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सीतारमण ने कहा कि LTCG टैक्स में कटौती की विदेशी निवेशकों की मांग पर सरकार विचार करेगी
निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार भारत की LTCG टैक्स व्यवस्था को लेकर विदेशी निवेशकों की चिंताओं पर विचार करेगी। रिकॉर्ड स्तर पर विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) की निकासी और टैक्स में राहत की बढ़ती मांग के बीच सरकार इस मुद्दे की समीक्षा करेगी।
सोमवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की ओर से भारत की कैपिटल गेन टैक्स व्यवस्था को लेकर उठाई गई चिंताओं की समीक्षा करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि निवेशकों की मांगों पर विचार करने के बाद सरकार कर व्यवस्था में बदलाव कर सकती है। इनमें विशेष रूप से दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (LTCG Tax) को कम करने की मांग शामिल है।फाइनेंशियल एक्सप्रेस लीडरशिप अवॉर्ड्स में बोलते हुए सीतारमण ने मौजूदा कर ढांचे और हाल के दिनों में भारतीय बाजारों से विदेशी निवेश की निकासी को लेकर जताई गई चिंताओं को स्वीकार किया। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी फैसला लेने से पहले सरकार को कई पहलुओं का सावधानीपूर्वक आकलन करना होगा। उन्होंने कहा, "ये बेहद संवेदनशील मामले हैं और इनमें व्यावसायिक तथा कारोबारी समझ के कई पहलुओं को ध्यान में रखना होगा।"

सीतारमण ने निवेश की बदलती परिस्थितियों को स्वीकार किया

वित्त मंत्री ने बताया कि 2023 में जब भारत में विदेशी निवेश रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था, तब भी देश की कैपिटल गेन टैक्स व्यवस्था मौजूदा जैसी ही थी। उन्होंने कहा, "2023 में भी कर व्यवस्था वही थी, जो आज है, जबकि उस समय विदेशी निवेश का प्रवाह रिकॉर्ड ऊंचाई पर था।" हालांकि, उन्होंने माना कि उसके बाद से निवेश का माहौल बदल गया है। विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय शेयर बाजार से लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं। वहीं, देश की कर नीतियों को लेकर चिंताएं भी अधिक प्रमुखता से सामने आने लगी हैं। सीतारमण ने कहा, "आज परिस्थितियां बदल गई हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने अपना पैसा निकाला है और चिंताएं पहले से ज्यादा मुखर हुई हैं। मैं इन सभी बातों पर विचार करूंगी।" उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा कर व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है या नहीं, इस पर फैसला लेने से पहले सरकार निवेशकों की बात सुनेगी और उनकी चिंताओं की समीक्षा करेगी।

वित्त मंत्री ने अधिक इक्विटी निवेश की जरूरत पर दिया जोर

सीतारमण ने भारत की आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने में इक्विटी निवेश के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश को 7 प्रतिशत या उससे अधिक की आर्थिक विकास दर बनाए रखने के लिए बड़ी मात्रा में पूंजी की जरूरत होगी। उन्होंने कहा, "ऐसे समय में जब आर्थिक विकास बेहद महत्वपूर्ण है और 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर बनाए रखनी है, हमें पूंजी की जरूरत है, विशेष रूप से इक्विटी पूंजी की।" वित्त मंत्री ने इक्विटी बाजार को भी ऋण बाजार (Debt Market) की तरह अधिक सरकारी समर्थन देने की मांग को स्वीकार किया। उन्होंने कहा, "हमारे सामने यह मांग भी आई है कि इक्विटी बाजार को भी उसी तरह का समर्थन मिलना चाहिए, जैसा ऋण बाजार को दिया जाता है। मैं इस मांग को समझती हूं।" उनकी ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब भारतीय शेयर बाजार में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए LTCG टैक्स व्यवस्था में बदलाव की मांग तेज हो रही है।

SEBI ने विदेशी निवेशकों के लिए LTCG टैक्स खत्म करने की सिफारिश की

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कथित तौर पर सरकार को विदेशी निवेशकों के लिए दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (LTCG Tax) समाप्त करने की सिफारिश की है। इस मामले से परिचित दो लोगों के हवाले से रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, बाजार नियामक ने इक्विटी निवेश से विदेशी निवेशकों को होने वाले लाभ पर LTCG टैक्स खत्म करने का सुझाव दिया है। SEBI ने घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों को भी कर राहत देने का प्रस्ताव रखा है। इस सिफारिश के तहत निवेशकों को अपने मौजूदा म्यूचुअल फंड निवेश को बेचकर प्राप्त रकम को नए निवेश में लगाने पर LTCG टैक्स से छूट मिल सकती है। इन प्रस्तावों का उद्देश्य इक्विटी बाजार में निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना और भारतीय वित्तीय बाजारों को निवेश के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से निकाले 3.08 लाख करोड़ रुपये

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने 2026 में भारतीय शेयर बाजार में अपना निवेश काफी कम किया है। जनवरी से सितंबर 2026 के बीच FPIs ने भारतीय शेयर बाजार से रिकॉर्ड 3.08 लाख करोड़ रुपये निकाले। यह राशि 32.73 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर है। यह निकासी पूरे कैलेंडर वर्ष 2025 के दौरान विदेशी निवेशकों की ओर से निकाले गए 1.66 लाख करोड़ रुपये से लगभग दोगुनी थी। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने निवेश के आकर्षक गंतव्य के रूप में भारत की स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसके साथ ही देश की कैपिटल गेन टैक्स नीतियां एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि कर व्यवस्था में बदलाव से निवेशकों का भरोसा बेहतर हो सकता है और विदेशी पूंजी को दोबारा भारतीय शेयर बाजार की ओर आकर्षित करने में मदद मिल सकती है।

भारत में मौजूदा LTCG टैक्स व्यवस्था क्या है?

मौजूदा कर नियमों के तहत सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों और इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड की यूनिट बेचने से होने वाले दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर 12.5 प्रतिशत टैक्स लगता है। यह टैक्स एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये से अधिक के लाभ पर लागू होता है। इसके अलावा लागू सरचार्ज और सेस अलग से वसूले जाते हैं। दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (LTCG) का लाभ लेने के लिए निवेशकों को आमतौर पर सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों और इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड यूनिट्स को 12 महीने से अधिक समय तक अपने पास रखना होता है। हालांकि, यदि निवेशक इन संपत्तियों को खरीदने के 12 महीने के भीतर बेच देते हैं, तो उनसे होने वाले मुनाफे को अल्पकालिक पूंजीगत लाभ (STCG) माना जाता है। फिलहाल, इस तरह के निवेश से होने वाले अल्पकालिक पूंजीगत लाभ पर 20 प्रतिशत टैक्स लगता है। इसके अलावा लागू सरचार्ज और सेस भी अलग से देना होता है।