एक बड़े सैन्य टकराव को टालने की अंतिम कोशिश के रूप में वैश्विक मध्यस्थ अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त करने के लिए दो-चरणीय योजना पर काम कर रहे हैं। एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार इस योजना पर कई देश मिलकर प्रयास कर रहे हैं।
पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये जैसे देश इसमें सक्रिय रूप से शामिल हैं। वे दोनों पक्षों के साथ समन्वय कर 45 दिनों का युद्धविराम सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं, जो आगे चलकर स्थायी शांति समझौते का रास्ता खोल सकता है।
हालांकि सूत्रों का कहना है कि अगले दो दिनों के भीतर किसी समझौते तक पहुंचने की संभावना कम है। फिर भी इसे व्यापक युद्ध को रोकने का सबसे वास्तविक विकल्प माना जा रहा है।
ट्रंप की समयसीमा से बढ़ा दबाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सामने मंगलवार रात 8 बजे (ईस्टर्न टाइम) तक की सख्त समयसीमा रखी है ताकि वह उनकी शर्तें स्वीकार करे।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान इनकार करता है तो अमेरिका बिजली संयंत्रों और पुलों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर बड़े हमले कर सकता है।
साथ ही यह भी माना जा रहा है कि ईरान क्षेत्र के प्रमुख ठिकानों—जैसे तेल और गैस प्रतिष्ठानों तथा जल विलवणीकरण संयंत्रों—को निशाना बनाकर कड़ा जवाब दे सकता है।
सीधे संपर्क, लेकिन गहरा अविश्वास
सूत्रों के अनुसार अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच सीधे संदेशों का आदान-प्रदान हुआ है।
इसके बावजूद दोनों पक्षों के बीच भरोसा बेहद कम है। अमेरिका चाहता है कि ईरान विश्वास बढ़ाने वाले कदम उठाए, जबकि ईरान को डर है कि वह गाज़ा पट्टी जैसी स्थिति में फंस सकता है, जहां युद्धविराम समझौते होते हैं लेकिन पूरी तरह लागू नहीं होते।
महत्वपूर्ण ढांचों को खतरा
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि जल विलवणीकरण संयंत्रों पर हमला हुआ तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। दुबई, अबू धाबी और दोहा जैसे बड़े शहर पीने के पानी के लिए इन संयंत्रों पर भारी रूप से निर्भर हैं।
रिपोर्टों के अनुसार कुवैत में लगभग 90%, ओमान में 86% और सऊदी अरब में करीब 70% पानी की आपूर्ति ऐसे ही संयंत्रों से होती है।
युद्धविराम प्रस्ताव का विवरण
प्रस्तावित योजना 45 दिनों के अस्थायी युद्धविराम पर आधारित है। इस दौरान दोनों पक्ष स्थायी समझौते की दिशा में काम करेंगे। यदि बातचीत में प्रगति होती है तो इस प्रारंभिक युद्धविराम को आगे बढ़ाया भी जा सकता है।
मुख्य मुद्दों में होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार का समाधान शामिल है। सूत्रों का कहना है कि ईरान का यूरेनियम या तो देश से बाहर ले जाया जा सकता है या उसकी समृद्धि का स्तर लगभग 60% से घटाकर सुरक्षित स्तर 3–5% तक लाया जा सकता है।
भरोसा बनाने की कोशिश
मध्यस्थ ईरान को ऐसे शुरुआती कदम उठाने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं जो विश्वास बढ़ा सकें। साथ ही वे अमेरिका से यह आश्वासन देने की भी मांग कर रहे हैं कि युद्धविराम अंततः युद्ध के स्थायी अंत की ओर ले जाएगा।
ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे लेबनान या गाज़ा जैसी स्थिति नहीं चाहते, जहां युद्धविराम लंबे समय तक चलता है लेकिन हमले जारी रहते हैं।
स्थिति अब भी नाजुक
स्थिति अभी भी बेहद अनिश्चित बनी हुई है। कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन दोनों पक्षों के कड़े बयानों और गहरे अविश्वास के कारण तनाव उच्च स्तर पर बना हुआ है। आने वाले कुछ दिन यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं कि संघर्ष और बढ़ेगा या फिर तनाव कम होने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
