अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और भारत व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों देश जल्द ही बाकी बची बाधाओं को दूर कर समझौते तक पहुंच जाएंगे।
ट्रंप ने मोदी की तारीफ की
गुरुवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की और उन्हें अपना “अच्छा मित्र” बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच मजबूत व्यक्तिगत संबंध बातचीत के अंतिम मुद्दों को सुलझाने में मदद कर सकते हैं।
ट्रंप ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि दोनों नेताओं के बीच सकारात्मक संबंध समझौते को पूरा करने के प्रयासों को आगे बढ़ाएंगे।
ट्रंप ने पुराने व्यापार संबंधों की आलोचना की
समझौते को लेकर आशावाद जताने के साथ-साथ ट्रंप ने भारत और अमेरिका के बीच पहले के व्यापारिक संबंधों की आलोचना भी की। उन्होंने कहा कि कई वर्षों तक भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार में अधिक लाभ उठाया क्योंकि अमेरिकी वस्तुओं पर ऊंचे शुल्क लगाए जाते थे।
ट्रंप ने कहा, “कई वर्षों तक भारत ने अमेरिका का फायदा उठाया। वे हमसे बहुत ज्यादा शुल्क लेते थे और बदले में कुछ नहीं देते थे।”
उन्होंने आगे कहा, “अब स्थिति बिल्कुल उलट है और हम भारत के साथ व्यापार से काफी कमाई कर रहे हैं। लेकिन हम समझौते तक पहुंचेंगे क्योंकि मुझे आपके प्रधानमंत्री बहुत पसंद हैं; वह मेरे अच्छे दोस्त हैं और हमारे संबंध अच्छे हैं।”
ट्रंप ने दावा किया कि व्यापार संतुलन अब वॉशिंगटन के पक्ष में हो गया है।
नई दिल्ली में हुई अहम व्यापार वार्ता
ट्रंप की यह टिप्पणी नई दिल्ली में हुई महत्वपूर्ण व्यापार वार्ता के बाद आई। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) के अधिकारियों ने 1 जून से 4 जून तक भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठकें कीं।
दोनों पक्षों ने अंतरिम व्यापार समझौते और लंबित मुद्दों पर चर्चा की। इन बैठकों का उद्देश्य ऐसा समझौता तैयार करना था जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभकारी हो और द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को मजबूत करे।
मुख्य व्यापारिक मुद्दों पर रहा फोकस
भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने वार्ता को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि बातचीत “सहयोग और व्यावहारिकता की भावना” के साथ हुई।
वार्ता में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई, जिनमें शामिल हैं:
- वस्तुओं और सेवाओं के लिए बाजार पहुंच बढ़ाना
- गैर-शुल्क बाधाओं को हटाना
- सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाना
- व्यापार सुगमता बढ़ाना
- आर्थिक सुरक्षा पर सहयोग मजबूत करना
अधिकारियों ने व्यावहारिक समाधान खोजने और मतभेद कम करने की दिशा में काम किया।
अब केवल कुछ मुद्दे बाकी
दोनों देशों के राजनयिकों ने बातचीत को उत्पादक बताया और कहा कि समझौते का पहला चरण लगभग पूरा हो चुका है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि वार्ता अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। उन्होंने बताया कि अधिकारी समझौते की घोषणा से पहले “बचे हुए 1 प्रतिशत अटके हुए मुद्दों” को सुलझाने में जुटे हैं।
उनकी टिप्पणी से संकेत मिलता है कि दोनों सरकारें जल्द समझौते की उम्मीद कर रही हैं।
टैरिफ समीक्षा से बढ़ा दबाव
यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब ट्रंप प्रशासन व्यापक व्यापार नीति की समीक्षा कर रहा है, जिसका असर भारत सहित कई देशों पर पड़ सकता है।
इस प्रस्ताव के तहत सेक्शन 301 समीक्षा के अंतर्गत 60 अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले आयात पर 12.5 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जा सकता है। यह समीक्षा सप्लाई चेन अनुपालन और जबरन श्रम से जुड़े आयात संबंधी चिंताओं पर केंद्रित है।
इस नीति समीक्षा ने मौजूदा वार्ता को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।
ऊर्जा संबंधी मुद्दों का भी असर
दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता पर ऊर्जा से जुड़े मुद्दों का भी प्रभाव पड़ा है। इस वर्ष की शुरुआत में अमेरिका ने भारत द्वारा रूसी कच्चा तेल खरीदने के कारण कुछ भारतीय आयातों पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाया था। बाद में भारत द्वारा इन आयातों को रोकने पर अमेरिका ने यह शुल्क हटा लिया।
अधिकारी अमेरिकी ट्रेजरी की अस्थायी ऊर्जा छूट पर भी नजर रखे हुए हैं, जिसकी अवधि 17 जून को समाप्त होगी। दोनों पक्ष इस समयसीमा से पहले स्थिर व्यापार ढांचा तैयार करना चाहते हैं।
समझौते के लिए दोनों देशों की कोशिश जारी
चुनौतियां बाकी रहने के बावजूद दोनों सरकारें आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने के पक्ष में हैं।
हालिया प्रगति और ट्रंप की सकारात्मक टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन और नई दिल्ली अंतिम समझौते के और करीब पहुंच गए हैं। अब दोनों देशों के अधिकारी अंतिम मुद्दों को सुलझाकर ऐसा समझौता पूरा करने पर ध्यान दे रहे हैं जो आने वाले वर्षों में व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत कर सके।
