जिनेवा में पड़ोसी फ्रांस में होने वाले जी7 शिखर सम्मेलन से पहले रविवार को हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। हालांकि, प्रदर्शन तब हिंसक हो गया जब कुछ लोगों ने संपत्तियों में तोड़फोड़ की, एक टेस्ला वाहन में आग लगा दी और संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के एक कार्यालय को नुकसान पहुंचाया। स्थिति बिगड़ने पर शहर के केंद्र में झड़पें शुरू हो गईं, जिसके जवाब में स्विस पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े।
शांतिपूर्ण मार्च हिंसा में बदला
करीब 20,000 लोगों ने इस विरोध मार्च में हिस्सा लिया, जिसकी शुरुआत शांतिपूर्ण ढंग से हुई थी। लेकिन बाद में तनाव तब बढ़ गया जब प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने पूंजीवाद और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतीक माने जाने वाले स्थानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।
प्रदर्शनकारियों ने एक खड़ी टेस्ला कार में आग लगा दी और संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी की इमारत की खिड़कियां तोड़ दीं। कुछ लोगों ने जमीन से ईंटें उखाड़कर पुलिसकर्मियों पर भी फेंकीं। रॉयटर्स के प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जिनेवा की सड़कों पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और आंसू गैस के फैलने से वहां मौजूद परिवारों और बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जी7 के खिलाफ प्रदर्शनकारियों का गुस्सा
कई प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे जी7 शिखर सम्मेलन का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनके अनुसार यह दुनिया के सबसे शक्तिशाली राजनीतिक और आर्थिक नेताओं का मंच है। प्रदर्शनकारियों का तर्क था कि यह सम्मेलन ऐसे समय में धन और प्रभाव के केंद्रीकरण का प्रतीक है, जब दुनिया के कई लोग आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी पिप्पा सॉजी ने कहा, “मेरे लिए यह अमीरों की बैठक है, जो एक बार फिर दिखाती है कि अमीर और अमीर होते जा रहे हैं जबकि गरीब पीछे छूट रहे हैं।”
आर्थिक असमानता पर केंद्रित रहा विरोध
ये प्रदर्शन ऐसे समय हुए हैं जब टेस्ला के मालिक और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार रह चुके एलन मस्क दुनिया के पहले खरबपति (ट्रिलियनेयर) बने हैं। कई प्रदर्शनकारियों ने बढ़ती आर्थिक असमानता को इस मार्च में शामिल होने का प्रमुख कारण बताया। पिछले कई वर्षों से जी7 शिखर सम्मेलनों के दौरान पूंजीवाद, वैश्वीकरण, जलवायु परिवर्तन और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं।
फ्रांस में जुटेंगे जी7 देशों के नेता
जी7 शिखर सम्मेलन 15 से 17 जून तक फ्रांस के एवियन-ले-बैंस शहर में आयोजित होगा, जो लेक जिनेवा के किनारे स्थित है। इस बैठक में अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, इटली और जापान के नेता भाग लेंगे। इनके साथ यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। बैठक के एजेंडे में मध्य पूर्व और यूक्रेन के संघर्ष प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। इसके अलावा ईरान से जुड़ी कूटनीतिक कोशिशों और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
जिनेवा में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
हिंसा की आशंका को देखते हुए अधिकारियों ने प्रदर्शन से पहले जिनेवा में सैकड़ों दंगा-रोधी पुलिसकर्मियों को तैनात किया था। एहतियात के तौर पर कई व्यापारिक प्रतिष्ठानों और दुकानों ने अपनी खिड़कियों तथा शोरूम को लकड़ी के बोर्डों से ढक दिया था।
कुछ प्रदर्शनकारियों ने इन सुरक्षा इंतजामों की आलोचना भी की। मैटिया पिकार्ड ने कहा, “यह प्रदर्शनकारियों को डराने, लोगों को भयभीत करने और उन्हें विरोध में शामिल होने से रोकने की कोशिश है।”
लैंगिक समानता का मुद्दा भी उठा
कई प्रदर्शनकारियों ने आर्थिक असमानता के अलावा सामाजिक मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। प्रदर्शनकारी क्लेलिया कोलिन ने कहा कि वह लैंगिक असमानता और जी7 देशों द्वारा बढ़ावा दिए जा रहे मूल्यों की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहती हैं। उन्होंने कहा, “जी7 द्वारा प्रतिनिधित्व किए जाने वाले मूल्य पूरी तरह स्त्री-विरोधी हैं और वे असमानता को बढ़ावा देते हैं।”
शिखर सम्मेलन से पहले बढ़ा तनाव
जिनेवा में हुई अशांति यह दिखाती है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों को लेकर कितना व्यापक विरोध मौजूद है।
हालांकि अधिकांश प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन किया, लेकिन हिंसा और पुलिस की कार्रवाई ने उन तनावों को उजागर कर दिया जो ऐसे सम्मेलन से पहले अक्सर देखने को मिलते हैं।
सोमवार से शुरू होने वाला जी7 शिखर सम्मेलन कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित होगा, जबकि असमानता, वैश्विक संघर्षों और आर्थिक शक्ति के केंद्रीकरण को लेकर कार्यकर्ताओं की निगाहें इस पर बनी रहेंगी।
