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अजीत डोभाल की कनाडा यात्रा से भारत–कनाडा सुरक्षा संबंधों में सुधार के संकेत
अजीत डोभाल की कनाडा यात्रा दोनों देशों के रिश्तों में नए सिरे से शुरुआत का संकेत देती है, क्योंकि भारत और कनाडा ने खुफिया जानकारी साझा करने को बढ़ाने तथा उग्रवाद, मादक पदार्थों और साइबर खतरों के खिलाफ कार्रवाई मजबूत करने पर सहमति जताई है।

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने दो दिवसीय यात्रा पर कनाडा का दौरा किया और कनाडा के प्रधानमंत्री के डिप्टी क्लर्क तथा राष्ट्रीय सुरक्षा एवं खुफिया सलाहकार नथाली द्रुइन के साथ अहम बातचीत की। यह बैठक दोनों देशों के बीच नियमित सुरक्षा संवाद के तहत हुई और संबंधों को मजबूत करने की नई कोशिश का संकेत देती है।

शीर्ष सरकारी सूत्रों ने CNN-News18 को बताया कि इन चर्चाओं से भारत–कनाडा संबंधों में रीसेट के संकेत मिले हैं। सूत्रों के अनुसार, इन वार्ताओं ने यह कड़ा संदेश भी दिया कि खालिस्तान से जुड़े नेटवर्क सहित हिंसक उग्रवादी समूहों को कनाडा सरकार का समर्थन प्राप्त नहीं है।

खुफिया साझा करने और सुरक्षा सहयोग पर फोकस

सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्षों ने मादक पदार्थों की तस्करी, साइबर खतरों और उग्रवाद जैसे मुद्दों पर रियल-टाइम खुफिया जानकारी साझा करने की शुरुआत पर ध्यान केंद्रित किया। खालिस्तान से जुड़े समूह बातचीत के केंद्र में रहे। उनके अनुसार, कनाडा राजनीतिक रुख से हटकर भारत-विरोधी गतिविधियों के खिलाफ कड़े कानून प्रवर्तन की दिशा में बढ़ता दिख रहा है।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि दोनों देशों ने अपने नागरिकों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों की प्रगति की समीक्षा की। राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून प्रवर्तन मामलों में सहयोग के लिए एक संयुक्त कार्ययोजना पर सहमति बनी, ताकि साझा प्राथमिकताओं पर व्यावहारिक सहयोग सुनिश्चित किया जा सके।

लायजन अधिकारियों की नियुक्ति की योजना

बैठक के दौरान भारत और कनाडा ने सुरक्षा और कानून प्रवर्तन लायजन अधिकारियों की नियुक्ति पर सहमति जताई। दोनों देशों की एजेंसियां आपसी समन्वय बढ़ाएंगी, जिससे संवाद बेहतर होगा और साझा मुद्दों पर त्वरित सूचना आदान-प्रदान संभव हो सकेगा।

यह सहयोग नशीले पदार्थों, खासकर फेंटानिल के प्रीकर्सर की अवैध तस्करी और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध नेटवर्क की गतिविधियों से निपटने में मदद करेगा। दोनों पक्षों ने साइबर सुरक्षा नीति में सहयोग और साइबर खतरों पर सूचना साझा करने को भी मजबूत करने का फैसला किया। धोखाधड़ी से निपटने और आव्रजन प्रवर्तन को सुदृढ़ करने पर भी चर्चा जारी रखने पर सहमति बनी।

भरोसा बहाल करने पर जोर

सरकारी सूत्रों ने CNN-News18 को बताया कि ओटावा में हुई बातचीत दिखावे के लिए नहीं, बल्कि भरोसा बहाल करने पर केंद्रित थी। कानून प्रवर्तन लायजन अधिकारियों की तैनाती का फैसला इस साझा समझ को दर्शाता है कि खालिस्तानी नेटवर्क को अब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं, बल्कि संगठित अपराध के रूप में देखा जा रहा है।

डोभाल ने उग्रवादी फंडिंग, धमकी और प्रचार से जुड़ी चिंताओं को भी उठाया। उन्होंने इन गतिविधियों को ड्रग मनी, दस्तावेज़ी धोखाधड़ी और प्रवासी समुदाय के कुछ वर्गों के भीतर दबाव से जोड़ा, जो भारत को निशाना बनाते हैं। सूत्रों के अनुसार, नशीले पदार्थों पर फोकस रणनीतिक है, क्योंकि खुफिया जानकारी बताती है कि सिंथेटिक ड्रग्स से होने वाला मुनाफा अंतरराष्ट्रीय समूहों को समर्थन देता है।

साइबर खतरे और आव्रजन चैनलों का दुरुपयोग

साइबर सुरक्षा भी चर्चा का एक प्रमुख विषय रही। दोनों देशों ने समन्वित साइबर नीतियों और डेटा साझा करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उग्रवादी समूह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल भर्ती, कट्टरपंथीकरण और फंडिंग के लिए करते हैं। वे भारत को निशाना बनाने के बाद अपने ऑपरेटिव्स को स्थानांतरित करने या जांच से बचने के लिए आव्रजन खामियों का भी फायदा उठाते हैं।

कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री से मुलाकात

डोभाल ने कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री गैरी अनंदासंगरी से भी मुलाकात की। सूत्रों ने बताया कि यह बैठक भारत के साथ संबंध सुधारने के लिए ओटावा की इच्छा को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि कनाडा सरकार अब विदेश से भारत को निशाना बनाने वाले हिंसक उग्रवाद को केवल कूटनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा का मामला मानने को तैयार ह

संभावित प्रधानमंत्री यात्रा से पहले दौरा

यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के मार्च के पहले सप्ताह में भारत आने की संभावना है। कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने कहा कि कार्नी नई दिल्ली आकर यूरेनियम, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े समझौतों पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग और मजबूत होगा।