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ट्रंप ने ईरान को धमकी दी: ‘48 घंटों में कहर टूट पड़ेगा’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है कि वह समझौता करे, अन्यथा उसे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक नई कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि अब ईरान के पास समझौता करने या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को फिर से खोलने के लिए सिर्फ 48 घंटे बचे हैं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

ट्रंप ने कहा कि उन्होंने 26 मार्च को जो 10 दिन की समयसीमा तय की थी, वह अब समाप्त होने वाली है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समय लगभग खत्म हो चुका है।

“याद रखें जब मैंने ईरान को दस दिन दिए थे कि समझौता करो या होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलो। समय खत्म हो रहा है — 48 घंटे बाद उन पर कहर टूट पड़ेगा। भगवान की महिमा हो!” उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा।

ईरान के अनुरोध पर समयसीमा बढ़ाई गई

ट्रंप ने बताया कि उन्होंने मूल समयसीमा को बढ़ाया था क्योंकि ईरान ने अधिक समय मांगा था। उनके अनुसार, तेहरान ने अपने ऊर्जा ठिकानों पर अमेरिकी हमलों को रोकने के लिए सात दिन का विराम चाहा था। इसके बजाय ट्रंप ने 10 दिन देने पर सहमति जताई, जिससे अंतिम तारीख 6 अप्रैल हो गई।

फॉक्स न्यूज़ को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि ईरानी अधिकारियों ने मध्यस्थों के जरिए उनसे संपर्क कर अतिरिक्त समय मांगा था।

उन्होंने कहा, “उन्होंने मुझसे बहुत विनम्रता से कहा, ‘क्या हमें थोड़ा और समय मिल सकता है?’… अगर वे वह नहीं करते जो उन्हें करना चाहिए, तो मैं उनके बिजली संयंत्रों को नष्ट कर दूंगा।”

उन्होंने आगे कहा, “उन्होंने सात दिन मांगे थे और मैंने कहा, ‘मैं तुम्हें 10 दिन दूंगा,’ क्योंकि उन्होंने मुझे जहाज़ दिए।”

ईरान ने अमेरिकी शर्तें ठुकराईं

ईरान ने संघर्ष समाप्त करने के लिए अमेरिका के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और इसे “एकतरफा और अनुचित” बताया है। इसके बावजूद मध्य पूर्व में तनाव के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत अभी भी जारी है।

यह संघर्ष तब से जारी है जब अमेरिका और इज़राइल ने 28 फरवरी को ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू किया था। तब से अमेरिका ने कई लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया है, जिनमें ईरान की मिसाइल प्रणालियों, नौसैनिक बल और परमाणु कार्यक्रम को कमजोर करना शामिल है।

संघर्ष के दौरान ट्रंप का रुख बदलता रहा

पूरे संघर्ष के दौरान ट्रंप का रुख कई बार बदलता रहा है। अलग-अलग समय पर उन्होंने तेल के महत्व को कम करके बताया और बाद में संकेत दिया कि अमेरिका इससे लाभ उठा सकता है।

उन्होंने एक समय जल्दी समाधान की बात कही, लेकिन बाद में ईरान के प्रमुख बुनियादी ढांचे पर लंबे समय तक चलने वाले हमलों की चेतावनी भी दी।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को लेकर भी उनके विचार बदलते रहे। कभी उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका पीछे हटता है तो अन्य देश इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को संभाल सकते हैं। वहीं दूसरी ओर उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका खुद इस स्थिति को संभाल सकता है।

क्षेत्र में बढ़ती अनिश्चितता

समयसीमा के करीब आने और दोनों पक्षों के कड़े बयानों के कारण अनिश्चितता लगातार बढ़ रही है। ईरान द्वारा अमेरिकी मांगों को ठुकराना और ट्रंप की बढ़ती चेतावनियां यह संकेत देती हैं कि यदि जल्द कोई समझौता नहीं हुआ तो स्थिति और बिगड़ सकती है।