भारत सरकार नई स्वीकृत Semicon 2.0 योजना के तहत सेमीकंडक्टर स्टार्टअप्स में सीधे निवेश करेगी। यह कदम एक बड़े नीतिगत बदलाव को दर्शाता है, क्योंकि केंद्र सरकार देश के घरेलू चिप उद्योग को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
अब तक सरकार केवल वित्तीय प्रोत्साहन देती थी, लेकिन नई व्यवस्था के तहत वह निजी निवेशकों के साथ मिलकर स्टार्टअप्स में इक्विटी (हिस्सेदारी) खरीदेगी। हालांकि, कंपनियों के आर्थिक रूप से मजबूत होने के बाद सरकार अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाहर निकलने की योजना बना रही है, जिससे संस्थापक लंबे समय तक कंपनी का स्वामित्व और नियंत्रण बनाए रख सकें।
यह घोषणा केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा Semicon 2.0 को मंजूरी देने के एक दिन बाद आई। इस योजना के लिए कुल 1.27 लाख करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।
सरकार निजी निवेश के बराबर करेगी निवेश
नई फंडिंग व्यवस्था का उद्देश्य भारतीय सेमीकंडक्टर स्टार्टअप्स के सामने मौजूद सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक—विकास के लिए पूंजी जुटाना—को हल करना है।इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के सीईओ अमितेश कुमार सिन्हा ने बताया कि सरकार हर निवेश चरण में वेंचर कैपिटल (VC) कंपनियों द्वारा किए गए निवेश के बराबर राशि लगाएगी।
यह सहायता शुरुआती सीड फंडिंग से लेकर सीरीज A, सीरीज B और सीरीज C निवेश दौर तक उपलब्ध होगी। सिन्हा ने कहा, "सरकार निवेशकों द्वारा लाई गई राशि के बराबर निवेश करेगी।" उन्होंने बताया कि सरकार निजी निवेशकों के समान व्यावसायिक शर्तों पर निवेश करेगी और उसे उसी श्रेणी की इक्विटी मिलेगी।
कंपनी के संचालन में हस्तक्षेप नहीं करेगी सरकार
शेयरधारक बनने के बावजूद सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह स्टार्टअप्स के दैनिक कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करेगी। सिन्हा ने कहा कि केंद्र सरकार केवल एक वित्तीय निवेशक की भूमिका निभाएगी और कंपनी के संचालन पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश नहीं करेगी। जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार कंपनी के बोर्ड में प्रतिनिधित्व मांगेगी, तो उन्होंने कहा, "हम उनके रोजमर्रा के काम में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते।"
उन्होंने यह भी बताया कि इस योजना के लिए विस्तृत संचालन दिशानिर्देश अलग से जारी किए जाएंगे।
संस्थापक बनाए रखेंगे कंपनियों पर नियंत्रण
नई इक्विटी व्यवस्था का उद्देश्य स्टार्टअप्स को अधिक पूंजी जुटाने में मदद करना है, बिना उनके कारोबार पर नियंत्रण खोए। सिन्हा के अनुसार, अधिकांश कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से कम रहेगी। इससे संस्थापक महत्वपूर्ण व्यावसायिक फैसले लेते रह सकेंगे और साथ ही उन्हें सरकारी सहायता से मिलने वाली पूंजी का लाभ भी मिलेगा।
स्टार्टअप सरकार की हिस्सेदारी वापस खरीद सकेंगे
सरकार की योजना है कि जब स्टार्टअप्स आय अर्जित करना शुरू कर देंगे और आर्थिक रूप से मजबूत हो जाएंगे, तब वह अपनी हिस्सेदारी से बाहर निकल जाएगी। सिन्हा ने कहा कि कंपनियों को सरकार की इक्विटी वापस खरीदने का विकल्प दिया जाएगा। उन्होंने कहा, "जैसे ही कंपनी राजस्व कमाना शुरू करेगी, वह सरकार की हिस्सेदारी खरीदने में सक्षम और इच्छुक होगी।"
यह निकासी रणनीति उद्यमियों को दोबारा पूर्ण स्वामित्व हासिल करने में मदद करेगी और सरकार को अपनी पूंजी नए स्टार्टअप्स में लगाने का अवसर देगी।
भविष्य में अधिग्रहण पर कोई रोक नहीं
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्टार्टअप्स विलय (मर्जर) या अधिग्रहण (एक्विजिशन) करने के लिए स्वतंत्र रहेंगे। यदि कोई कंपनी सरकार की हिस्सेदारी वापस खरीदने से पहले किसी अन्य कंपनी द्वारा अधिग्रहित कर ली जाती है, तो केंद्र सरकार कंपनी के बाजार मूल्यांकन के आधार पर अपनी हिस्सेदारी बेच देगी।
सिन्हा ने कहा, "हम किसी भी कंपनी को किसी तरह से बांध नहीं रहे हैं।" इस नीति से स्टार्टअप्स को खरीदारों या रणनीतिक निवेशकों को आकर्षित करने की स्वतंत्रता मिलेगी और सरकार की ओर से कोई अनावश्यक प्रतिबंध नहीं होगा।
Semicon 2.0 का लक्ष्य भारत के चिप उद्योग को मजबूत बनाना
यह नया निवेश मॉडल भारत में मजबूत सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) विकसित करने की सरकार की व्यापक योजना का हिस्सा है। निजी वेंचर कैपिटल कंपनियों के साथ निवेश जोखिम साझा करके सरकार भारतीय चिप स्टार्टअप्स में अधिक निवेश को प्रोत्साहित करना चाहती है और सेमीकंडक्टर तकनीक के लिए देश की आयात पर निर्भरता कम करना चाहती है।
अधिकारियों का मानना है कि यह योजना नवाचार को तेज करेगी, घरेलू विनिर्माण को मजबूत बनाएगी और भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर केंद्र बनाने के दीर्घकालिक लक्ष्य को आगे बढ़ाएगी।