प्रीति पवार ने ग्लासगो में महिलाओं की 54 किग्रा स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीतकर राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत का शानदार बॉक्सिंग अभियान जारी रखा। युवा भारतीय मुक्केबाज ने फाइनल मुकाबले में आत्मविश्वास भरे प्रदर्शन के साथ स्कारलेट डेलगाडो को हराया और भारत को इन खेलों का छठा स्वर्ण पदक दिलाया। यह जीत प्रीति के बढ़ते करियर की एक और बड़ी उपलब्धि साबित हुई और इससे भारत की पदक तालिका भी मजबूत हुई।
प्रीति ने स्वर्ण पदक मुकाबले में दबदबा बनाया
सेमीफाइनल में शानदार प्रदर्शन के बाद प्रीति मजबूत आत्मविश्वास के साथ फाइनल में उतरीं। उन्होंने खिताबी मुकाबले में भी उसी लय को जारी रखा और शुरुआती राउंड से ही मुकाबले पर नियंत्रण बनाए रखा।
तेज फुटवर्क, सटीक पंच संयोजन और मजबूत डिफेंस के साथ प्रीति ने पूरे मुकाबले में स्कारलेट डेलगाडो पर लगातार दबाव बनाए रखा।
उनकी अनुशासित रणनीति ने उन्हें लगातार अंक हासिल करने में मदद की और उन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी को ज्यादा मौके नहीं दिए। जजों के स्कोरकार्ड में बढ़त बनाए रखते हुए उन्होंने आसानी से राष्ट्रमंडल खेलों का खिताब अपने नाम कर लिया।
भारतीय बॉक्सिंग की उभरती हुई सितारा
स्वर्ण पदक ने प्रीति पवार को भारत की सबसे होनहार युवा मुक्केबाजों में से एक के रूप में और स्थापित कर दिया है। पूरे टूर्नामेंट में उनके लगातार शानदार प्रदर्शन ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनकी तकनीकी क्षमता, आत्मविश्वास और परिपक्वता को दर्शाया।
राष्ट्रमंडल खेलों का खिताब जीतना उनके करियर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिससे आगामी वैश्विक प्रतियोगिताओं से पहले उनका आत्मविश्वास और बढ़ने की उम्मीद है।
भारत का बॉक्सिंग में दबदबा जारी
प्रीति की सफलता ने ग्लासगो में भारत के शानदार बॉक्सिंग अभियान में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया। कई भारतीय मुक्केबाज फाइनल तक पहुंचे और पदक जीतने वाले प्रदर्शन किए, जिससे इस खेल में भारत की बढ़ती ताकत का पता चलता है।
उनके स्वर्ण पदक ने भारत के पूरे अभियान को नई ऊर्जा दी, क्योंकि भारतीय दल राष्ट्रमंडल खेल 2026 में मजबूत प्रदर्शन के साथ समापन की ओर बढ़ रहा है। एक और चैंपियन के उभरने के साथ भारतीय बॉक्सिंग टीम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ मुकाबला करने में सक्षम है।
