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ट्रंप की ग्रीनलैंड संबंधी धमकियों के चलते यूरोपीय संघ ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौता स्थगित किया
ग्रीनलैंड को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों से ब्रसेल्स में गंभीर चिंताएं पैदा होने के बाद यूरोपीय संसद ने अमेरिका–ईयू व्यापार समझौते को स्थगित कर दिया।

यूरोपीय संसद ने अमेरिका–यूरोपीय संघ (US–EU) व्यापार समझौते को फिलहाल रोक दिया है। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा डेनमार्क के क्षेत्र ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेने की बार-बार दी गई धमकियों के बाद उठाया गया।

संसद की व्यापार समिति को 26–27 जनवरी को इस समझौते पर अपना रुख तय करना था, लेकिन अब मतदान स्थगित कर दिया गया है।

ट्रंप की टिप्पणियों से अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों में तनाव बढ़ गया है। 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ ने इसे अपनी संप्रभुता के लिए खतरा मानते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

टैरिफ धमकियों से कार्रवाई

यह व्यापार समझौता ग्रीनलैंड विवाद में उलझ गया। ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि अमेरिका द्वीप नहीं खरीद सका तो वह कई यूरोपीय देशों पर शुल्क (टैरिफ) लगाएंगे।

बुधवार को उन्होंने इन टैरिफ धमकियों को वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि आर्कटिक सुरक्षा पर नाटो नेताओं के साथ “भविष्य के समझौते का एक ढांचा” तय हुआ है। इसके बाद अमेरिका ने आठ यूरोपीय देशों पर प्रस्तावित शुल्क हटा दिए।

फिर भी, पहले दी गई चेतावनियों ने यूरोपीय सांसदों को पिछले जुलाई में हुए व्यापार समझौते पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया।

समझौते में क्या प्रस्ताव है

समझौते के तहत, यूरोपीय संघ के अधिकांश निर्यातों पर अमेरिका में 15 प्रतिशत शुल्क लगेगा। इसके बदले में, यूरोपीय संघ अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और कुछ कृषि उत्पादों पर सभी शुल्क हटा देगा।

दोनों पक्ष समझौते के कुछ हिस्सों को पहले ही लागू कर चुके हैं। हालांकि, इसे अंतिम रूप देने के लिए यूरोपीय संसद की मंजूरी अभी आवश्यक है।

व्यापार समिति ने संप्रभुता का हवाला दिया

यूरोपीय संसद की व्यापार समिति के अध्यक्ष बेर्न्ड लैंगे ने फैसले को स्पष्ट किया।

उन्होंने कहा, “किसी ईयू सदस्य देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को धमकाकर और टैरिफ को दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करके, अमेरिका ईयू–अमेरिका व्यापार संबंधों की स्थिरता और पूर्वानुमेयता को कमजोर कर रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमें इस समझौते पर काम रोकने के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ा गया है, जब तक कि अमेरिका टकराव के बजाय सहयोग के रास्ते पर फिर से जुड़ने का फैसला नहीं करता।”

संसद नेताओं की चेतावनी

यूरोपीय पीपुल्स पार्टी के प्रमुख मैनफ्रेड वेबर ने कहा कि भरोसा सबसे पहले आना चाहिए। उन्होंने कहा, “ईपीपी के लिए, और मुझे लगता है सभी सांसदों के लिए, यह साफ है कि जब तक विश्वसनीयता का सवाल स्पष्ट नहीं हो जाता, तब तक न तो इस समझौते की पुष्टि होगी और न ही अमेरिकी उत्पादों को यूरोपीय संघ में शून्य प्रतिशत टैरिफ की सुविधा मिलेगी।”

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भी कड़ा संदेश दिया। उन्होंने सांसदों से कहा, “यूरोप संवाद और समाधान को प्राथमिकता देता है, लेकिन यदि जरूरत पड़ी तो हम एकजुटता, तात्कालिकता और दृढ़ संकल्प के साथ कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”

असंतुलित समझौते की जांच

कई यूरोपीय सांसदों का कहना है कि यह समझौता अमेरिका के पक्ष में है। यूरोपीय संघ अधिकांश आयात शुल्क घटाएगा, जबकि अमेरिका 15 प्रतिशत का व्यापक शुल्क बनाए रखेगा।

इन चिंताओं के बावजूद, पहले कई सांसद इसे स्वीकार करने के संकेत दे चुके थे। वे सुरक्षा उपाय चाहते थे, जिनमें 18 महीने की ‘सनसेट क्लॉज’ और अमेरिकी आयात में संभावित बढ़ोतरी को नियंत्रित करने के उपाय शामिल थे।

फिलहाल, ग्रीनलैंड विवाद के कारण यह समझौता ठप पड़ गया है।