स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के बाद NCLT ने सुभाष चंद्रा के दिवालियापन समझौते से जुड़े आदेश पर रोक लगा दी है। इससे 22,006 करोड़ रुपये से अधिक के पुनर्भुगतान विवाद पर कानूनी स्थिति फिलहाल अनिश्चित बनी हुई है।
NCLT ने 22,006.57 करोड़ रुपये के दावों के मुकाबले सुभाष चंद्रा की 6.5 करोड़ रुपये की पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दे दी, जिससे लेनदारों को 99.97% की भारी कटौती (haircut) स्वीकार करनी होगी।