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उत्तर-पश्चिम भारत में शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ से बारिश और ओलावृष्टि की संभावना
ईरान के पूर्व विदेश मंत्री कमाल खर्राज़ी अपने घर पर हुए हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। वहीं रिपोर्टों के अनुसार लगातार हो रहे हमलों के बावजूद ईरान की शासन व्यवस्था अब भी स्थिर बनी हुई है।

मौसम विशेषज्ञों ने एक तेज पश्चिमी विक्षोभ को लेकर चेतावनी जारी की है, जो भारत के बड़े हिस्सों को प्रभावित कर सकता है। यह सिस्टम खासकर उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों से गुजरते हुए भारी बारिश, ओलावृष्टि और तापमान में स्पष्ट गिरावट ला सकता है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) द्वारा 1 अप्रैल को जारी बुलेटिन के अनुसार यह पश्चिमी विक्षोभ 3 और 4 अप्रैल को अपने चरम पर होगा। इस दौरान कुछ इलाकों खासकर कश्मीर घाटी में 3 अप्रैल को कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है।

कई क्षेत्रों में बारिश और आंधी-तूफान की संभावना

आईएमडी ने अनुमान लगाया है कि 6 अप्रैल तक मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना है। 3 अप्रैल को कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है।

उत्तर-पश्चिम भारत में दिन का तापमान 6 अप्रैल तक सामान्य या सामान्य से कम रहने की संभावना है। इससे पिछले कुछ हफ्तों से चल रहा असामान्य ठंडा मौसम और लंबा खिंच सकता है।

असामान्य मौसम का सिलसिला जारी

देश के कई हिस्सों में पहले से ही लगातार आने वाले पश्चिमी विक्षोभ के कारण सामान्य से ठंडा मौसम देखा जा रहा है। मार्च के दूसरे हिस्से में भी एक ऐसा ही सिस्टम आया था, जिसने दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर-पश्चिम भारत के कई इलाकों में बारिश और तापमान में गिरावट दर्ज कराई थी।

विशेषज्ञों के अनुसार यह ‘शक्तिशाली’ सिस्टम

मौसम वैज्ञानिकों ने आने वाले इस पश्चिमी विक्षोभ को काफी शक्तिशाली बताया है। इस सिस्टम की एक खास विशेषता इसका “यू-आकार (U-shaped) का जेट स्ट्रीम पैटर्न” है, जो मौसम गतिविधियों को और तीव्र कर सकता है।

हरियाणा और पंजाब के कुछ हिस्सों में पहले ही बारिश और ओलावृष्टि देखी जा चुकी है, जिससे किसानों—खासकर गेहूं की फसल काटने की तैयारी कर रहे किसानों—की चिंता बढ़ गई है।

कई राज्यों में गंभीर मौसम की आशंका

जलवायु वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप ने चेतावनी दी है कि यह पश्चिमी विक्षोभ कई राज्यों में कठोर मौसम परिस्थितियां पैदा कर सकता है।

उन्होंने बताया कि इसका मुख्य असर इन क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है:

  • जम्मू-कश्मीर और लद्दाख – जहां भारी बारिश और बर्फबारी की संभावना है
  • पंजाब और राजस्थान – जहां व्यापक आंधी-तूफान और तेज हवाएं चल सकती हैं
  • गुजरात – खासकर उत्तरी और आंतरिक इलाकों में इसका असर ज्यादा हो सकता है

इसके अलावा हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित मैदानी और मध्य/पूर्वी क्षेत्रों में भी छिटपुट आंधी-तूफान आने की संभावना जताई गई है।

असर मध्य और दक्षिण भारत तक फैलेगा

जैसे-जैसे यह सिस्टम आगे बढ़ेगा, मध्य और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में भी बारिश और गरज-चमक के साथ तूफान की संभावना है। इनमें महाराष्ट्र (खासकर विदर्भ और मराठवाड़ा), छत्तीसगढ़, तेलंगाना, साथ ही ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कुछ इलाके शामिल हैं।

डॉ. प्रदीप ने यह भी कहा कि बारिश के बाद तापमान में तेज गिरावट आ सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अप्रैल के दूसरे हिस्से में गर्मी का मौसम फिर से लौटने की संभावना है।

तेज मौसम के पीछे जेट स्ट्रीम का पैटर्न

मौसम पर्यवेक्षक नवदीप दहिया ने बताया कि जेट स्ट्रीम “यू-आकार (U-shaped)” का पैटर्न बना रही हैं, जो 3 अप्रैल से शुरू होने वाले मजबूत पश्चिमी विक्षोभ के विकास को बढ़ावा देता है।

स्काइमेट वेदर के महेश पलावत ने बताया कि जब जेट स्ट्रीम ज्यादा लहरदार हो जाती हैं, तो पश्चिमी विक्षोभ का असर निचले अक्षांशों तक भी ज्यादा महसूस होता है। उन्होंने इस पैटर्न को आर्कटिक क्षेत्र में तेजी से हो रही गर्मी से भी जोड़ा।

व्यापक मौसम गतिविधि की संभावना

दहिया के अनुसार उत्तर और पश्चिम भारत में बारिश, ओलावृष्टि और आंधी-तूफान देखने को मिल सकते हैं, जबकि मध्य और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में शाम के समय तेज गरज-चमक वाले तूफान आ सकते हैं।

उन्होंने कहा कि यह स्थिति “साल के तीसरे सबसे सूखे महीने में भी बहुत ज्यादा मौसम गतिविधि” जैसी है। उन्होंने यह भी बताया कि 15 अप्रैल के बाद ही गर्मी का मौसम पूरी तरह से स्थापित होने की संभावना है।

इस साल पश्चिमी विक्षोभ में बढ़ोतरी

हालिया रिपोर्टों के अनुसार मार्च महीने में आठ पश्चिमी विक्षोभ दर्ज किए गए, जबकि सामान्य तौर पर इनकी संख्या पांच से छह होती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अप्रैल के मध्य तक कम से कम तीन और सिस्टम आ सकते हैं।

यह बढ़ोतरी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जनवरी और फरवरी में सामान्य से कम पश्चिमी विक्षोभ आए थे, जिससे हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी भी कम हुई थी। हालांकि मार्च के मध्य से इनकी गतिविधि तेजी से बढ़ गई है।

पश्चिमी विक्षोभ क्या होता है?

पश्चिमी विक्षोभ एक नमी से भरा मौसम तंत्र होता है, जो भूमध्यसागर क्षेत्र से उत्पन्न होकर पूर्व की ओर बढ़ता है। यह जेट स्ट्रीम के साथ आगे बढ़ता है। जेट स्ट्रीम तेज गति से बहने वाली वायु धाराएं होती हैं, जो पृथ्वी की सतह से लगभग 30,000 फीट की ऊंचाई पर बहती हैं।