कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में
इबोला का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। गुरुवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में अब तक 1,155 पुष्ट मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें 304 लोगों की मौत हो चुकी है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि वायरस देश के पूर्वी हिस्सों में लगातार फैल रहा है, जबकि बच्चे इस प्रकोप के सबसे अधिक संवेदनशील पीड़ितों में शामिल हैं।
नए मामलों में लगातार बढ़ोतरी
ताजा स्थिति रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले 24 घंटों के दौरान स्वास्थ्य अधिकारियों ने इबोला के 37 नए मामलों और पांच नई मौतों की पुष्टि की। अधिकारियों ने कहा कि महामारी विज्ञान संबंधी और प्रयोगशाला निगरानी को मजबूत किए जाने से संक्रमण का पहले पता लगाने में मदद मिली है। हालांकि, बेहतर निगरानी से यह भी पुष्टि हुई है कि सामुदायिक स्तर पर संक्रमण का प्रसार सप्ताह-दर-सप्ताह बढ़ता जा रहा है।
यूनिसेफ ने बच्चों पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर चेतावनी दी
यूनिसेफ ने कहा कि इस प्रकोप के कारण कई बच्चे अपने माता-पिता के बिना रह गए हैं और वे भय तथा गलत सूचनाओं के बीच जीने को मजबूर हैं। यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसेल ने कहा, “हमारी इतुरी में मौजूद टीमों ने ऐसे बच्चों से मुलाकात की है जिन्होंने इबोला के कारण अपनी माताओं को खो दिया है और कुछ मामलों में अपने दोनों माता-पिता को भी खो दिया है। बच्चे अफवाहों और ऑनलाइन फैली गलत जानकारियों से घिरे होने के बावजूद इस खतरे को समझने की कोशिश कर रहे हैं।”
मानवीय संकट गहराने के साथ राहतकर्मी प्रभावित परिवारों को लगातार सहायता प्रदान कर रहे हैं।
बच्चों पर सबसे अधिक खतरा
पूर्वी डीआरसी में इबोला के कुल पुष्ट मामलों में लगभग 15 प्रतिशत बच्चे और किशोर हैं। हालांकि, 19 जून तक दर्ज कुल पुष्ट मौतों में उनकी हिस्सेदारी 25 प्रतिशत से अधिक है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि जिन बच्चों में इबोला संक्रमण की पुष्टि हुई है, उनके संक्रमित वयस्कों की तुलना में मृत्यु की आशंका लगभग दोगुनी है। ये आंकड़े कम उम्र के लोगों पर इस प्रकोप के गंभीर प्रभाव को उजागर करते हैं।
बीमारी के अलावा, कई बच्चों ने अपने माता-पिता या देखभाल करने वालों को खो दिया है। अन्य बच्चों को सामाजिक कलंक, भावनात्मक आघात और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी कि संक्रामक रोगों के प्रकोप के दौरान महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा, जिसमें यौन हिंसा भी शामिल है, का खतरा अक्सर बढ़ जाता है।
युगांडा में भी इबोला के मामले सामने आए
यह प्रकोप सीमा पार कर युगांडा तक भी फैल गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने पुष्टि की है कि डीआरसी से जांच और उपचार के लिए युगांडा पहुंचे लोगों में इबोला के 20 मामलों और दो मौतों की पुष्टि हुई है।
युगांडा में भी बच्चे इस संक्रमण से प्रभावित हुए हैं। एक बच्चे में इबोला संक्रमण की पुष्टि हुई है, जबकि 19 अन्य बच्चों को स्वास्थ्य अधिकारी उनकी स्थिति की निगरानी करते हुए क्वारंटीन में रखे हुए हैं।
यूनिसेफ ने अधिक फंडिंग की अपील की
यूनिसेफ पूरे क्षेत्र में छह महीने तक चलने वाली अपनी इबोला प्रतिक्रिया योजना के समर्थन के लिए 7.07 करोड़ डॉलर की सहायता राशि की मांग कर रहा है। एजेंसी ने कहा कि उसे अब भी लगभग 2 करोड़ डॉलर की वित्तीय कमी का सामना करना पड़ रहा है। यह राशि बहु-भागीदार इबोला तैयारी एवं प्रतिक्रिया महाद्वीपीय योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य इस प्रकोप को नियंत्रित करना और इस घातक बीमारी के आगे प्रसार को रोकना है।
स्वास्थ्य अधिकारी मध्य अफ्रीका में इबोला के और अधिक फैलाव को रोकने के लिए निगरानी, उपचार और सामुदायिक जागरूकता प्रयासों को लगातार मजबूत कर रहे हैं।