अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए भविष्य में होने वाले एक समझौते का “ढांचा” अब तैयार हो गया है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि जो यूरोपीय देश ग्रीनलैंड खरीदने के उनके प्रस्ताव का विरोध कर रहे थे, उन पर लगाए जाने वाले प्रस्तावित शुल्क (टैरिफ) वह हटा लेंगे।
ट्रंप ने नाटो महासचिव मार्क रुटे से मुलाकात के बाद ट्रुथ सोशल पर यह जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि बातचीत में ग्रीनलैंड और व्यापक आर्कटिक क्षेत्र से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
ट्रंप ने लिखा, “नाटो के महासचिव मार्क रुटे के साथ मेरी बेहद सकारात्मक बैठक के आधार पर हमने ग्रीनलैंड और वास्तव में पूरे आर्कटिक क्षेत्र के संबंध में भविष्य के एक समझौते का ढांचा तैयार कर लिया है। यदि यह समाधान अमल में आता है, तो यह संयुक्त राज्य अमेरिका और सभी नाटो देशों के लिए बेहद लाभकारी होगा।”
प्रमुख अमेरिकी अधिकारी करेंगे बातचीत का नेतृत्व
ट्रंप ने कहा कि चर्चाएं जारी हैं और इनमें ‘गोल्डन डोम’ से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि उनके प्रशासन की ओर से वरिष्ठ अधिकारी वार्ताओं का नेतृत्व करेंगे।
ट्रंप के अनुसार, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ इस बातचीत को संभालने वाली टीम का हिस्सा होंगे।
यूरोप पर लगाए जाने वाले टैरिफ हटाए गए
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वह 1 फरवरी से लगाए जाने वाले 25 प्रतिशत तक के टैरिफ को रद्द कर देंगे, जिनकी उन्होंने पहले धमकी दी थी। ये टैरिफ डेनमार्क और उसके कई यूरोपीय सहयोगियों को निशाना बनाकर लगाए जाने वाले थे।
प्रभावित देशों में ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी शामिल थे, जिन्होंने डेनमार्क के समर्थन में ग्रीनलैंड में अपने सैनिक भेजे थे। ट्रंप ने कहा कि अब ये टैरिफ लागू नहीं किए जाएंगे।
बल प्रयोग की संभावना से ट्रंप का इनकार
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले के उन बयानों से भी पीछे हटते हुए कहा कि वह ग्रीनलैंड को अमेरिकी नियंत्रण में लाने के लिए सैन्य बल का इस्तेमाल नहीं करेंगे। दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में बोलते हुए उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट की।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “संयुक्त राज्य अमेरिका को शायद कुछ भी नहीं मिलेगा, जब तक कि मैं अत्यधिक ताकत और बल का इस्तेमाल करने का फैसला न करूं, जिसमें हम सच कहें तो अजेय होंगे।”
उन्होंने आगे कहा, “लेकिन मैं ऐसा नहीं करूंगा। यह शायद मेरा सबसे बड़ा बयान है, क्योंकि लोगों को लगा था कि मैं बल का इस्तेमाल करूंगा। मुझे बल का इस्तेमाल करने की ज़रूरत नहीं है। मैं बल का इस्तेमाल नहीं करना चाहता। मैं बल का इस्तेमाल नहीं करूंगा।”
‘अंतिम दीर्घकालिक समझौता’
जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका को ग्रीनलैंड पर संप्रभुता मिलेगी, तो ट्रंप पहले झिझके। बाद में उन्होंने इसे एक दीर्घकालिक व्यवस्था बताया।
उन्होंने कहा, “यह अंतिम दीर्घकालिक समझौता है।”
ट्रंप ने सुरक्षा और आर्थिक लाभों पर भी जोर दिया, जिनमें संसाधनों तक पहुंच शामिल है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह सभी को एक बेहद अच्छी स्थिति में रखता है, खासकर सुरक्षा, खनिजों और अन्य सभी पहलुओं के संदर्भ में।”
उन्होंने आगे कहा, “यह ऐसा समझौता है, जिसे लोगों ने तुरंत स्वीकार किया—अमेरिका के लिए बेहद शानदार, और हमें वह सब कुछ मिला जो हम चाहते थे।”
नाटो प्रमुख ने संप्रभुता संबंधी बातचीत को खारिज किया
नाटो महासचिव मार्क रुटे ने बाद में कहा कि ट्रंप के साथ उनकी बैठक में ग्रीनलैंड की संप्रभुता पर चर्चा नहीं हुई। ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है।
फॉक्स न्यूज के ‘स्पेशल रिपोर्ट विद ब्रेट बेयर’ कार्यक्रम में दिए गए एक टेलीविजन इंटरव्यू में रुटे ने प्रस्तावित “ढांचे” के बारे में सीमित जानकारी दी।
उन्होंने कहा, “हमारे बीच इन मुद्दों पर वास्तव में काम शुरू करने को लेकर एक अच्छी सहमति बनी है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी अंतिम समझौते तक पहुंचने से पहले अभी काफी काम किया जाना बाकी है।
