नासा ने बुधवार शाम आर्टेमिस-II मिशन लॉन्च किया। यह मिशन लगभग 54 वर्षों बाद इंसानों की चंद्रमा की ओर पहली यात्रा को दर्शाता है। अंतरिक्ष यान फिलहाल पृथ्वी की कक्षा में घूम रहा है। यह गुरुवार तक ऐसा करता रहेगा। इसके बाद इंजीनियर ट्रांसलूनर इंजेक्शन बर्न को अंजाम देंगे। इस चरण के बाद अंतरिक्ष यान 2,40,000 मील की यात्रा पर चंद्रमा की ओर बढ़ेगा।
अंतरिक्ष में काम शुरू
ओरायन कैप्सूल में चार अंतरिक्ष यात्री सवार हैं। उन्होंने लॉन्च के तुरंत बाद अंतरिक्ष यान के प्रदर्शन की जांच शुरू कर दी। रॉकेट ने उड़ान के दौरान 17,500 मील प्रति घंटा की गति हासिल की।
ह्यूस्टन स्थित मिशन कंट्रोल ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि की पुष्टि की। सभी चार सोलर पैनल सफलतापूर्वक खुल गए, जो पूरे मिशन के दौरान ऊर्जा प्रदान करेंगे।
Liftoff.
— NASA (@NASA) April 1, 2026
The Artemis II mission launched from @NASAKennedy at 6:35pm ET (2235 UTC), propelling four astronauts on a journey around the Moon.
Artemis II will pave the way for future Moon landings, as well as the next giant leap — astronauts on Mars. pic.twitter.com/ENQA4RTqAc
1972 के बाद पृथ्वी की कक्षा से बाहर पहला मिशन
यह मिशन ऐतिहासिक है। 1972 में हुए अपोलो-17 मिशन के बाद से इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा से बाहर नहीं गए थे। मिशन कमांडर रीड वाइसमैन ने इस पल को खास बताते हुए कहा, “देश और पूरी दुनिया काफी लंबे समय से इस पल का इंतजार कर रही थी।”
क्रू ने रचा इतिहास
मिशन दल में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। क्रिस्टीना कोच सिसलूनर स्पेस (पृथ्वी और चंद्रमा के बीच के अंतरिक्ष क्षेत्र) में जाने वाली पहली महिला बनेंगी।
विक्टर ग्लोवर इस क्षेत्र में पहुंचने वाले पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री होंगे। वहीं जेरेमी हैनसेन इस मिशन में शामिल होने वाले पहले गैर-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री बनकर इतिहास रचेंगे।
दूरी का नया रिकॉर्ड
यह अंतरिक्ष यान अब तक के किसी भी मानव मिशन से अधिक दूरी तय करेगा। मिशन के छठे दिन तक क्रू चंद्रमा के दूर वाले हिस्से से 4,600 मील आगे निकल जाएगा। वे पृथ्वी से लगभग 2,53,000 मील की दूरी तक पहुंचेंगे।
यह रिकॉर्ड पहले अपोलो-13 मिशन द्वारा बनाया गया था, जिसे यह मिशन तोड़ देगा।
भविष्य के चंद्रमा बेस की दिशा में कदम
नासा के अनुसार आर्टेमिस-II मिशन भविष्य की योजनाओं के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। एजेंसी इस दशक के अंत तक चंद्रमा पर एक स्थायी बेस बनाने की योजना बना रही है। इस परियोजना का नेतृत्व जैरेड आइज़ैकमैन कर रहे हैं।
मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की तस्वीरें लेंगे। वे चंद्रमा की सतह से 4,000 से 6,000 मील की ऊंचाई से तस्वीरें कैद करेंगे। यह क्षेत्र भविष्य के लैंडिंग मिशनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
भविष्य के मिशनों के लिए परीक्षण
मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री कई महत्वपूर्ण प्रणालियों का परीक्षण करेंगे। इनमें लाइफ सपोर्ट सिस्टम और अन्य तकनीकी उपकरण शामिल हैं। इन परीक्षणों के नतीजे भविष्य के मिशनों—जैसे कि आर्टेमिस-IV (2028)—के लिए उपयोगी होंगे।
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कैप्सूल के अंदर जीवन
अंतरिक्ष यात्री एक छोटे से स्थान में रहेंगे। ओरायन कैप्सूल का व्यास लगभग पांच मीटर है। वे प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन होने तक इसी कैप्सूल में रहेंगे। वैज्ञानिक लगातार उनके स्वास्थ्य पर नजर रखेंगे और रेडिएशन तथा माइक्रोग्रैविटी के प्रभावों का अध्ययन करेंगे।
कमांडर रीड वाइसमैन ने कहा कि छोटे से कैप्सूल में रहना कभी-कभी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
उन्होंने कहा, “कभी-कभी एक छोटी सी चीज भी—जैसे पेन का ढक्कन क्लिक करना—10 दिनों तक एक छोटे कैप्सूल में किसी को परेशान कर सकता है।”
उन्होंने आगे कहा, “हमारे बीच अच्छा संवाद है और हम ऐसी बातों पर खुलकर चर्चा करते हैं। लेकिन छठे, सातवें, आठवें या नौवें दिन ऐसे पल आ सकते हैं जब लगे कि थोड़ा अकेला समय चाहिए—और अभी वह मिल नहीं सकता। लेकिन हम एक अच्छी टीम हैं।”
