पहलुओं पर काम शुरू कर चुके थे।

वांस के स्विट्जरलैंड में कम समय तक रुकने की उम्मीद है, जबकि विटकॉफ और कुशनर विस्तृत वार्ता प्रक्रिया का नेतृत्व करेंगे।

समझौते पर राजनीतिक आलोचना

इस समझौते को लेकर अमेरिका में काफी बहस छिड़ी हुई है। कुछ रिपब्लिकन कट्टरपंथी नेताओं ने ट्रंप और वेंस द्वारा तेहरान के साथ समझौता करने की नीति की आलोचना की है।

आलोचकों ने इस व्यवस्था की तुलना ओबामा काल के परमाणु समझौते से की है, जिसके बारे में कई रिपब्लिकन नेताओं का मानना था कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को स्थायी रूप से रोकने में विफल रहा था।

मौजूदा ढांचे के तहत ईरान को बिना प्रतिबंध तेल बेचने और पहले से फ्रीज की गई अरबों डॉलर की संपत्तियों तक दोबारा पहुंच मिलने की संभावना है। बदले में तेहरान को उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के अपने भंडार के कुछ हिस्से को कम करना होगा।

समझौते के तहत अगले 60 दिनों तक वाणिज्यिक जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से बिना किसी शुल्क के गुजरने की अनुमति होगी, हालांकि भविष्य में शुल्क लगाए जाने की संभावना बनी रहेगी।

हाल ही में ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि 60 दिनों के भीतर बातचीत विफल हो जाती है तो अमेरिका इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर अपना शुल्क लगा सकता है।

बाजारों की नजर नतीजों पर

इन वार्ताओं पर वैश्विक बाजारों की करीबी नजर है। व्हाइट हाउस निवेशकों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा है कि संघर्ष का तेल की कीमतों पर असर अस्थायी रहेगा। अंतरिम समझौते की घोषणा के बाद तेल वायदा कीमतों में लगभग 8 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे यह उम्मीद बढ़ी कि ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट से बचा जा सकेगा।

हालांकि, लेबनान, हिजबुल्लाह और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण वित्तीय बाजार वार्ता के हर चरण पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।

अभी भी बाकी हैं बड़ी चुनौतियां

हालांकि प्रत्यक्ष वार्ता की शुरुआत एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है, लेकिन कई बड़ी बाधाएं अभी भी मौजूद हैं। न तो इजरायल और न ही हिजबुल्लाह ने अमेरिका-ईरान समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और दोनों पक्ष अपने कड़े रुख पर कायम हैं।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना की मौजूदगी तब तक बनाए रखने की कसम खाई है, जब तक सभी सुरक्षा खतरों को समाप्त नहीं कर दिया जाता। वहीं, हिजबुल्लाह का कहना है कि वह तब तक प्रतिरोध जारी रखेगा, जब तक इजरायली सेना पीछे नहीं हटती।

समझौते के बाद के दिनों में हुई झड़पों में लेबनान में 47 लोगों और पांच इजरायली सैनिकों की मौत की खबर है। स्विट्जरलैंड में जारी बातचीत के दौरान राजनयिकों को उम्मीद है कि 60 दिनों की यह प्रक्रिया परमाणु चिंताओं, क्षेत्रीय सुरक्षा और दुनिया के सबसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्थिरता सुनिश्चित करने वाला एक स्थायी ढांचा तैयार करने में सफल होगी।