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कोलंबिया में बेमौसम भारी बारिश से 13 लोगों की मौत
कोलंबिया में बेमौसम हुई भारी बारिश के कारण कम से कम 13 लोगों की जान चली गई है। उत्तरी अमेरिका से आए एक ठंडे मौसमीय मोर्चे के चलते बारिश में अचानक तेज़ बढ़ोतरी हुई, जिससे भूस्खलन की घटनाएं भी सामने आईं।

इस समय आमतौर पर न होने वाली असामान्य रूप से भारी बारिश के कारण कोलंबिया में व्यापक नुकसान हुआ है और इस सप्ताह कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई है। अधिकारियों ने बताया कि उत्तरी अमेरिका से एक ठंडा मौसमीय मोर्चा दक्षिण की ओर बढ़ते हुए कोलंबिया के कैरेबियाई तट तक पहुंचा, जिसके बाद देश में बारिश में तेज़ वृद्धि देखी गई।

असामान्य भारी बारिश के कारण कोलंबिया भर में हज़ारों परिवार विस्थापित हो गए हैं। व्यापक बाढ़ की स्थिति बनी हुई है, जिसका सबसे ज़्यादा असर देश के कैरेबियाई क्षेत्र में पड़ा है।

राष्ट्रीय मौसम एजेंसी Ideam के अनुसार, पिछले एक महीने में हुई बारिश ऐतिहासिक औसत से 64 प्रतिशत अधिक रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अचानक बढ़ोतरी क्षेत्र से गुज़रे ठंडे मौसमीय मोर्चे के कारण हुई, जिससे लगातार और तेज़ बारिश हुई।

नारिन्यो में भूस्खलन से कई लोगों की मौत

13 मृतकों में से सात लोगों की जान शुक्रवार रात दक्षिण-पश्चिमी कोलंबिया के नारिन्यो विभाग में गई। भारी बारिश के कारण पास की एक धारा उफान पर आ गई, जिससे भूस्खलन हुआ। कीचड़ और मलबे ने कई घरों को अपनी चपेट में ले लिया और वे मोटी मिट्टी की परतों के नीचे दब गए।

स्थानीय अधिकारियों द्वारा साझा किए गए दृश्यों में मलबा हटाने के लिए अर्थ-मूविंग मशीनें काम करती दिखाई दीं। बचाव दल और स्निफर डॉग्स मलबे में दबे लोगों की तलाश करते नज़र आए।

पहले भी मौसम से जुड़ी घटनाओं में गई थीं जानें

नारिन्यो की इस त्रासदी से पहले ही, कोलंबिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी UNGRD ने गुरुवार को पुष्टि की थी कि देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम से जुड़ी घटनाओं में छह लोगों की मौत हो चुकी है।

जलवायु परिवर्तन से मौसम बन रहा है अप्रत्याशित

अधिकारियों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन कोलंबिया के पारंपरिक मौसम पैटर्न को प्रभावित कर रहा है। आमतौर पर उष्णकटिबंधीय जलवायु वाले इस देश में स्पष्ट मौसम नहीं होते, लेकिन अब हालात अधिक अनिश्चित होते जा रहे हैं। इससे असामान्य बारिश और उससे जुड़ी आपदाओं की तीव्रता और प्रभाव बढ़ रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि ज़मीन के अत्यधिक गीले होने और लगातार बारिश के चलते और भूस्खलन व बाढ़ का खतरा बना हुआ है, इसलिए प्रभावित क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।