JUSZnews

NEWS WITHOUT INTERRUPTION

Subscribe
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव: आर्थिक चिंताओं के बावजूद ट्रंप को रिपब्लिकन पार्टी की जीत का भरोसा
बढ़ती महंगाई, आर्थिक चिंताओं और गिरती अप्रूवल रेटिंग के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करने का अनुमान जताया है। इन चुनावों के नतीजे राष्ट्रपति के रूप में उनके कार्यकाल के आखिरी दो वर्षों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
मंगलवार को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजों का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के आखिरी दो वर्षों पर बड़ा असर पड़ सकता है। चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि कांग्रेस (अमेरिकी संसद) ट्रंप प्रशासन पर कितना नियंत्रण रख पाएगी, उनके प्रशासन के खिलाफ जांच और महाभियोग की कोशिशों की कितनी संभावनाएं होंगी और न्यायपालिका तथा कार्यकारी शाखा में उनके द्वारा नामित उम्मीदवारों की नियुक्ति को मंजूरी दिलाना कितना आसान होगा।ट्रंप ने चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करने का भरोसा जताया है। मंगलवार को बोलते हुए उन्होंने पार्टी की चुनावी संभावनाओं को लेकर जताई जा रही चिंताओं को खारिज किया और दावा किया कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि महंगाई अब कोई समस्या नहीं रह गई है। ट्रंप ने कहा कि मंगलवार के चुनाव नतीजे रिपब्लिकन पार्टी के लिए "आपकी उम्मीद से बेहतर" होंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि "महंगाई की समस्या खत्म हो गई है" और "सब कुछ अच्छा चल रहा है।" हालांकि, उनका यह आशावादी आकलन उन आर्थिक चिंताओं से अलग है, जिनका सामना कई अमेरिकी मतदाता अब भी कर रहे हैं। ट्रंप के रोजमर्रा के खर्चों को किफायती बनाने के बार-बार किए गए वादों के बावजूद किराने के सामान, ईंधन और स्वास्थ्य सेवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। फिलहाल वार्षिक महंगाई दर 3.7 प्रतिशत है। यह उस 3 प्रतिशत की दर से अधिक है, जो ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के समय दर्ज की गई थी। मंगलवार सुबह फॉक्स एंड फ्रेंड्स के साथ एक इंटरव्यू में ट्रंप ने बढ़ती कीमतों को लेकर मतदाताओं की चिंताओं का सीधे जवाब नहीं दिया। इसके बजाय उन्होंने अपने प्रशासन द्वारा अवैध प्रवासियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई को प्रमुखता से बताया और दावा किया कि अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) क्षेत्र का विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि चुनाव के नतीजे आपकी उम्मीद से बेहतर होंगे।"

मध्यावधि चुनावों को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दे

कई बड़े राजनीतिक और आर्थिक मुद्दे मध्यावधि चुनावों के नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। इन चुनावों से कांग्रेस में सत्ता का संतुलन और ट्रंप के शेष राष्ट्रपति कार्यकाल की दिशा भी तय होगी।

कांग्रेस पर नियंत्रण दांव पर

रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) और सीनेट, दोनों में अपना बहुमत बरकरार रखने के लिए चुनाव लड़ रही है। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी को कई ऐसे राज्यों में सीटें जीतने का अवसर दिखाई दे रहा है, जहां 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप ने जीत हासिल की थी। कांग्रेस के किसी भी एक सदन में सत्ता परिवर्तन से वॉशिंगटन का राजनीतिक माहौल काफी बदल सकता है।

बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा का खर्च बना चुनावी मुद्दा

आर्थिक चिंताएं रिपब्लिकन पार्टी के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी हैं। कई मतदाता किराने के सामान, ईंधन और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती कीमतों से अब भी परेशान हैं। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में नौकरियों का नुकसान भी इन चिंताओं को बढ़ा रहा है। इन मुद्दों ने ट्रंप के आर्थिक प्रगति के दावों और आम अमेरिकियों की वास्तविक आर्थिक परेशानियों के बीच अंतर पैदा कर दिया है।

ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग पर दबाव

चुनाव से पहले ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग (लोकप्रियता और कामकाज को लेकर लोगों की स्वीकृति) भी रिपब्लिकन पार्टी के लिए चिंता का विषय बन गई है। एसोसिएटेड प्रेस-NORC सेंटर फॉर पब्लिक अफेयर्स रिसर्च द्वारा अक्टूबर में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, केवल 35 प्रतिशत अमेरिकी वयस्कों ने राष्ट्रपति के रूप में ट्रंप के कामकाज को मंजूरी दी। यह आंकड़ा उनके दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के तुरंत बाद मिली 42 प्रतिशत अप्रूवल रेटिंग से कम है।

सीनेट की अहम सीटें तय कर सकती हैं बहुमत

सीनेट के कई करीबी मुकाबलों से यह तय हो सकता है कि उच्च सदन में किस पार्टी का नियंत्रण रहेगा। टेक्सास, कंसास, मिशिगन और मेन ऐसे प्रमुख राज्य हैं, जिन पर सभी की नजरें रहेंगी। आयोवा में भी डेमोक्रेट्स को आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है, क्योंकि वहां रिपब्लिकन पार्टी के मौजूदा सांसदों ने दोबारा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है। इन राज्यों के नतीजे सीनेट में बहुमत तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

आव्रजन नीति रिपब्लिकन पार्टी के लिए बनी चुनौती

आव्रजन का मुद्दा भी रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील बन गया है। पार्टी के कुछ नेताओं को आशंका है कि ट्रंप की आव्रजन नीतियों के कारण अधिक प्रवासी आबादी वाले क्षेत्रों में पार्टी का समर्थन कम हो सकता है। हाल के सर्वेक्षणों से संकेत मिलता है कि ट्रंप की आव्रजन नीतियों का विरोध करने वाले मतदाताओं की संख्या उनका समर्थन करने वालों से अधिक है। यह बढ़ता विरोध करीबी मुकाबले वाले चुनावी क्षेत्रों में रिपब्लिकन उम्मीदवारों को प्रभावित कर सकता है।

लातीनी मतदाताओं की भूमिका हो सकती है अहम

इस साल के मध्यावधि चुनावों में लातीनी मतदाता भी एक महत्वपूर्ण समूह हैं। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में बड़ी संख्या में लातीनी मतदाताओं ने ट्रंप का समर्थन किया था, जिससे उन्हें दोबारा व्हाइट हाउस पहुंचने में मदद मिली। प्रतिनिधि सभा और सीनेट के करीबी मुकाबलों में इन मतदाताओं की पसंद निर्णायक साबित हो सकती है। इस समुदाय के बीच रिपब्लिकन पार्टी के समर्थन में किसी भी तरह की गिरावट कांग्रेस पर नियंत्रण बनाए रखने की उसकी संभावनाओं को प्रभावित कर सकती है।

चुनावी निगरानी और कानूनी विवाद

मतदान से पहले चुनावी सुरक्षा और निगरानी का मुद्दा भी चर्चा में है। न्याय विभाग ने मतदान प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए सभी 50 राज्यों में करीब 1,000 संघीय चुनाव पर्यवेक्षकों को तैनात किया है। इस बीच, एक संघीय न्यायाधीश ने ट्रंप प्रशासन को चुनाव अधिकारियों के साथ ऐसे लोगों की सूची साझा करने से रोक दिया है, जिन पर गैर-नागरिक होने के बावजूद मतदाता के रूप में पंजीकृत होने का आरोप है। इस कानूनी विवाद ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विवादों को और बढ़ा दिया है।

चुनावी क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण से बदला राजनीतिक समीकरण

कांग्रेस के चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं में बदलाव ने भी प्रतिनिधि सभा की सीटों के लिए मुकाबले को प्रभावित किया है। चुनावी क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण (Redistricting) के कारण करीब एक-तिहाई कांग्रेसनल जिलों की सीमाएं बदल गई हैं। इन बदलावों से कई चुनावी मुकाबलों में किसी एक पार्टी को फायदा मिल सकता है। इस तरह बदला हुआ चुनावी नक्शा प्रतिनिधि सभा में सत्ता का संतुलन तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मध्यावधि चुनाव के नतीजे तय करेंगे ट्रंप के कार्यकाल के आखिरी दो साल

चुनाव के नतीजों का ट्रंप की राजनीतिक योजनाओं को लागू करने की क्षमता पर सीधा असर पड़ सकता है। अगर डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा या सीनेट में से किसी एक सदन पर नियंत्रण हासिल कर लेती है, तो वह ट्रंप प्रशासन के खिलाफ जांच और संसदीय निगरानी बढ़ा सकती है। डेमोक्रेट्स को बहुमत मिलने से महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने के नए अवसर भी मिल सकते हैं। सीनेट पर नियंत्रण खोना ट्रंप के लिए अतिरिक्त चुनौतियां पैदा करेगा। ऐसी स्थिति में रिपब्लिकन पार्टी को ट्रंप द्वारा नामित न्यायिक और कार्यकारी शाखा के अधिकारियों की नियुक्तियों को मंजूरी दिलाने में अधिक मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। दूसरी ओर, यदि रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदनों में अपना नियंत्रण बरकरार रखती है, तो वह ट्रंप की नीतियों और नियुक्तियों को विधायी स्तर पर अधिक मजबूती से समर्थन दे सकेगी। इसलिए मध्यावधि चुनावों के नतीजे न केवल कांग्रेस में सत्ता का भविष्य तय करेंगे, बल्कि यह भी निर्धारित करेंगे कि राष्ट्रपति के रूप में अपने शेष कार्यकाल के दौरान ट्रंप को कितनी राजनीतिक स्वतंत्रता मिलेगी।