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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के पास जहाज़ों पर हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के करीब पहुंचीं
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के पास जहाज़ों पर हुए नए हमलों के बाद वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल आया। इससे यह आशंका बढ़ गई है कि बढ़ता संघर्ष महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति को बाधित कर सकता है।

वैश्विक तेल बाजारों में गुरुवार को तेज उछाल आया क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा शिपिंग मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के पास जहाज़ों पर नए हमलों की खबरों के बाद ट्रेडरों ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

आंकड़ों के अनुसार ब्रेंट क्रूड ऑयल लगभग 7 प्रतिशत बढ़कर करीब 99.5 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) शुरुआती कारोबार में 8 प्रतिशत से अधिक बढ़कर लगभग 94.36 डॉलर प्रति बैरल हो गया।

दिन में बाद में ब्रेंट की कीमतें 98 से 100 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी रहीं, जो वैश्विक ऊर्जा बाजारों में बढ़ती चिंता को दर्शाती हैं।

आपातकालीन तेल रिलीज़ से बाजार शांत नहीं हुए

कीमतों में यह उछाल इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के बड़े कदम के बावजूद आया। एजेंसी ने घोषणा की कि उसके 32 सदस्य देश अपने आपातकालीन भंडार से रिकॉर्ड 400 मिलियन बैरल तेल जारी करेंगे। इसका उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति को स्थिर करना और बाजार पर दबाव कम करना है।

हालांकि इस घोषणा से ट्रेडरों पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते जोखिमों के कारण बाजारों में उतार-चढ़ाव जारी रहा।

जहाज़ों पर हमलों से आपूर्ति को लेकर डर

व्यावसायिक जहाज़ों पर हमलों की रिपोर्ट ने तेल कीमतों में तेजी को बढ़ावा दिया। अधिकारियों ने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के पास तीन व्यापारिक जहाज़ों पर हमला हुआ। एक अलग घटना में विस्फोटकों से भरी एक ईरानी नाव ने इराकी जलक्षेत्र में दो ईंधन टैंकरों को निशाना बनाया।

इन घटनाओं से यह आशंका बढ़ गई कि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति को बाधित कर सकता है। दुनिया की लगभग एक-पांचवां तेल आपूर्ति इसी संकरे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से होकर गुजरती है, जिससे यह वैश्विक ऊर्जा व्यापार का बेहद महत्वपूर्ण मार्ग बन जाता है।

अमेरिकी हमलों से बढ़ा तनाव

ताजा तनाव उस समय बढ़ा जब डोनाल्ड ट्रंप ने जलडमरूमध्य के पास माइंस बिछाने के संदेह वाले ईरानी जहाज़ों पर हमले का आदेश दिया। इस कार्रवाई से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।

ट्रंप ने पहले कहा था कि संघर्ष “बहुत जल्द” समाप्त हो सकता है। लेकिन हाल के जहाज़ हमलों ने यह आशंका बढ़ा दी है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच टकराव लंबा चल सकता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को खतरे में डाल सकता है।

अमेरिका करेगा बड़े पैमाने पर तेल जारी

संयुक्त राज्य अमेरिका स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व से 172 मिलियन बैरल तेल जारी करने की योजना बना रहा है। इन शिपमेंट्स के अगले सप्ताह शुरू होने और लगभग चार महीने तक जारी रहने की उम्मीद है।

हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में आपूर्ति गंभीर रूप से बाधित होती है तो यह कदम केवल सीमित राहत ही दे पाएगा।

विश्लेषकों की चेतावनी: असर सीमित हो सकता है

ऊर्जा विश्लेषक सॉल कावोनिक ने कहा कि आपातकालीन तेल जारी करने से संभावित आपूर्ति व्यवधान का केवल छोटा हिस्सा ही पूरा हो सकेगा। उनके अनुमान के अनुसार यदि जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद हो जाता है तो संभावित 20 मिलियन बैरल प्रति दिन के झटके का केवल लगभग एक-चौथाई ही इससे कवर होगा।

उन्होंने कहा, “IEA का फैसला यह दिखाता है कि कमी का जोखिम कितना गंभीर है।” कावोनिक ने यह भी चेतावनी दी कि बाद में इन भंडारों को फिर से भरना पड़ेगा, जिससे संघर्ष खत्म होने के बाद भी तेल की कीमतें ऊंची रह सकती हैं।

तेल 200 डॉलर तक पहुंचने का खतरा

यह भी स्पष्ट नहीं है कि आपातकालीन तेल आपूर्ति वैश्विक बाजारों तक कितनी जल्दी पहुंच पाएगी। इससे ऊर्जा क्षेत्र में और अधिक अस्थिरता बढ़ गई है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक अधिकारी ने चेतावनी दी कि यदि जहाज़ों पर हमले जारी रहे तो तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।

प्रवक्ता ने कहा कि स्थिति बिगड़ने पर कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।

बाजारों में उतार-चढ़ाव की आशंका

भूराजनीतिक तनाव बढ़ने और आपूर्ति जोखिमों के कारण विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में तेल बाजार अस्थिर रह सकते हैं। काफी कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ खुला रहता है या नहीं।

यह संकरा समुद्री मार्ग वैश्विक तेल व्यापार की जीवनरेखा माना जाता है।