रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने सोमवार को संयुक्त राज्य अमेरिका की कड़ी आलोचना करते हुए उस पर भारत और अन्य प्रमुख साझेदारों के साथ रूस के संबंधों में हस्तक्षेप करने की कोशिश का आरोप लगाया। टीवी ब्रिक्स (TV BRICS) को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन व्यापार और सैन्य-तकनीकी सहयोग जैसे क्षेत्रों में रूस की साझेदारियों को आकार देने का प्रयास कर रहा है। उनके ये बयान ऐसे समय आए हैं, जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव बढ़ते जा रहे हैं।
लावरोव ने कहा कि अमेरिका रूस के महत्वपूर्ण रणनीतिक देशों के साथ संबंधों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। उनका दावा था कि अमेरिकी दबाव, एक बड़े एजेंडे के तहत, भारत के रक्षा और आर्थिक फैसलों पर भी असर डालता है।
उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन “भारत और अन्य ब्रिक्स देशों जैसे प्रमुख रणनीतिक साझेदारों के साथ हमारे व्यापार, निवेश सहयोग और सैन्य-तकनीकी संबंधों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है,” जिससे उनके अनुसार वैश्विक साझेदारियों में अमेरिका की बढ़ती दखलअंदाजी झलकती है।
अमेरिका की आर्थिक रणनीति की आलोचना
पश्चिमी देशों के साथ तनावपूर्ण संबंधों पर बात करते हुए लावरोव ने अमेरिका की कथित आर्थिक वर्चस्व की नीति की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिका भले ही सहयोग की बात करता हो, लेकिन उसके कदम कुछ और ही दर्शाते हैं।
उनके मुताबिक, ऊर्जा और व्यापार पर लगाए गए प्रतिबंधों और पाबंदियों का कई देशों पर गहरा असर पड़ा है।
उन्होंने कहा, “व्यवहार में हालांकि इसके उलट होता है—नए प्रतिबंध लगाए जाते हैं, संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन का उल्लंघन करते हुए अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में टैंकरों पर हमले किए जाते हैं, और भारत व अन्य साझेदारों को सस्ती रूसी ऊर्जा खरीदने से हतोत्साहित किया जाता है।”
लावरोव ने इन कदमों को वैश्विक संबंधों को अपने हिसाब से ढालने और रूस के प्रभाव को कम करने के लिए वॉशिंगटन की व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया, खासकर ब्रिक्स जैसे मंचों में। उन्होंने कहा, “इस प्रकार आर्थिक क्षेत्र में अमेरिका ने वस्तुतः आर्थिक वर्चस्व का लक्ष्य घोषित कर दिया है,” और जोड़ा कि रूस अपने साझेदारों के साथ सहयोग मजबूत करने के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाश रहा है।
भारत-रूस रणनीतिक संबंधों पर जोर
लावरोव की टिप्पणियों में भारत के साथ रूस की लंबे समय से चली आ रही साझेदारी पर भी जोर दिया गया। मॉस्को ने अक्सर भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और रूस के साथ उसके ऐतिहासिक रूप से मजबूत संबंधों को स्वीकार किया है। यह रुख तब भी बना हुआ है, जब भारत पश्चिमी देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है।
रूस ने यह भी कहा है कि भारत के अमेरिका या किसी अन्य देश के साथ संबंध उसके और नई दिल्ली के बीच रिश्तों को प्रभावित या परिभाषित नहीं करते।
