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बेंजामिन नेतन्याहू ने इजरायल के सैन्य अभियानों का बचाव किया, ईरान के परमाणु कार्यक्रम का विरोध दोहराया
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हालिया सैन्य अभियानों का बचाव करते हुए कहा कि जब तक वह प्रधानमंत्री पद पर हैं, तब तक ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों ने देश की सुरक्षा को मजबूत किया है और क्षेत्रीय खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया है।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने जेएनएस इंटरनेशनल पॉलिसी समिट 2026 में एक व्यापक भाषण दिया, जिसमें उन्होंने गाजा, लेबनान और ईरान में इजरायल की हालिया सैन्य कार्रवाइयों का बचाव किया। उन्होंने अपनी सरकार के इस रुख को भी दोहराया कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

समर्थकों, नीति-निर्माताओं और अंतरराष्ट्रीय मेहमानों को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने पिछले एक वर्ष के दौरान इजरायल द्वारा हासिल की गई उन उपलब्धियों को रेखांकित किया, जिन्हें उन्होंने देश की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनका तर्क था कि इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों ने राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत किया है और मध्य पूर्व के रणनीतिक परिदृश्य को बदल दिया है।

ट्रंप के साथ संबंधों पर बोले नेतन्याहू

नेतन्याहू ने अपने भाषण की शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपने संबंधों पर चर्चा करते हुए की। उन्होंने उन दावों को खारिज किया कि दोनों में से कोई एक नेता दूसरे की नीतियों को नियंत्रित करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देश अपने-अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेते हैं। उन्होंने कहा, "हम स्वतंत्र और गौरवशाली देशों के नेता हैं। हम अपने हितों के लिए खड़े हैं। मैं इजरायल के हितों और उसकी सुरक्षा के लिए खड़ा हूं।"

उन्होंने आगे कहा कि इजरायल और अमेरिका के लक्ष्य अक्सर समान होते हैं, लेकिन कुछ मुद्दों पर मतभेद भी हो सकते हैं। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग जारी रहता है।

गाजा, हिजबुल्लाह और ईरान को लेकर फैसलों का बचाव

इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें कई बड़े सैन्य फैसलों को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा, जिनमें रफाह में अभियान, हिजबुल्लाह पर हमले और ईरान के खिलाफ की गई कार्रवाइयां शामिल हैं। नेतन्याहू के अनुसार, ये अभियान इजरायल के सामने मौजूद गंभीर सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए जरूरी थे। उन्होंने कहा, "मुझसे कहा गया था कि रफाह में प्रवेश न करें। मैंने रफाह में प्रवेश किया। मुझसे कहा गया था कि हिजबुल्लाह पर हमला न करें। हमने हिजबुल्लाह पर हमला किया। मुझसे कहा गया था कि ईरान का सामना न करें। हमने ईरान का सामना किया।"

उन्होंने तर्क दिया कि इन कदमों ने इजरायल के खिलाफ भविष्य के खतरों को रोकने में मदद की।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रहा विशेष जोर

भाषण का एक बड़ा हिस्सा ईरान की परमाणु गतिविधियों पर केंद्रित रहा। नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल और अमेरिका की सैन्य कार्रवाइयों का निशाना ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों से जुड़े ठिकाने, बुनियादी ढांचे और कर्मी थे। उन्होंने कहा, "हमने ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया।"

नेतन्याहू ने दावा किया कि इन अभियानों से ईरान की क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचा और इजरायल के लिए एक बड़े सुरक्षा खतरे को कम किया गया।

अमेरिका-इजरायल सहयोग की सराहना

नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों के दौरान अमेरिका और इजरायल के बीच हुए सहयोग की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी ने महत्वपूर्ण सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने में मदद की और तेहरान पर दबाव बढ़ाया।

उन्होंने यह भी दावा किया कि इन अभियानों ने क्षेत्र में ईरान के प्रभाव को कमजोर किया और उसके महत्वपूर्ण सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचाया।

हमास और हिजबुल्लाह के खिलाफ अभियानों का जिक्र

प्रधानमंत्री ने हमास और हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल की कार्रवाइयों को भी बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इजरायल ने दोनों संगठनों के वरिष्ठ नेताओं और सैन्य संसाधनों को निशाना बनाया।

नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि इजरायली अभियानों ने संघर्ष के दौरान बंधक बनाए गए सभी लोगों की वापसी सुनिश्चित की। उन्होंने कहा, "हम हर एक बंधक को इजरायल वापस लेकर आए। उनमें से आखिरी व्यक्ति को भी।"

सुरक्षा क्षेत्र बने रहेंगे

लेबनान, गाजा और सीरिया की स्थिति पर बोलते हुए नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल उन इलाकों में सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखेगा जिन्हें वह राष्ट्रीय रक्षा के लिए आवश्यक मानता है।उन्होंने कहा, "जब तक हमें अपने लोगों की सुरक्षा करनी होगी, हम दक्षिणी लेबनान के सुरक्षा क्षेत्र में बने रहेंगे।"

उनका तर्क था कि हर देश को सीमा पार से आने वाले खतरों से अपने नागरिकों की रक्षा करने का अधिकार है।

इजरायल की सुरक्षा नीति में बदलाव

नेतन्याहू ने कहा कि हालिया संघर्षों ने इजरायल को अधिक सक्रिय सुरक्षा रणनीति अपनाने के लिए प्रेरित किया है। उनके अनुसार, अब देश खतरों के बड़ा रूप लेने से पहले ही कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा, "हम पहल करते हैं। हम हमला करते हैं। हम चौंकाते हैं।"

उन्होंने इस दृष्टिकोण को इजरायल की रक्षा नीति में बड़ा बदलाव बताया।

परिवार की विरासत का उल्लेख

इजरायली नेता ने अपने भाई योनातान नेतन्याहू की विरासत का भी जिक्र किया, जो 1976 के एंटेबे बंधक बचाव अभियान के दौरान मारे गए थे। उन्होंने कहा कि उस अभियान ने सुरक्षा चुनौतियों का सामना करते समय दृढ़ संकल्प के महत्व को साबित किया था।

नेतन्याहू ने अपने पिता बेंज़ियोन नेतन्याहू की टिप्पणियों का भी उल्लेख किया, जिन्होंने ईरान से उत्पन्न खतरे के बारे में चेतावनी दी थी और विश्वास जताया था कि इजरायल उस चुनौती को पार कर लेगा।

ईरान को लेकर सख्त संदेश

ईरान से जुड़ी कूटनीतिक कोशिशों पर चर्चा करते हुए नेतन्याहू ने अपना सबसे सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा, "वार्ताओं में चाहे जो हो, समझौता हो या न हो, मैं आपसे वादा करता हूं कि जब तक मैं इजरायल का प्रधानमंत्री हूं, ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकेगा।"

यह बयान ईरान के परमाणु हथियार हासिल करने के खिलाफ इजरायल के लंबे समय से चले आ रहे विरोध को दर्शाता है।

सैन्य अभियानों का बचाव

नेतन्याहू ने इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों की आलोचनाओं का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इजरायली सेना घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सक्रिय सशस्त्र समूहों को निशाना बनाते समय नागरिक हताहतों को कम करने के लिए व्यापक कदम उठाती है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि इजरायल की लड़ाई आम नागरिकों के खिलाफ नहीं, बल्कि उग्रवादी संगठनों के खिलाफ है।

यहूदी-विरोध के खिलाफ कार्रवाई का आह्वान

अपने संबोधन के अंत में नेतन्याहू ने दुनिया भर में बढ़ते यहूदी-विरोध (एंटीसेमिटिज्म) पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने यहूदी समुदायों से गलत सूचनाओं का मुकाबला करने और अपनी पहचान तथा मूल्यों की रक्षा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "खड़े होइए। झुकिए मत। डरिए मत। जवाब दीजिए।"

उन्होंने समर्थकों से यहूदी-विरोध के खिलाफ आवाज उठाने और इजरायल का समर्थन करने की अपील की।

सुरक्षा प्राथमिकताओं को दोहराया

अपने भाषण के समापन पर नेतन्याहू ने इजरायल की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और देश के सैन्य कर्मियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इजरायल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक माने जाने वाले जोखिमों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा और अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता रहेगा।

यह भाषण हालिया इजरायली सैन्य अभियानों के बचाव के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और इजरायल की भविष्य की रणनीतिक प्राथमिकताओं पर सरकार के रुख को स्पष्ट करने वाला बयान भी था।