इज़राइल, संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान से जुड़े चल रहे संघर्ष ने फ़ारस की खाड़ी में स्थित क़ेश्म द्वीप पर वैश्विक ध्यान केंद्रित कर दिया है, जो एक बेहद रणनीतिक स्थान है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित यह द्वीप अब सैन्य कार्रवाई और भू-राजनीतिक तनाव दोनों का केंद्र बन गया है।
इस महीने की शुरुआत में, ईरान ने संयुक्त राज्य अमेरिका पर इस द्वीप पर नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने का आरोप लगाया। तेहरान ने कहा कि एक जल-लवणमुक्ति संयंत्र पर हमला हुआ, जिससे पानी की आपूर्ति बाधित हो गई।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 7 मार्च को एक्स (एक्स) पर पोस्ट करते हुए कहा, “अमेरिका ने क़ेश्म द्वीप पर एक मीठे पानी के लवणमुक्ति संयंत्र पर हमला कर एक स्पष्ट और हताश अपराध किया है। इससे 30 गांवों की जल आपूर्ति प्रभावित हुई है। ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला करना एक खतरनाक कदम है, जिसके गंभीर परिणाम होंगे। यह परंपरा अमेरिका ने शुरू की है, ईरान ने नहीं।”
क़ेश्म द्वीप: एक अनोखा भू-वैज्ञानिक चमत्कार
क़ेश्म द्वीप को व्यापक रूप से “खुले आसमान के नीचे भू-वैज्ञानिक संग्रहालय” के रूप में जाना जाता है। इसका क्षेत्रफल लगभग 1,445 वर्ग किलोमीटर है और यहां करीब 1,48,000 लोग रहते हैं। यह द्वीप नमक की गुफाओं, मैंग्रोव वनों और क्षरण से बने चट्टानी परिदृश्यों जैसी अद्भुत प्राकृतिक संरचनाओं के लिए प्रसिद्ध है। “वैली ऑफ स्टार्स” अपनी नाटकीय घाटियों और समय के साथ बनी अनोखी चट्टानी आकृतियों के कारण विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
नमकदान नमक गुफा क्षेत्र के सबसे शुद्ध नमक में से कुछ को समेटे हुए है। वहीं, हारा मैंग्रोव वन विविध वन्यजीवों और प्रवासी पक्षियों का आश्रय स्थल है। अपनी समृद्ध प्राकृतिक विरासत के कारण, यूनेस्को ने 2006 में क़ेश्म जियोपार्क को मान्यता दी थी।
होर्मुज जलडमरूमध्य के पास रणनीतिक स्थिति
क़ेश्म, बंदर अब्बास से केवल 22 किलोमीटर दूर स्थित है और इसका भौगोलिक महत्व बहुत अधिक है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य के बेहद करीब स्थित है। ऐतिहासिक रूप से, यह द्वीप आसपास के क्षेत्रों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना और जल स्रोत रहा है। वर्ष 1301 में, आक्रमणों से बचने के लिए होर्मुज के शासकों ने अपनी राजधानी यहां स्थानांतरित कर दी थी।
सदियों तक यह एक महत्वपूर्ण सैन्य और व्यापारिक केंद्र बना रहा। 1622 में फ़ारसी और अंग्रेज़ी सेनाओं ने पुर्तगाली नियंत्रण को समाप्त कर दिया। बाद में, 19वीं सदी तक ब्रिटिशों ने इसे एक नौसैनिक अड्डे के रूप में इस्तेमाल किया।
क़ेश्म द्वीप के भूमिगत मिसाइल शहर
आज क़ेश्म केवल एक व्यापारिक क्षेत्र नहीं, बल्कि एक बड़ा सैन्य गढ़ भी है। यहां ईरान के तथाकथित “भूमिगत मिसाइल शहर” मौजूद हैं। इन छिपे हुए ठिकानों में बैलिस्टिक मिसाइल और एंटी-शिप क्रूज़ मिसाइल जैसे उन्नत हथियार रखे जाते हैं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने यहां गुप्त नौसैनिक अड्डे भी बनाए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ये प्रणालियां ईरान को संघर्ष के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य को नियंत्रित करने या यहां तक कि अवरुद्ध करने की क्षमता देती हैं। यही कारण है कि क़ेश्म, ईरान की रक्षा रणनीति का एक अहम स्तंभ है।
वैश्विक तेल आपूर्ति मार्गों पर नियंत्रण
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति गुजरती है। क़ेश्म इस महत्वपूर्ण मार्ग का प्रहरी (गेटकीपर) माना जाता है। मौजूदा युद्ध के बीच, ईरान ने इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है। हालांकि उसने आधिकारिक रूप से इस मार्ग को बंद नहीं किया है, लेकिन अब अधिकांश जहाजों को सुरक्षित गुजरने के लिए ईरान की अनुमति की आवश्यकता होती है। इसके चलते वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर दबाव बढ़ गया है। कम जहाजों की आवाजाही से आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ रही है।
अमेरिका की प्रतिक्रिया और बढ़ता सैन्य तनाव
इसके जवाब में, संयुक्त राज्य अमेरिका इस जलमार्ग को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वॉशिंगटन तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए एक नौसैनिक काफिले की योजना बना रहा है। यह कदम इस संघर्ष में क़ेश्म द्वीप के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। जैसे-जैसे तनाव बढ़ रहा है, यह द्वीप वैश्विक व्यापार मार्गों पर नियंत्रण की लड़ाई में एक अग्रिम मोर्चा बनता जा रहा है।
