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ट्रंप की आलोचना के बावजूद इज़राइल ने लेबनान पर हमले जारी रखे, बढ़ते तनाव के बीच क्षेत्रीय चिंताएं गहराईं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना के बावजूद इज़राइल ने लेबनान पर अपने हमले जारी रखे। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है तथा हाल ही में घोषित अमेरिका-ईरान समझौते के भविष्य को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।

इज़राइल ने मंगलवार को भी लेबनान पर अपने सैन्य हमले जारी रखे, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी आलोचना की थी। ये हमले ट्रंप द्वारा इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर हाल ही में ईरान के साथ घोषित समझौते को लगातार सैन्य कार्रवाई के जरिए नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाने के कुछ घंटों बाद हुए।

इज़राइली ड्रोन ने दक्षिणी लेबनान में दो वाहनों को निशाना बनाया। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी (NNA) के अनुसार, इन हमलों में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।

इन ताजा हमलों से लेबनान में मृतकों की संख्या और बढ़ गई है। ट्रंप द्वारा ईरान के साथ समझौते की घोषणा के बाद से इज़राइली हमलों में लेबनान में कम से कम पांच लोगों की जान जा चुकी है। लेबनानी अधिकारियों का कहना है कि मार्च से अब तक देशभर में इज़राइली हमलों में कम से कम 3,826 लोग मारे गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि मलबे में दबे शवों की तलाश अभी भी जारी है।

ट्रंप ने नेतन्याहू पर जताई नाराजगी

फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने इज़राइल की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि लगातार हमलों से ईरान के साथ हुए समझौते पर "नकारात्मक प्रभाव" पड़ रहा है। उन्होंने लेबनान की स्थिति को लेकर नेतन्याहू के रवैये पर भी असंतोष व्यक्त किया।

ट्रंप ने आगे कहा, “इज़राइल बहुत लंबे समय से हिज़्बुल्लाह से लड़ रहा है और बहुत ज्यादा लोग मारे जा रहे हैं। हर बार किसी एक व्यक्ति को तलाशने के लिए पूरी अपार्टमेंट इमारत गिराने की जरूरत नहीं है। क्योंकि उन इमारतों में बहुत सारे लोग रहते हैं और वे सभी हिज़्बुल्लाह के सदस्य नहीं हैं, यह मैं आपको बता सकता हूं।”

उनकी यह टिप्पणी लेबनान में इज़राइल के सैन्य अभियान पर सार्वजनिक रूप से की गई उनकी सबसे कड़ी आलोचनाओं में से एक मानी जा रही है।

ईरान ने समझौते को लेबनान में शांति से जोड़ा

ईरान ने भी अमेरिका-ईरान समझौते को लेबनान की स्थिति से जोड़ते हुए बयान दिया। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि भविष्य में लेबनान पर होने वाला कोई भी इज़राइली हमला वॉशिंगटन के साथ हुए समझौते का उल्लंघन माना जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक इज़राइली सेना संघर्ष के दौरान कब्जाए गए इलाकों से पीछे नहीं हटती, तब तक क्षेत्र में स्थायी शांति संभव नहीं है।

अराघची ने कहा, “अब से लेबनान पर ज़ायोनी शासन का कोई भी सैन्य हमला और लेबनानी क्षेत्रों पर उसका लगातार कब्जा हमारी नजर में समझौता ज्ञापन का उल्लंघन माना जाएगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि, “इस युद्ध के दौरान कब्जा किए गए क्षेत्रों से इज़राइली सेना की वापसी के बिना स्थायी शांति संभव नहीं होगी।”

इज़राइल अपने रुख पर कायम

ट्रंप और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबाव के बावजूद नेतन्याहू ने अपने रुख में बदलाव के कोई संकेत नहीं दिए हैं। उन्होंने कहा है कि इज़राइल जरूरत पड़ने तक लेबनान में सैन्य अभियान जारी रखेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इज़राइली सेना कब्जे वाले इलाकों में अनिश्चितकाल तक बनी रहेगी।

लेबनानी अधिकारियों के अनुसार, संघर्ष के कारण दक्षिणी लेबनान से 6 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं और कई निवासी अब तक अपने घर नहीं लौट पाए हैं।

इज़राइली रक्षा मंत्री ने बताई सुरक्षा योजना

इज़राइल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने पहले दक्षिणी लेबनान को लेकर देश का रुख स्पष्ट किया था। मार्च में उन्होंने कहा था,

“दक्षिणी लेबनान से उत्तर की ओर गए 6 लाख से अधिक निवासियों की वापसी लितानी नदी के दक्षिण में पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी, जब तक कि उत्तरी इज़राइल के निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती। सीमा के पास स्थित लेबनानी गांवों के सभी घरों को गाजा के रफ़ाह और बेत हनून मॉडल के अनुसार नष्ट कर दिया जाएगा, ताकि उत्तरी निवासियों के लिए सीमा के पास मौजूद खतरों को हमेशा के लिए खत्म किया जा सके।”

काट्ज़ ने यह भी कहा कि इज़राइली सेना इज़राइल-लेबनान सीमा से लगभग 20 से 30 किलोमीटर अंदर लितानी नदी तक के क्षेत्र पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगी।

क्षेत्र में तनाव बरकरार

ताजा हमले इस बात को दर्शाते हैं कि क्षेत्र की स्थिति अब भी बेहद नाजुक बनी हुई है। अमेरिका और ईरान कूटनीतिक प्रयासों के जरिए तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लेबनान में जारी संघर्ष इन प्रयासों के सामने चुनौती बना हुआ है।

इज़राइल अपना सैन्य अभियान जारी रखे हुए है, ईरान आगे के हमलों के खिलाफ चेतावनी दे रहा है और ट्रंप खुलकर नेतन्याहू की रणनीति की आलोचना कर रहे हैं। ऐसे में यह अनिश्चित बना हुआ है कि क्षेत्र में व्यापक शांति स्थापित करने के प्रयास कितने सफल हो पाएंगे।