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बलेन्द्र शाह ने नेपाल के प्रधानमंत्री पद की कमान संभाली, नए युग का संकेत
बलेन्द्र शाह नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने, भारी चुनावी जीत के बाद सुधार का वादा किया।

35 वर्षीय पूर्व रैपर और काठमांडू के मेयर रहे बलेन्द्र शाह ने नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाल लिया है। शुक्रवार को उनका शपथ ग्रहण देश की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है।

वे हाल के समय के सबसे युवा नेता बन गए हैं। साथ ही, वे दक्षिणी तराई क्षेत्र के मधेसी समुदाय से आने वाले पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने यह सर्वोच्च पद संभाला है।

भारी चुनावी जीत ने बनाई राह

शाह का उभार उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की बड़ी चुनावी जीत के बाद हुआ है। महज तीन साल पुरानी इस पार्टी ने 5 मार्च को हुए चुनाव में संसद की 275 में से 182 सीटें जीत लीं।

ये चुनाव अशांति के दौर के बाद हुए। पिछले साल सितंबर में युवाओं के नेतृत्व में भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शन हुए थे, जो हिंसक हो गए। इन घटनाओं में 76 लोगों की मौत हुई और पिछली सरकार गिर गई।

नई राजनीतिक शुरुआत

राष्ट्रपति भवन में हुए शपथ ग्रहण समारोह में शाह अपने अलग अंदाज में नजर आए। उन्होंने काली नेपाली टोपी, सनग्लासेस, मैचिंग जैकेट और स्लिम पैंट पहनी थी।

उनका नेतृत्व नेपाल में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत देता है। भारत और चीन के बीच स्थित यह देश लंबे समय से उम्रदराज नेताओं के नेतृत्व में रहा है।

राजनीतिक विश्लेषक पुरंजन आचार्य ने कहा कि लोगों को नई सरकार से तेज कार्रवाई की उम्मीद है। उन्होंने कहा, “नई सरकार की पहली परीक्षा पारदर्शी और त्वरित सेवा देने में है, क्योंकि लोग शुरुआत से ही सुशासन के संकेत चाहते हैं।”

बड़ी चुनौती: प्रदर्शन के बाद न्याय

शाह के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक पिछले साल के प्रदर्शनों के बाद की स्थिति से निपटना है। एक सरकारी पैनल अपनी रिपोर्ट पहले ही सौंप चुका है, जिसमें मौतों के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

इस रिपोर्ट में पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली का नाम भी शामिल है।

आचार्य ने कहा कि इस रिपोर्ट पर कार्रवाई करना शाह के लिए शुरुआती परीक्षा होगी। मृतकों के परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं।

ये प्रदर्शन गंभीर मुद्दों से जुड़े थे, जिनमें रोजगार की कमी और गहरी जड़ें जमा चुकी भ्रष्टाचार शामिल हैं। इसी कारण हर दिन लगभग 1,500 नेपाली रोजगार की तलाश में देश छोड़ रहे हैं।

वैश्विक समर्थन और क्षेत्रीय फोकस

नेतृत्व में बदलाव ने क्षेत्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन पहले नेताओं में शामिल थे जिन्होंने शाह को बधाई दी।

उन्होंने कहा, “श्री बलेन्द्र शाह को नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने पर हार्दिक बधाई। आपकी नियुक्ति नेपाल की जनता द्वारा आपके नेतृत्व पर जताए गए विश्वास को दर्शाती है। मैं भारत-नेपाल मित्रता और सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने को उत्सुक हूं।”

राजनीतिक अस्थिरता को खत्म करने की चुनौती

शाह के सामने नेपाल की राजनीति में स्थिरता लाने की बड़ी चुनौती है। 1990 से अब तक देश में 32 सरकारें बदल चुकी हैं और कोई भी सरकार पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई है।

हालिया चुनाव में प्रमुख दल कमजोर पड़े हैं। नेपाली कांग्रेस को सिर्फ 38 सीटें मिलीं, जबकि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) को केवल 25 सीटें हासिल हुईं।

मजबूत बहुमत के साथ शाह के पास स्पष्ट जनादेश है। उनका लक्ष्य नेपाल के 3 करोड़ लोगों के लिए आर्थिक विकास को आगे बढ़ाना और स्थिरता लाना है।