पेंटागन ने नए क्लिनिकल दिशानिर्देश लागू किए हैं, जिनके तहत 30 वर्ष और उससे अधिक उम्र के सक्रिय ड्यूटी तथा रिजर्व सैन्य कर्मियों की टेस्टोस्टेरोन की कमी की जांच अनिवार्य होगी। रॉयटर्स के अनुसार, यह नीति तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।
यह कदम रक्षा मंत्री
पीट हेगसेथ द्वारा जुलाई में घोषित एक आदेश के बाद उठाया गया है। पेंटागन का कहना है कि इसका मुख्य उद्देश्य हार्मोन संबंधी समस्याओं, थकान और सैन्यकर्मियों में कम ऊर्जा से जुड़ी परेशानियों का पता लगाकर उनका समाधान करना तथा सैन्य तैयारियों में सुधार करना है।
पुरुष सैनिकों की हर साल होगी टेस्टोस्टेरोन जांच
नई नीति के तहत 30 वर्ष और उससे अधिक उम्र के पुरुष सैन्यकर्मियों की हर साल रक्त जांच के जरिए टेस्टोस्टेरोन की कमी की जांच की जाएगी। यह जांच उनकी नियमित चिकित्सा जांच का हिस्सा होगी।
30 वर्ष से कम उम्र के पुरुषों के लिए नियमित टेस्टोस्टेरोन जांच अनिवार्य नहीं होगी। हालांकि, यदि उन्हें किसी तरह की चिंता हो तो वे जांच का अनुरोध कर सकते हैं। इसके अलावा, यदि किसी कम उम्र के सैन्यकर्मी में ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं जो कम टेस्टोस्टेरोन की ओर संकेत करते हैं, तो डॉक्टर भी जांच कराने का आदेश दे सकते हैं।
पेंटागन ने महिला सैन्यकर्मियों के लिए अलग तरीका अपनाया है। सेना में महिलाओं के लिए नियमित टेस्टोस्टेरोन रक्त जांच अनिवार्य नहीं होगी। इसके बजाय, स्वास्थ्यकर्मी ऐसे लक्षणों का आकलन करेंगे जो हार्मोन संबंधी समस्याओं या शरीर में पर्याप्त ऊर्जा उपलब्ध न होने का संकेत दे सकते हैं।
इन लक्षणों में लगातार थकान तथा मासिक धर्म चक्र में बदलाव या अनियमितता शामिल हो सकती है। दिशानिर्देश डॉक्टरों को कुछ ऐसी महिलाओं के लिए टेस्टोस्टेरोन उपचार संबंधी मार्गदर्शन भी देते हैं, जो मेनोपॉज के बाद की अवस्था में हैं। कुछ विशेष परिस्थितियों में टेस्टोस्टेरोन को ऑफ-लेबल आधार पर दिया जा सकता है, खासकर उन महिलाओं में जिनकी यौन इच्छा असामान्य रूप से कम हो।
हेगसेथ का कहना है कि हार्मोन स्वास्थ्य का तैयारियों से संबंध है
नई नीति अमेरिकी सैन्यकर्मियों की शारीरिक स्थिति और परिचालन तैयारियों पर हेगसेथ के व्यापक फोकस का हिस्सा है। रक्षा मंत्री ने टेस्टोस्टेरोन जांच को ऐसी स्वास्थ्य समस्याओं का पता लगाने के एक तरीके के रूप में बढ़ावा दिया है, जो सैन्यकर्मियों के प्रदर्शन और लंबे समय तक सैन्य तैयारियों को प्रभावित कर सकती हैं।
पेंटागन ने ऐसे सैन्यकर्मियों में हार्मोन और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी चिंताओं की ओर भी इशारा किया है, जो शारीरिक रूप से कठिन और अत्यधिक तनावपूर्ण वातावरण में काम करते हैं।
सामान्य जांच और उपचार संबंधी दिशानिर्देश लागू करके सेना का लक्ष्य सशस्त्र बलों में टेस्टोस्टेरोन से जुड़ी समस्याओं की पहचान और उनके प्रबंधन के लिए एक अधिक एकरूप व्यवस्था तैयार करना है।
चिकित्सा विशेषज्ञों ने जताई चिंता
इस फैसले की कुछ चिकित्सा पेशेवरों ने आलोचना भी की है। विशेषज्ञों ने सवाल उठाया है कि क्या ऐसे सैन्यकर्मियों, जो अन्यथा स्वस्थ हैं, की बड़ी संख्या में नियमित रूप से टेस्टोस्टेरोन की कमी की जांच करना पर्याप्त चिकित्सा प्रमाणों पर आधारित है।
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि व्यापक स्तर पर की जाने वाली जांच से ऐसे लोगों में भी टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम पाया जा सकता है, जिन्हें उपचार की आवश्यकता नहीं है। उनका कहना है कि किसी भी उपचार की सलाह देने से पहले जांच के परिणामों को लक्षणों, मेडिकल इतिहास और अन्य चिकित्सकीय कारकों के साथ मिलाकर देखा जाना चाहिए।
अनावश्यक टेस्टोस्टेरोन थेरेपी से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी हो सकते हैं। इनमें बांझपन और अन्य संभावित दुष्प्रभाव शामिल हैं, खासकर तब जब उपचार की कोई स्पष्ट चिकित्सकीय आवश्यकता न हो।
FDA टेस्टोस्टेरोन उपचार की करेगी समीक्षा
यह बहस ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) सितंबर में एक विशेषज्ञ बैठक आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। इस बैठक में टेस्टोस्टेरोन के चिकित्सकीय उपयोग और उससे जुड़े मुद्दों की समीक्षा किए जाने की उम्मीद है।
इस चर्चा से टेस्टोस्टेरोन की कमी का निदान और उसका उपचार किस तरह किया जाना चाहिए, इस पर और अधिक जांच-पड़ताल हो सकती है। यह खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि पेंटागन अमेरिकी सेना में अपनी नई टेस्टोस्टेरोन जांच नीति लागू करना शुरू कर रहा है।