वैश्विक समुद्री क्षेत्र में एक बड़े घटनाक्रम के तहत, तथाकथित “डार्क फ्लीट” से जुड़े कई तेल टैंकर विदेशी झंडों को छोड़कर रूस में पंजीकरण करा रहे हैं। समुद्री विशेषज्ञ इसे अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा प्रतिबंधित तेल ले जाने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के बीच सुरक्षा हासिल करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
पुनः पंजीकरण में तेज़ी
यह बदलाव दिसंबर 2025 में तेज़ हुआ। पश्चिमी ताकतों द्वारा संभावित जब्ती के डर के कारण कई जहाज संचालकों ने अपना पंजीकरण बदलना शुरू कर दिया। ये जहाज रूस, ईरान और वेनेजुएला जैसे प्रतिबंधित देशों से तेल ढोने के लिए जाने जाते हैं।
स्टारबोर्ड मैरीटाइम इंटेलिजेंस के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर की शुरुआत से अब तक कम से कम 26 जहाजों ने रूसी पंजीकरण अपना लिया है। इनमें से 18 केवल दिसंबर में ही बदले गए। इसके मुकाबले, उससे पहले के पांच महीनों में केवल 15 जहाजों ने झंडा बदला था। इससे साफ है कि यह रुझान कितनी तेजी से बढ़ा है।
समुद्री विश्लेषक मार्क डगलस ने इस बदलाव के पैमाने को रेखांकित करते हुए कहा, “असल कहानी डार्क फ्लीट टैंकरों का लगातार और वैश्विक स्तर पर झंडा बदलना है। यह संख्या यहीं रुकने वाली नहीं लगती।”
जब्ती का डर बना वजह
जहाज मालिक अमेरिका और उसके साझेदारों द्वारा सख्त प्रवर्तन से चिंतित नजर आ रहे हैं। वेनेजुएला के तट के पास अमेरिका द्वारा सुपरटैंकर स्किपर की जब्ती के बाद यह रुझान और तेज हो गया। इस घटना ने प्रतिबंधित तेल ढोने वाले ऑपरेटरों में चिंता बढ़ा दी।
कई लोगों का मानना है कि रूसी झंडे के तहत चलने से पश्चिमी बलों द्वारा जहाजों पर चढ़ाई या जब्ती की संभावना कम हो सकती है। इस तरह वे किसी हद तक राज्य-स्तरीय संरक्षण की उम्मीद कर रहे हैं।
बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव
पहले इनमें से अधिकांश टैंकर पनामा या कुक आइलैंड्स जैसे देशों के “सुविधाजनक झंडों” (फ्लैग ऑफ कन्वीनियंस) का इस्तेमाल करते थे। इससे सख्त नियमों से बचाव तो होता था, लेकिन अमेरिकी नौसैनिक कार्रवाई के खिलाफ कोई ठोस सुरक्षा नहीं मिलती थी।
अब रूसी झंडा अपनाने से मामला और संवेदनशील हो गया है। ऐसे जहाजों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई किसी संप्रभु देश को सीधी चुनौती के रूप में देखी जा सकती है।
यूनाइटेड अगेंस्ट न्यूक्लियर ईरान के वरिष्ठ सलाहकार चार्ली ब्राउन ने जोखिमों की व्याख्या करते हुए कहा,
“यह अवैध डार्क फ्लीट नेटवर्क के लिए एक नया संभावित समाधान हो सकता है, लेकिन इससे जोखिम भी बढ़ जाते हैं। यह दिखाता है कि प्रतिबंधों से बचना अब केवल समुद्री अनुपालन की समस्या नहीं रहा, बल्कि राज्य संरक्षण और भू-राजनीतिक जोखिमों से जुड़ी एक रणनीतिक चुनौती बन गया है।”
हाल की एक घटना ने स्थिति की गंभीरता को दिखाया। अमेरिकी बलों द्वारा पीछा किए जाने के दौरान बेला 1 (बाद में मैरिनेरा नाम दिया गया) के चालक दल ने सुरक्षा का संकेत देने के लिए जहाज के ढांचे पर रूसी झंडा पेंट कर दिया। इस कदम और रूसी नौसैनिक सुरक्षा की खबरों के बावजूद, जहाज को आइसलैंड के पास रोक लिया गया।
रूस के लिए दीर्घकालिक जोखिम
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम भविष्य में मॉस्को के लिए समस्याएं खड़ी कर सकता है। इनमें से कई टैंकर पुराने, खराब रखरखाव वाले और अक्सर बिना बीमा के होते हैं। यदि इनके कारण दुर्घटना या तेल रिसाव होता है, तो झंडा राज्य होने के नाते जिम्मेदारी रूस पर आ सकती है।
प्रतिष्ठा को लेकर भी चिंता है। यदि प्रतिबंधों से बचने में शामिल अधिक जहाज रूसी झंडा फहराने लगते हैं, तो वैश्विक शिपिंग उद्योग में उस झंडे को अवैध गतिविधियों के संकेत के रूप में देखा जाने लग सकता है।
समय के साथ इससे रूस के व्यापारी बेड़े की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंच सकता है और अंतरराष्ट्रीय नियामकों की कड़ी निगरानी बढ़ सकती है।
