प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 27वें कारगिल विजय दिवस के अवसर पर भारतीय सशस्त्र बलों के जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारत की संप्रभुता की रक्षा करने वाले सैनिकों के साहस, बलिदान और समर्पण को याद किया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कठिन परिस्थितियों में भारतीय सेना के अद्भुत साहस की सराहना की।
पीएम मोदी ने लिखा, “कारगिल विजय दिवस पर हमारा राष्ट्र उन वीर जवानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है, जिन्होंने भारत की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए असाधारण साहस और प्रतिबद्धता दिखाई। सबसे कठिन परिस्थितियों में उनका शौर्य हमेशा राष्ट्रीय गौरव का स्रोत बना रहेगा। उनका अटूट देशभक्ति भाव और कर्तव्य के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।”
क्या है कारगिल विजय दिवस और क्यों मनाया जाता है?
भारत 27वां कारगिल विजय दिवस मना रहा है, जो 1999 के कारगिल युद्ध में देश की जीत का प्रतीक है। यह दिन ऑपरेशन विजय की सफलता की याद में मनाया जाता है, जिसके तहत भारतीय सशस्त्र बलों ने कारगिल क्षेत्र में पाकिस्तानी घुसपैठियों से रणनीतिक चोटियों को दोबारा अपने नियंत्रण में लिया था। देश उन 527 वीर जवानों को भी याद करता है, जिन्होंने भारत की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।
कारगिल युद्ध 1999: भारत की ऐतिहासिक जीत
कारगिल युद्ध मई से जुलाई 1999 के बीच लड़ा गया था। यह दो परमाणु हथियार संपन्न देशों के बीच लड़ा गया एकमात्र पारंपरिक युद्ध माना जाता है। यह युद्ध लद्दाख के कारगिल, द्रास, बटालिक, मुश्कोह और ककसर के कठिन पहाड़ी क्षेत्रों में लड़ा गया था।
कई सैन्य अभियानों को 5,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अंजाम दिया गया, जिससे यह अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बन गया था।
कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और खराब मौसम के बावजूद भारतीय सैनिकों ने नियंत्रण रेखा (LoC) पार किए बिना सभी कब्जाई गई चोटियों को वापस हासिल कर लिया। इस जीत ने भारत की सैन्य तैयारियों, रणनीतिक योजना और राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया। आज कारगिल विजय दिवस साहस, बलिदान और देशभक्ति का प्रतीक है।
अमित शाह ने कारगिल विजय दिवस को बताया साहस का प्रतीक
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कारगिल विजय दिवस को भारतीय सेना के अदम्य साहस और असाधारण वीरता का प्रतीक बताया। उन्होंने लिखा, “‘कारगिल विजय दिवस’ भारतीय सेना के अटूट साहस और असाधारण शौर्य का प्रतीक है। 1999 में हिमालय की बर्फ से ढकी दुर्गम चोटियों पर ऊंचाई वाले दुश्मन ठिकानों और प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करते हुए हमारे वीर जवानों ने ‘ऑपरेशन विजय’ के जरिए दुश्मन को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। ‘कारगिल विजय दिवस’ पर मैं उन सभी वीर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने राष्ट्र की अखंडता बनाए रखने के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।”
राजनाथ सिंह ने कहा- भारतीय सेना हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक पर कारगिल विजय दिवस समारोह में हिस्सा लिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत के सामने सुरक्षा चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। उन्होंने कहा कि घुसपैठिए अभी भी छद्म युद्ध और सीमा पार घुसपैठ जैसे तरीकों का सहारा लेते हैं। सिंह ने कहा, “हमें याद रखना होगा कि आज भी चुनौतियां कम नहीं हुई हैं। घुसपैठियों की मंशा नहीं बदली है और आज भी वे छद्म युद्ध या घुसपैठ जैसे तरीकों को अपनाते हैं।” उन्होंने कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि हमारी सेना ऐसी किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।”
सरकार सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण पर दे रही जोर
राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार आधुनिक तकनीक, उन्नत उपकरणों और विश्वस्तरीय प्रशिक्षण के माध्यम से सशस्त्र बलों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत अभियान की सराहना की और विश्वास जताया कि भारतीय सशस्त्र बल दुनिया की सबसे बेहतरीन सेनाओं में शामिल बने रहेंगे।
राहुल गांधी ने शहीद जवानों को किया याद
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी कारगिल युद्ध में देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि देश हमेशा उनके साहस, वीरता और सर्वोच्च बलिदान का ऋणी रहेगा।
कारगिल विजय दिवस 2026: भारत के वीरों को श्रद्धांजलि
भारत जब 27वां कारगिल विजय दिवस मना रहा है, तब देश ऑपरेशन विजय में लड़ने वाले वीर जवानों के साहस को याद कर रहा है और उन 527 शहीदों को सम्मान दे रहा है, जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनका साहस, देशभक्ति और समर्पण आने वाली पीढ़ियों के भारतीयों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।
