अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को ईरान के साथ हाल ही में हुए समझौते का जोरदार बचाव करते हुए उन आरोपों को खारिज कर दिया कि संघर्ष समाप्त करने के लिए उन्होंने बहुत अधिक रियायतें दी हैं। स्विट्जरलैंड में समझौते को लागू करने संबंधी वार्ताओं की तैयारी शुरू होने के बीच ट्रंप ने कहा कि इस समझौते के सकारात्मक आर्थिक परिणाम पहले ही दिखाई देने लगे हैं।
वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हस्ताक्षरित इस समझौते का उद्देश्य हालिया पश्चिम एशियाई संघर्ष को समाप्त करना है। इसकी घोषणा के बाद तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही और होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात सामान्य होने की उम्मीदें बढ़ीं। हालांकि, समझौते को पूरी तरह लागू करने से पहले दोनों पक्षों के बीच लगभग दो महीने तक बातचीत जारी रहने की संभावना है।
डोनाल्ड ट्रंप और मसूद पेजेशकियन ने ऐतिहासिक समझौते पर किए हस्ताक्षर
अप्रत्याशित घटनाक्रम में डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को पेरिस के बाहरी क्षेत्र में स्थित वर्साय पैलेस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ मोमबत्ती की रोशनी में आयोजित रात्रिभोज के दौरान समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए।
यह हस्ताक्षर कई दिनों की अनिश्चितता के बाद हुए, क्योंकि इस सप्ताह हुए समझौते को आधिकारिक रूप से अंतिम रूप देने की तारीख स्पष्ट नहीं थी। इमैनुएल मैक्रों के लिए वर्साय में समारोह आयोजित करना प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण माना गया। प्रथम विश्व युद्ध को समाप्त करने वाली संधि भी इसी महल में हस्ताक्षरित हुई थी, इसलिए जी-7 शिखर सम्मेलन के तुरंत बाद यह आयोजन फ्रांसीसी राष्ट्रपति के लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता माना गया।
जब डोनाल्ड ट्रंप ने गाढ़ी काली स्याही से दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए, तब इमैनुएल मैक्रों ने कथित तौर पर खुशी जताते हुए कहा, "बहुत बढ़िया"। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी समझौते पर हस्ताक्षर किए। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा, "अब समझौते के क्रियान्वयन की परीक्षा लेने का समय आ गया है।"
अमेरिका-ईरान समझौते के आलोचकों को ट्रंप का जवाब
समझौते पर हस्ताक्षर के तुरंत बाद डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से उन आलोचकों को जवाब दिया, जिनका कहना था कि उन्होंने ईरान के खिलाफ पर्याप्त सख्त रुख नहीं अपनाया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने शेयर बाजार के रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने और तेल की कीमतों में गिरावट को इस समझौते के वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी होने का प्रमाण बताया।
एक तीखी टिप्पणी में ट्रंप ने लिखा, "ये मूर्ख लोग, जो सोचते हैं कि मैं ईरान के प्रति पर्याप्त सख्त नहीं रहा, जबकि शेयर बाजार ने नया रिकॉर्ड बनाया है और तेल की कीमतें लगातार गिर रही हैं, वे या तो जलन रखने वाले हैं, बुरे लोग हैं या फिर मूर्ख हैं।"
उनकी इस टिप्पणी ने इस बहस को और तेज कर दिया कि क्या संघर्ष समाप्त करने के बदले ईरान को बहुत अधिक लाभ दिया गया है।
समझौते की घोषणा के बाद तेल की कीमतों में गिरावट
वैश्विक तेल बाजारों ने इस समझौते का सकारात्मक स्वागत किया। गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे सप्ताहांत में समझौते की शुरुआती खबरों के बाद शुरू हुई गिरावट और गहरी हो गई।
निवेशकों ने भू-राजनीतिक तनाव कम होने और पश्चिम एशिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के फिर से खुलने की संभावना का स्वागत किया। दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा गलियारों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य संघर्ष के दौरान गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था। समुद्री यातायात पर लगे प्रतिबंधों के कारण ऊर्जा की कीमतें बढ़ गई थीं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं।
होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने से बाजार को राहत मिलने की उम्मीद
समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की योजना शामिल है, जिसके रास्ते दुनिया के तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा गुजरता है। संघर्ष के दौरान इस मार्ग पर यातायात बाधित होने से ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी और ईंधन की कीमतों में तेजी आई। तनाव कम होने के साथ व्यापारियों को समुद्री गतिविधियों में सुधार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में अधिक स्थिरता की उम्मीद है।
स्विट्जरलैंड में समझौते के क्रियान्वयन पर होगी चर्चा
अब ध्यान समझौते के अगले चरण पर केंद्रित है। दोनों देशों के अधिकारी स्विट्जरलैंड में बैठक कर इस समझौते को लागू करने और उसकी निगरानी की प्रक्रिया पर चर्चा करेंगे। यह वार्ता अगले दो महीनों तक जारी रह सकती है। समझौते के पूरी तरह प्रभावी होने से पहले कई तकनीकी और कूटनीतिक मुद्दों का समाधान करना आवश्यक होगा।
हालिया पश्चिम एशियाई संघर्ष समाप्त करने की दिशा में कदम
इस समझौते का उद्देश्य ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच हालिया संघर्ष को समाप्त करना है, जिसके कारण लगभग पांच सप्ताह तक भीषण लड़ाई चली थी। अप्रैल की शुरुआत में युद्धविराम लागू होने के बाद स्थिति में कुछ सुधार आया। इस संघर्ष ने क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित किया, अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में बाधा डाली और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर दबाव बढ़ाया।
समझौते के समर्थक इसे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मानते हैं, जिससे तनाव कम होने और आर्थिक स्थिरता बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, आलोचक अब भी सतर्क हैं और सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह समझौता स्थायी शांति स्थापित कर पाएगा और भविष्य में क्षेत्र में नए टकरावों को रोक सकेगा।