ईरान के भारत में राजदूत मोहम्मद फतहाली ने शनिवार को कहा कि ईरानी जनता अमेरिका और इज़राइल के साथ संघर्ष में पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि बढ़ते सैन्य टकराव के बावजूद ईरान लड़ाई जारी रखेगा।
एएनआई के अनुसार फतहाली ने कहा, “हम, ईरान के लोग, साफ़ तौर पर घोषणा करते हैं कि इस रास्ते पर हम या तो जीत हासिल करेंगे या शहादत पाएंगे। हमारे लिए दोनों ही सम्मान और खुशी की बात हैं।”
धार्मिक नेताओं ने ईरान का समर्थन किया
कई धार्मिक नेताओं ने भी ईरान के समर्थन में आवाज़ उठाई। शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जवाद नक़वी ने कहा कि वैश्विक दबाव के बावजूद ईरान कभी आत्मसमर्पण नहीं करेगा।
उन्होंने कहा, “कर्बला के मानने वाले कभी आत्मसमर्पण नहीं कर सकते, चाहे उन्हें मरना ही क्यों न पड़े… ईरान पूरी दुनिया के खिलाफ अकेला खड़ा है।”
उन्होंने यह भी कहा कि अगर कानून अनुमति देता है तो समर्थक लड़ने के लिए तैयार हैं।
ईरान ने कहा कि वह अपना बचाव कर रहा है
भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि ईरान के पास अपना बचाव करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
उन्होंने कहा, “कोई भी यह स्थिति नहीं चाहता… हम पर अमेरिका ने हमला किया। हमें अपना बचाव करना होगा। हम अपनी गरिमा, नैतिकता और स्वतंत्रता के लिए बलिदान देते हैं।”
उन्होंने ईरान और भारत के बीच लंबे संबंधों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि ईरान का भविष्य बेहतर होगा। ईरान और भारत के बीच संबंध और दोस्ती 3000 साल पहले शुरू हुई थी। मुझे भरोसा है कि हमारा रिश्ता आगे भी जारी रहेगा।”
खामेनेई की हत्या के बाद संघर्ष तेज
पिछले सप्ताह अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमले किए जाने के बाद संघर्ष और तेज हो गया। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई समेत कई लोगों की मौत हो गई।
इसके जवाब में ईरान ने पूरे क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इस लड़ाई में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है। इसके कारण खाड़ी क्षेत्र में उड़ानें भी प्रभावित हुई हैं।
ईरान ने तनाव कम करने की इच्छा जताई
संकट के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने पड़ोसी देशों से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि यदि पड़ोसी देश ईरान पर हमला नहीं करते हैं तो ईरान उन पर हमले रोक देगा।
पेज़ेश्कियन ने यह भी कहा कि कुछ देशों ने मध्यस्थता की कोशिशें शुरू कर दी हैं। हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान अपनी “गरिमा और अधिकार” की रक्षा करता रहेगा।
