उत्तर कोरिया ने मंगलवार को जापान के उन प्रयासों की कड़ी आलोचना की, जिनके तहत वह ऐसी सैन्य क्षमताओं को विकसित कर रहा है, जो उसे पहले से हमला करने में सक्षम बना सकती हैं। प्योंगयांग ने अमेरिका और जापान के बीच हाल ही में हुए संयुक्त सैन्य अभ्यासों की भी निंदा की। उसने चेतावनी दी कि इस तरह की गतिविधियां पूरे क्षेत्र में बढ़ते तनाव के एक "दुष्चक्र" को जन्म दे सकती हैं।
सरकारी समाचार एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में उत्तर कोरिया के एक सैन्य टिप्पणीकार ने अमेरिका के साथ सैन्य अभ्यास के दौरान जापान द्वारा नई लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइल लॉन्चर तैनात करने के फैसले की आलोचना की।
यह तैनाती 'कीन स्वॉर्ड' (Keen Sword) नामक संयुक्त सैन्य अभ्यास के दौरान की गई, जो 19 से 29 अक्टूबर तक जापान के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित हुआ था।
जापान द्वारा लंबी दूरी की मिसाइलों की तैनाती पर उत्तर कोरिया ने उठाए सवाल
उत्तर कोरियाई टिप्पणीकार ने विशेष रूप से सैन्य अभ्यास के दौरान जापान द्वारा टाइप-25 सतह से जहाज पर मार करने वाली गाइडेड मिसाइल लॉन्चर की तैनाती पर चिंता जताई।
इस मिसाइल प्रणाली की मारक क्षमता 1,000 किलोमीटर से अधिक है। इसका विकास और तैनाती जापान की उन व्यापक कोशिशों का हिस्सा है, जिनके तहत वह संभावित दुश्मन देशों के हमलों का जवाब देने के लिए अपनी "काउंटर-स्ट्राइक" (जवाबी हमले) की क्षमता को मजबूत कर रहा है।
उत्तर कोरिया ने आरोप लगाया कि टोक्यो अपनी पारंपरिक शांतिवादी नीति से दूर जा रहा है और तेजी से अधिक आक्रामक सैन्य रुख अपना रहा है।
टिप्पणीकार ने कहा, "जापान एक पराजित राष्ट्र है, जो 'शांतिवादी देश' का मुखौटा उतारकर खुद को युद्ध लड़ने वाले देश में बदलने की प्रक्रिया तेज कर रहा है। वह पहले हमला करने की क्षमता हासिल करने के अपने प्रयासों को लगातार जारी रखे हुए है।"
बयान में कीन स्वॉर्ड सैन्य अभ्यास के दौरान किए गए मिसाइल लॉन्च सिमुलेशन की भी आलोचना की गई। टिप्पणीकार ने कहा, "इसका ताजा उदाहरण ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज के टाइप-25 सतह से जहाज पर मार करने वाले गाइडेड मिसाइल लॉन्चर की अब तक के सबसे बड़े संयुक्त सैन्य अभ्यास कीन स्वॉर्ड में भागीदारी है।"
प्योंगयांग का दावा- सैन्य अभ्यास का निशाना उत्तर कोरिया और चीन थे
उत्तर कोरिया ने आरोप लगाया कि संयुक्त सैन्य अभ्यास के दौरान जापान ने मिसाइल से जुड़ी गतिविधियों के उद्देश्य को छिपाने की कोई खास कोशिश नहीं की। उत्तर कोरियाई टिप्पणीकार के अनुसार, इस सिमुलेशन का उद्देश्य यह जांचना था कि जापान अपने आक्रामक हथियार प्रणालियों को कितनी तेजी से तैनात कर सकता है।
प्योंगयांग ने दावा किया कि इस सैन्य अभ्यास में उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जो उत्तर कोरिया और चीन की मिसाइलों की मारक दूरी के भीतर आते हैं। बयान में संकेत दिया गया कि जापान की बढ़ती मिसाइल क्षमता उसके पड़ोसी देशों की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा पैदा कर सकती है।
जापान के हालिया मिसाइल परीक्षणों की भी हुई आलोचना
उत्तर कोरिया की इस टिप्पणी में इस साल की शुरुआत में जापान द्वारा की गई अन्य मिसाइल संबंधी गतिविधियों का भी जिक्र किया गया। इनमें टाइप-88 एंटी-शिप मिसाइल का प्रक्षेपण और टॉमहॉक क्रूज मिसाइल का परीक्षण शामिल था।
प्योंगयांग का तर्क था कि ये घटनाक्रम दर्शाते हैं कि टोक्यो पड़ोसी देशों के खिलाफ पहले हमला करने की क्षमता हासिल करने के लिए तेजी से प्रयास कर रहा है। उत्तर कोरिया ने जापान के सैन्य विस्तार को लगातार "अधिक कट्टर, खुला और नियमित" बताया। उसका कहना था कि जापान अब अपनी पारंपरिक रक्षात्मक सैन्य नीति से आगे बढ़ रहा है।
उत्तर कोरिया ने सैन्य रणनीति में खतरनाक बदलाव की दी चेतावनी
उत्तर कोरिया ने आगे दावा किया कि जापान ने रक्षा पर केंद्रित सैन्य व्यवस्था से आक्रामक सैन्य अभियान चलाने में सक्षम व्यवस्था की ओर अपना बदलाव लगभग पूरा कर लिया है। टिप्पणीकार ने चेतावनी दी कि जापान की बढ़ती सैन्य महत्वाकांक्षाएं पूर्वी एशिया की पहले से ही संवेदनशील सुरक्षा स्थिति को और खराब कर सकती हैं।
टिप्पणीकार ने कहा, "पहले हमला करने की क्षमता हासिल करने के लिए जापान की नव-सैन्यवादी ताकतों के प्रयास... क्षेत्र में तनाव बढ़ने के दुष्चक्र को जन्म देने वाले कैंसर जैसे कारक हैं।"
प्योंगयांग की यह ताजा आलोचना जापान की बढ़ती रक्षा क्षमताओं और अमेरिका के साथ उसके गहरे होते सैन्य सहयोग को लेकर उत्तर कोरिया की बढ़ती चिंताओं को उजागर करती है। यह उत्तर कोरिया, जापान और उनके क्षेत्रीय सहयोगियों के बीच लगातार बने हुए सुरक्षा तनाव को भी दर्शाती है।
