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नेपाल में फ्लैश फ्लड से 165 लोगों की मौत, सैकड़ों लापता; बचाव अभियान जारी
नेपाल में विनाशकारी अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) के कारण 165 लोगों की मौत हो गई है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। बचाव दल जीवित बचे लोगों की तलाश में अभियान चला रहे हैं और भारत ने नेपाल के लिए आपातकालीन सहायता भेजी है।
नेपाल हाल के वर्षों की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना कर रहा है। विनाशकारी अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण कम से कम 165 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक भी शामिल हैं। गुरुवार को नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास के इलाकों में बचाव दलों ने अपना अभियान जारी रखा। टीमें जीवित बचे लोगों और लापता लोगों की तलाश में मोटी कीचड़, मलबे और गाद को हटाकर खोजबीन कर रही हैं। बाढ़ के पानी ने कई बहुमंजिला इमारतों की निचली मंजिलों को भी मिट्टी और मलबे में दबा दिया है, जिससे बचाव अभियान और मुश्किल हो गया है।

सैकड़ों लोग अब भी लापता

नेपाल के आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ के बाद 823 लोग अब भी संपर्क से बाहर हैं। इनमें स्थानीय निवासी और विदेशी नागरिक दोनों शामिल हैं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया कि आपदा के बाद करीब 300 भारतीय पर्यटक लापता हैं। अधिकारियों के अनुसार, लापता विदेशी नागरिकों में 133 भारतीय भी शामिल हैं। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, मलेशिया, नीदरलैंड्स, पुर्तगाल, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया और अमेरिका के नागरिक भी लापता बताए गए हैं। बचावकर्मी उन इलाकों तक पहुंच रहे हैं, जो बाढ़ और भूस्खलन के कारण कट गए थे। इन क्षेत्रों तक पहुंचने के साथ ही मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

ग्लेशियर टूटने से हुई तबाही

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, इस आपदा का संबंध भूकंप के बजाय ग्लेशियर के टूटने से था, जैसा कि शुरुआत में आशंका जताई गई थी। एजेंसी ने बताया कि शुरुआत में भूकंपीय गतिविधि को भूकंप माना गया था। हालांकि, बाद के आकलन में पता चला कि यह “ग्लेशियर के टूटने और मलबे के तेज बहाव” के कारण हुआ, जिसने आगे चलकर निचले इलाकों में विनाशकारी प्रभाव पैदा किया। इस घटना के कारण नेपाल और तिब्बत के कुछ हिस्सों में भीषण बाढ़ और मलबे का प्रवाह हुआ। शुरुआती रिपोर्टों में आशंका जताई गई थी कि भूकंप के कारण हिमस्खलन हुआ होगा और इसके बाद विनाशकारी बाढ़ आई। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भी इस संभावना का उल्लेख किया था।

भारत ने भेजी आपातकालीन सहायता

भारत ने आपदा के बाद नेपाल की मदद के लिए मानवीय सहायता भेजी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारत ने आवश्यक दवाओं के साथ 10 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) सामग्री भेजी है। इस सहायता का उद्देश्य नेपाल के आपातकालीन राहत और बचाव अभियानों में सहयोग करना है। बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के प्रभावित होने के कारण भारत स्थिति पर लगातार नजर भी रख रहा है।

बिहार और उत्तर प्रदेश में हाई अलर्ट

नेपाल में आई बाढ़ के बाद भारत में भी अधिकारियों ने बिहार और उत्तर प्रदेश में एहतियाती कदम उठाए हैं। बुधवार को दोनों राज्यों को हाई अलर्ट पर रखा गया। नेपाल से आने वाले बाढ़ के पानी के कारण गंडक नदी बेसिन के आसपास के कई जिलों में नुकसान हुआ है। अधिकारियों ने संवेदनशील इलाकों में तैयारियां शुरू कर दी हैं और उन स्थानों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना शुरू किया है, जहां जलस्तर बढ़ने का खतरा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात कर स्थिति की समीक्षा की। इस दौरान नेपाल में बाढ़ के कारण नदियों के जलस्तर में संभावित बढ़ोतरी पर चर्चा हुई। शाह ने कहा कि सीमा से लगे उन इलाकों में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) को स्थानीय प्रशासन तथा राहत एवं बचाव दलों के साथ हाई अलर्ट पर रखा गया है, जहां बाढ़ का असर पड़ सकता है।

अमेरिका ने आपातकालीन सहायता की घोषणा की

अमेरिका ने भी नेपाल में हुई इस घातक आपदा के बाद समर्थन जताया है। अमेरिकी सरकार ने प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए 5 लाख डॉलर की आपातकालीन सहायता देने की घोषणा की है। यह जानकारी अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से दी गई। इस बीच, नेपाल में बचाव दलों का मुख्य ध्यान जीवित बचे लोगों को खोजने और अब भी लापता लोगों का पता लगाने पर है। तबाही का व्यापक स्तर और दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र राहत एवं बचाव कार्यों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।