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ईरान का कहना है कि आईआरजीसी की सुरक्षा में होर्मुज़ जलडमरूमध्य से 28 जहाज गुजरे
ईरान ने कहा कि परमाणु वार्ताओं और समुद्री सुरक्षा को लेकर अमेरिका के साथ जारी तनाव के बीच आईआरजीसी की सुरक्षा में 28 वाणिज्यिक जहाजों ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार किया।

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने रविवार को घोषणा की कि पिछले 24 घंटों के दौरान तेल टैंकरों, कंटेनर जहाजों और अन्य मालवाहक पोतों सहित 28 वाणिज्यिक जहाजों ने आईआरजीसी नौसेना की निगरानी और सुरक्षा में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार किया। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और खाड़ी क्षेत्र में उसकी समुद्री गतिविधियों को लेकर तेहरान और वाशिंगटन के बीच तनाव और मतभेद जारी हैं।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर मजबूत नियंत्रण का दावा

आईआरजीसी ने कहा कि उसकी नौसैनिक सेनाएं इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर लगातार निगरानी रख रही हैं। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में से एक माना जाता है।

आईआरजीसी ने कहा, “हम होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर लगातार, दृढ़ता और अधिकार के साथ बुद्धिमत्तापूर्ण नियंत्रण बनाए हुए हैं।” इस बयान के जरिए ईरान ने क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद समुद्री यातायात की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपनी क्षमता को रेखांकित किया।

ट्रंप बोले- ईरान ने दिया आश्वासन

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश नहीं करेगा।

ट्रंप की इस टिप्पणी से दोनों देशों के बीच चल रही चर्चाओं में कुछ प्रगति के संकेत मिले। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने वार्ता को लेकर ट्रंप के कई सार्वजनिक बयानों पर सवाल उठाए हैं।

तेहरान का कहना है कि कई महत्वपूर्ण मतभेद अभी भी बरकरार हैं और अंतिम समझौते तक पहुंचने में अभी काफी समय लग सकता है।

जमे हुए फंड जारी करने की मांग

ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ किसी व्यापक समझौते में लगभग 12 अरब डॉलर की जमी हुई ईरानी संपत्तियों को जारी करना शामिल होना चाहिए। उनका कहना है कि इसके बिना सार्थक वार्ता आगे नहीं बढ़ सकती।

तेहरान ने उन रिपोर्टों का भी खंडन किया, जिनमें दावा किया गया था कि वह भविष्य के किसी परमाणु समझौते के तहत अपने समृद्ध यूरेनियम भंडार को समाप्त करने पर सहमत हो जाएगा।

ईरान लगातार यह दोहरा रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। साथ ही वह उन मांगों का विरोध कर रहा है, जो उसके यूरेनियम भंडार को बड़े पैमाने पर सीमित कर सकती हैं।

ईरान जा रहे जहाज को अमेरिकी सेना ने रोका

राजनयिक तनाव के बीच अमेरिकी सेना ने एक ऐसे मालवाहक जहाज के खिलाफ कार्रवाई की, जो एक ईरानी बंदरगाह की ओर बढ़ रहा था।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, गाम्बिया के ध्वज वाला एम/वी लियान स्टार नामक मालवाहक जहाज क्षेत्रीय जलक्षेत्र से गुजरते समय बार-बार भेजी गई चेतावनियों का जवाब नहीं दे रहा था।

सेंटकॉम ने बताया कि 29 मई को जहाज ने अमेरिकी बलों द्वारा भेजे गए 20 से अधिक संदेशों को नजरअंदाज कर दिया।

हेलफायर मिसाइल से जहाज को निष्क्रिय किया

अमेरिकी सेना ने बताया कि उसने अंततः हेलफायर मिसाइल दागकर जहाज के इंजन कक्ष को निशाना बनाया और उसे निष्क्रिय कर दिया।

सेंटकॉम ने एक्स पर कहा, “लियान स्टार के चालक दल ने निर्देशों का पालन नहीं किया, जिसके बाद एक अमेरिकी विमान ने जहाज के इंजन कक्ष में हेलफायर मिसाइल दागी और उसे निष्क्रिय कर दिया। यह जहाज अब ईरान की ओर नहीं बढ़ रहा है।”

अमेरिकी सेना के अनुसार, इस कार्रवाई ने जहाज की ईरान की ओर यात्रा रोक दी।

ईरान ने अमेरिका पर कूटनीति को कमजोर करने का आरोप लगाया

ईरान ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी।

ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार मोहसिन रज़ाई ने अमेरिका पर कूटनीतिक प्रयासों को कमजोर करने का आरोप लगाया।

शनिवार को रज़ाई ने कहा कि अमेरिका ने वास्तविक वार्ता का रास्ता छोड़ दिया है और तेहरान पर दबाव बढ़ाना जारी रखा है।

उन्होंने वाशिंगटन पर “कूटनीति से विश्वासघात” करने का आरोप लगाया और कहा कि ट्रंप “अत्यधिक मांगें” कर रहे हैं, जबकि अमेरिका ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी जैसी स्थिति बनाए हुए है।

तनाव अब भी बरकरार

ताजा बयानबाजी ईरान और अमेरिका के बीच गहरे अविश्वास को उजागर करती है।

हालांकि दोनों पक्ष किसी समझौते तक पहुंचने की इच्छा जता चुके हैं, लेकिन प्रतिबंधों में राहत, जमी हुई संपत्तियों की वापसी, परमाणु प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर उनके बीच बड़े मतभेद बने हुए हैं।

राजनयिक वार्ताओं के साथ-साथ सैन्य घटनाक्रम भी सामने आ रहे हैं, जिससे अमेरिका-ईरान संबंधों के भविष्य और खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।