केप वर्डे ने फीफा विश्व कप के इतिहास के सबसे बड़े उलटफेरों में से एक को अंजाम देते हुए यूरोपीय चैंपियन स्पेन को 0-0 की बराबरी पर रोक दिया। विश्व कप में अपने पहले ही मुकाबले में अफ्रीकी देश ने शानदार रक्षात्मक खेल का प्रदर्शन किया और स्पेन जैसी मजबूत टीम को गोल करने से रोक दिया।
मैच के सबसे बड़े नायक अनुभवी गोलकीपर वोजिन्हा रहे, जिन्होंने सात महत्वपूर्ण बचाव कर अपनी टीम को यादगार अंक दिलाया। दूसरे हाफ में स्पेन ने युवा स्टार लामिन यामाल को मैदान पर उतारा, लेकिन वह भी प्रेरणादायक प्रदर्शन कर रहे वोजिन्हा को नहीं भेद सके।
सितारों से सजी स्पेनिश टीम नहीं दिखा सकी धार
स्पेन इस मुकाबले में युवा और अनुभवी खिलाड़ियों से भरी टीम के साथ उतरा था। लामिन यामाल, निको विलियम्स, रोड्री, पेड्री, गावी, दानी ओल्मो और मार्क कुकुरेला जैसे खिलाड़ियों से जीत की उम्मीद की जा रही थी।
वहीं केप वर्डे की टीम में रयान मेंडेस, लोगान कोस्टा, जमीरो मोंटेइरो और डेलॉन लिव्रामेंटो जैसे खिलाड़ी शामिल थे। दोनों टीमों की प्रतिष्ठा में अंतर होने के बावजूद केप वर्डे ने पूरे मैच में स्पेन की बराबरी की।
केप वर्डे की रक्षात्मक दीवार
केप वर्डे ने पूरे 90 मिनट तक अनुशासित और संगठित खेल दिखाया। हैरानी की बात यह रही कि टीम ने पूरे मैच में केवल एक फाउल किया। स्पेन ने अधिकांश समय गेंद अपने पास रखी, लेकिन उसका खेल अधिकतर साइड पास तक सीमित रहा। दूसरी ओर, केप वर्डे ने लगभग पूरी टीम को गेंद के पीछे रखकर हर खाली जगह को बंद कर दिया। नतीजतन, पहले हाफ के बड़े हिस्से में 70 प्रतिशत से अधिक गेंद पर कब्जा रखने के बावजूद स्पेन स्पष्ट मौके नहीं बना सका।
यामाल के बिना संघर्ष करती दिखी स्पेन
स्पेन के कोच लुइस डे ला फुएंते ने सभी को चौंकाते हुए फिट होने के बावजूद लामिन यामाल को शुरुआती एकादश में शामिल नहीं किया। इस फैसले का असर स्पेन के खेल पर साफ दिखाई दिया। मिकेल ओयारजाबाल पहले हाफ में काफी हद तक अलग-थलग नजर आए और टीम खतरनाक क्षेत्रों में प्रभावी पास नहीं जोड़ सकी।
एक अनचाहा रिकॉर्ड भी दर्ज हुआ, जब ओयारजाबाल 1966 के बाद विश्व कप मैच में शुरुआती 30 मिनट तक गेंद को छूने में असफल रहने वाले पहले खिलाड़ी बने। पहले हाइड्रेशन ब्रेक तक स्पेन ने तीन शॉट लगाए, लेकिन केप वर्डे की रक्षा पंक्ति को कोई खास परेशानी नहीं हुई।
हाफ टाइम से पहले वोजिन्हा बने दीवार
पहले हाफ के अंतिम चरण में जब स्पेन ने दबाव बढ़ाया, तब वोजिन्हा ने शानदार बचावों की झड़ी लगा दी। 39वें मिनट में फेरान टोरेस का शॉट पोस्ट से टकराया। इसके कुछ ही क्षण बाद वोजिन्हा ने ओयारजाबाल के हेडर को शानदार तरीके से रोक दिया।
इसके बाद उन्होंने फेरान टोरेस के एक और प्रयास को विफल किया और फिर कॉर्नर से आए एमेरिक लापोर्टे के हेडर पर भी बेहतरीन बचाव किया। उनकी बदौलत हाफ टाइम तक स्कोर 0-0 रहा।
यामाल के आने से बदला मैच का माहौल
दूसरे हाफ के कूलिंग ब्रेक के दौरान स्पेन ने आखिरकार लामिन यामाल को मैदान पर उतारा। बार्सिलोना के इस युवा विंगर ने आते ही स्पेन के आक्रमण में गति, रचनात्मकता और आक्रामकता भर दी। उन्होंने लगातार ड्रिब्लिंग से केप वर्डे के रक्षकों को परेशान किया।
यामाल ने जल्द ही एक मौका बनाया, जिससे मिकेल मेरिनो को शॉट लगाने का अवसर मिला, लेकिन वोजिन्हा फिर चट्टान की तरह खड़े रहे।
स्पेन को लगातार निराश करता रहा केप वर्डे
स्पेन के बेहतर आक्रमण के बावजूद केप वर्डे दबाव में नहीं टूटा। उसकी रक्षापंक्ति ने स्पेन को केवल आधे-अधूरे मौके ही दिए। मैच के अंतिम चरण में मार्क कुकुरेला को मौका मिला, लेकिन उनका प्रयास सीधे वोजिन्हा के हाथों में चला गया।
86वें मिनट में स्पेन गोल करने के सबसे करीब पहुंचा, जब ओयारजाबाल की वॉली को डिफेंडर रोबर्टो लोप्स ने शानदार तरीके से ब्लॉक कर दिया। समय बीतने के साथ स्पेन के हमले तेज होते गए, लेकिन केप वर्डे के खिलाड़ी हर शॉट के सामने मजबूती से डटे रहे।
केप वर्डे जीत के भी करीब पहुंचा
इंजरी टाइम शुरू होते ही केप वर्डे ने लगभग एक और बड़ा चमत्कार कर दिया। मैच के अपने पहले कॉर्नर पर डिनेय बोर्गेस सबसे ऊंची छलांग लगाकर हेडर लगाने में सफल रहे, लेकिन गेंद सीधे स्पेन के गोलकीपर उनाई सिमोन के पास चली गई।
इसके कुछ देर बाद रयान मेंडेस को भी मौका मिला, लेकिन उनका प्रयास लक्ष्य से बाहर चला गया। स्पेन ने भी अंतिम क्षणों में विजयी गोल की कोशिश जारी रखी, लेकिन सफलता नहीं मिली और अंतिम सीटी के साथ केप वर्डे के लिए ऐतिहासिक परिणाम पक्का हो गया।
अंतिम सीटी के बाद भावुक हुए खिलाड़ी
मैच समाप्त होते ही केप वर्डे के खिलाड़ियों की भावनाएं छलक पड़ीं। वोजिन्हा भावुक होकर रो पड़े, जबकि उनके साथी खिलाड़ी उन्हें घेरकर जश्न मनाने लगे। स्टेडियम में मौजूद समर्थकों ने भी देश के फुटबॉल इतिहास के सबसे यादगार परिणामों में से एक का जोरदार उत्सव मनाया।
स्पेन को तलाशने होंगे नए विकल्प
इस मुकाबले ने स्पेन की रणनीति पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विंग पर गावी और फेरान टोरेस को उतारने का फैसला अपेक्षित रचनात्मकता नहीं दे सका। दोनों खिलाड़ी लगातार रक्षकों को छकाने में संघर्ष करते रहे।
इसके विपरीत, यामाल ने मैदान पर आते ही पांच सफल ड्रिब्ल पूरे किए, जो मैच में किसी भी खिलाड़ी द्वारा सबसे अधिक थे। स्पेन को केवल गेंद पर कब्जा रखने और छोटे पासों पर निर्भर रहने के बजाय अधिक सीधे और आक्रामक खेल की जरूरत महसूस हो रही है।
अब स्पेन 21 जून को सऊदी अरब के खिलाफ अपने अगले मुकाबले में बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेगा। वहीं ऐतिहासिक ड्रॉ से उत्साहित केप वर्डे की टीम अपने अगले मैच में उरुग्वे का सामना करेगी और अपने शानदार विश्व कप सफर को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगी।
