चीन ने शुक्रवार को घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए हीलियम के निर्यात पर अस्थायी रोक लगाने की घोषणा की। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान से जुड़े जारी संघर्ष के कारण वैश्विक हीलियम आपूर्ति प्रभावित हो रही है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी उपलब्धता लगातार कम होती जा रही है।
यह प्रतिबंध चीन के वाणिज्य मंत्रालय और सीमा शुल्क के सामान्य प्रशासन की संयुक्त घोषणा के तुरंत बाद लागू हो गया। हालांकि, अधिकारियों ने इस निर्णय के पीछे का कारण नहीं बताया और न ही यह स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध कितने समय तक प्रभावी रहेगा।
हीलियम की आपूर्ति पर बढ़ता दबाव
हीलियम कई उच्च-प्रौद्योगिकी (हाई-टेक) और चिकित्सा उद्योगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण गैस है। इसका व्यापक उपयोग सेमीकंडक्टर (चिप) निर्माण में होता है और अस्पतालों तथा स्वास्थ्य केंद्रों में एमआरआई (MRI) स्कैनर को ठंडा रखने के लिए यह अनिवार्य है।
फरवरी के अंत में ईरान से जुड़े संघर्ष के तेज होने के बाद से वैश्विक हीलियम आपूर्ति पर लगातार दबाव बढ़ा है। आपूर्ति में आई बाधाओं के कारण दुनिया भर में हीलियम की कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है।
आयातित हीलियम पर काफी हद तक निर्भर है चीन
बड़े औद्योगिक आधार के बावजूद चीन अपनी कुल हीलियम आवश्यकता का केवल एक छोटा हिस्सा ही स्वयं उत्पादन कर पाता है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, चीन अपनी घरेलू मांग का केवल लगभग 15 प्रतिशत स्थानीय उत्पादन से पूरा करता है, जबकि शेष हीलियम मुख्य रूप से आयात के जरिए प्राप्त किया जाता है।
अनुसंधान के अनुसार, कतर चीन का सबसे बड़ा हीलियम आपूर्तिकर्ता है और वैश्विक हीलियम उत्पादन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा अकेले वही उपलब्ध कराता है। विदेशी आपूर्ति पर इस निर्भरता ने चीन को वैश्विक बाजार में होने वाले व्यवधानों के प्रति अधिक संवेदनशील बना दिया है।
घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम
विश्लेषकों का मानना है कि बीजिंग ने यह अस्थायी निर्यात प्रतिबंध भू-राजनीतिक कारणों से नहीं, बल्कि घरेलू उद्योगों की जरूरतों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से लगाया है।
फ्रांसीसी बैंक नैटिक्सिस के वरिष्ठ अर्थशास्त्री गैरी एनजी ने रॉयटर्स से कहा कि वैश्विक बाजार में हीलियम की उपलब्धता लगातार कम होती जा रही है। उनके अनुसार, चीन विशेष रूप से उन उद्योगों के लिए हीलियम की आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहता है जो इस गैस पर अत्यधिक निर्भर हैं, खासकर सेमीकंडक्टर निर्माता। उन्होंने कहा कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य आपूर्ति सुरक्षा को मजबूत करना है, न कि राजनीतिक संदेश देना।
सेमीकंडक्टर और एआई रणनीति का भी प्रभाव
यह निर्णय चीन की उस व्यापक रणनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वह अपने सेमीकंडक्टर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) उद्योगों को मजबूत करना चाहता है।
संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ बढ़ती तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच बीजिंग लगातार अपनी घरेलू तकनीकी आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। हीलियम जैसी महत्वपूर्ण औद्योगिक सामग्री की स्थिर उपलब्धता सुनिश्चित करना इस रणनीति का अहम हिस्सा माना जाता है।
वैश्विक आपूर्ति सामान्य होने को लेकर अनिश्चितता
विशेषज्ञों का कहना है कि यह अनुमान लगाना अभी कठिन है कि अंतरराष्ट्रीय हीलियम बाजार कब सामान्य स्थिति में लौटेगा। शंघाई स्थित परामर्श कंपनी टाइडलवेव सॉल्यूशंस के वरिष्ठ साझेदार कैमरून जॉनसन के अनुसार, निर्यात पर रोक इस बात का संकेत है कि चीनी अधिकारियों को लगता है कि वर्तमान हीलियम भंडार घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
हालांकि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि चीन हीलियम का बड़ा निर्यातक नहीं है, इसलिए इस फैसले का वैश्विक स्तर पर प्रभाव सीमित रह सकता है। फिर भी, यह प्रतिबंध पहले से दबाव झेल रहे अंतरराष्ट्रीय हीलियम बाजार को और अधिक तंग कर सकता है।
वैश्विक आपूर्ति पहले ही संकट में है। ऐसे में चीन द्वारा लगाया गया यह अस्थायी निर्यात प्रतिबंध उन उद्योगों के लिए अतिरिक्त अनिश्चितता पैदा कर सकता है जो हीलियम पर निर्भर हैं, कम-से-कम तब तक जब तक वैश्विक आपूर्ति की स्थिति में सुधार नहीं हो जाता।