अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के सबसे बड़े पुल को नष्ट करने के पीछे अमेरिका का हाथ था। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि आगे और हमले हो सकते हैं।
यह हमला तेहरान और करज के बीच स्थित एक बड़े सस्पेंशन ब्रिज पर किया गया। यह पुल लगभग 136 मीटर ऊंचा था और इसकी कीमत करीब 400 मिलियन डॉलर बताई जाती है। यह हमला उस धमकी के एक दिन बाद हुआ, जब ट्रंप ने कहा था कि वह ईरान को “स्टोन एज में वापस” पहुंचा सकते हैं।
भीषण विस्फोट के बाद हताहत
करज के स्थानीय अधिकारियों और ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इस हमले में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि लगभग 95 लोग घायल हुए हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक पुल के केंद्रीय हिस्से को दो बार निशाना बनाया गया। इसके बाद संरचना नीचे सड़क पर गिर गई और वहां से काला घना धुआं उठता दिखाई दिया। बाद में सामने आई तस्वीरों में पुल के बीच में बड़ा खाली हिस्सा दिखाई दिया। यह पुल ईरान की प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक था।
ट्रंप की और हमलों की चेतावनी
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इस हमले के बारे में बात की। उन्होंने लिखा, “ईरान का सबसे बड़ा पुल गिर गया है और अब कभी इस्तेमाल नहीं होगा,” और चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो “इसके बाद बहुत कुछ और होगा।”
यह स्पष्ट नहीं है कि हमले के समय पुल पर आम नागरिक मौजूद थे या नहीं। हालांकि कुछ तस्वीरों से संकेत मिला कि पुल के एक हिस्से पर एक ट्रक मौजूद था। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दिखाया गया कि एक प्रोजेक्टाइल उस हिस्से से टकराया, जो पहले से ही क्षतिग्रस्त था।
ईरान पर हमले तेज करने की धमकी
संघर्ष शुरू होने के बाद अपने पहले राष्ट्रीय संबोधन में ट्रंप ने 28 फरवरी को शुरू हुई अमेरिका और इज़राइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई को सफल बताया। उन्होंने कहा कि यह अभियान “समाप्ति के करीब” है और अमेरिका बहुत जल्द अपने सभी रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल कर लेगा।
साथ ही उन्होंने ईरान के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने की कड़ी चेतावनी दोहराई। उन्होंने कहा, “हम उनके हर बिजली उत्पादन संयंत्र पर बहुत जोरदार और संभवतः एक साथ हमला करेंगे।” ऐसा हमला लाखों लोगों की बिजली आपूर्ति को बाधित कर सकता है।
प्रमुख ढांचों पर हमले जारी
संघर्ष शुरू होने के बाद से अमेरिका और इज़राइल ने ईरान में कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा स्थलों को निशाना बनाया है। अमेरिका में यह चर्चा भी चल रही है कि ईरान में गहराई में जमीन के नीचे रखी रेडियोधर्मी सामग्री को कब्जे में लेने के लिए एक उच्च जोखिम वाला अभियान चलाया जा सकता है।
हालांकि ट्रंप ने इन सामग्रियों को लेकर चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि वे इतनी गहराई में दफन हैं कि “मुझे इसकी परवाह नहीं है।”
इस बीच ईरान ने बताया कि गुरुवार को तेहरान में स्थित पाश्चर इंस्टीट्यूट ऑफ ईरान को भी निशाना बनाया गया। यह हमला उस दावे के कुछ समय बाद हुआ, जब इज़राइल ने कहा था कि उसने ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े एक ठिकाने पर हमला किया है, जिसका उपयोग पश्चिम एशिया में सशस्त्र समूहों को वित्तीय मदद देने के लिए किया जाता था।
ईरान की कड़ी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
ईरान ने इन हमलों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में “और अधिक कड़े, व्यापक और विनाशकारी” हमले किए जाएंगे।
ईरान के सैन्य मुख्यालय के प्रवक्ता इब्राहिम ज़ोलफकारी ने कहा कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक ईरान के दुश्मनों को “स्थायी पछतावा और आत्मसमर्पण” नहीं करना पड़े।
