JUSZnews

NEWS WITHOUT INTERRUPTION

Subscribe
रुबियो ने दावा किया कि अमेरिका ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष खत्म कराने में मदद की, भारत ने मध्यस्थता की भूमिका को नकारा
मार्को रुबियो ने एक बार फिर अमेरिकी दावे को दोहराया कि वॉशिंगटन ने 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष को समाप्त कराने में मदद की थी, जबकि भारत लगातार यह कहता रहा है कि युद्धविराम दोनों देशों के बीच सीधे द्विपक्षीय वार्ता के जरिए हासिल किया गया था।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक बार फिर ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति का बचाव किया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच बड़े सैन्य संघर्ष को रोकने में अमेरिका ने मदद की थी।

रुबियो ने यह टिप्पणी व्हाइट हाउस कैबिनेट बैठक और बाद में मीडिया ब्रीफिंग के दौरान की। उनकी टिप्पणियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों का समर्थन किया, जिनमें वे बार-बार कहते रहे हैं कि उनके प्रशासन ने दोनों देशों के बीच तनाव कम करने में अहम भूमिका निभाई।

रुबियो ने कहा कि अमेरिका ने संघर्ष समाप्त करने में मदद की

रुबियो ने ट्रंप प्रशासन की कई कूटनीतिक पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने वॉशिंगटन को एक सक्रिय शांति मध्यस्थ बताया, जो देशों को बातचीत की मेज तक लाने के लिए आर्थिक प्रभाव का इस्तेमाल करता है। रुबियो ने कहा, “हमने अज़रबैजान और आर्मेनिया के बीच शांति समझौता कराया… दूसरा भारत-पाकिस्तान है। हमने उस युद्ध को समाप्त कराया।”

उन्होंने आगे कहा, “हम इसमें मध्यस्थता करने में शामिल थे… हम लगातार पूरी दुनिया में कूटनीति कर रहे हैं और कई मामलों में बहुत सफल भी रहे हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति अमेरिकी हितों पर आधारित है।

रुबियो ने कहा, “दशकों में पहली बार अमेरिकी विदेश नीति पूरी तरह इस आधार पर संचालित हो रही है कि उससे अमेरिका कितना अधिक सुरक्षित, मजबूत और समृद्ध बनता है।”

उन्होंने ट्रंप को जटिल अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने का श्रेय दिया और थाईलैंड-कंबोडिया तथा कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य-रवांडा से जुड़े तनावों का भी उदाहरण दिया।

रुबियो किस संघर्ष का जिक्र कर रहे थे?

रुबियो मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य तनाव का जिक्र कर रहे थे। यह संकट भारत द्वारा ऑपरेशन सिंदूर शुरू किए जाने के बाद शुरू हुआ था। पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाया था।

सैन्य टकराव चार दिन तक चला। इस स्थिति को लेकर पूरी दुनिया में चिंता बढ़ गई थी। दोनों देशों ने 10 मई 2025 को युद्धविराम की घोषणा की थी।

ट्रंप प्रशासन ने लिया श्रेय

ट्रंप प्रशासन लगातार कहता रहा है कि अमेरिकी कूटनीति ने युद्धविराम सुनिश्चित करने में मदद की। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, संकट के दौरान उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और मार्को रुबियो ने नई दिल्ली और इस्लामाबाद के नेताओं के साथ गहन बातचीत की थी।

प्रशासन ने यह भी दावा किया कि आगे व्यापारिक दंड की संभावना का उपयोग कर दोनों पक्षों को तनाव कम करने के लिए प्रेरित किया गया। ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि टैरिफ की चेतावनी ने इस टकराव को समाप्त करने में भूमिका निभाई। उन्होंने पहले दावा किया था कि अमेरिकी आर्थिक दबाव ने “कई बेहद खूबसूरत युद्धों को खत्म कराया।”

भारत ने तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के दावे को खारिज किया

भारत ने अमेरिकी दावों को स्पष्ट रूप से खारिज किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों संसद में भारत का पक्ष रख चुके हैं। नई दिल्ली के अनुसार, पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशक (DGMO) ने अपने भारतीय समकक्ष से संपर्क किया और तनाव कम करने का अनुरोध किया। इसके बाद दोनों पक्षों ने शत्रुता समाप्त करने की दिशा में काम किया।

भारत का कहना है कि युद्धविराम दोनों देशों के बीच सीधे संवाद का परिणाम था। भारत सरकार ने यह भी कहा है कि वॉशिंगटन की ओर से किसी बाहरी दबाव, व्यापारिक धमकी या आर्थिक प्रोत्साहन ने इस निर्णय को प्रभावित नहीं किया।

दो अलग-अलग दावे कायम

अमेरिका अब भी युद्धविराम को ट्रंप प्रशासन की कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश करता है। वहीं भारत इस दावे को लगातार खारिज कर रहा है। नई दिल्ली का कहना है कि युद्धविराम पूरी तरह द्विपक्षीय प्रक्रिया थी और भारत तथा पाकिस्तान के बीच सीधे सैन्य स्तर के संवाद का परिणाम था।

इसी कारण दोनों देश अब भी इस बात को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण रखते हैं कि 2025 का संघर्ष आखिर कैसे समाप्त हुआ।