संयुक्त राज्य अमेरिका ने बुधवार को घोषणा की कि वॉशिंगटन डीसी में उच्चस्तरीय कूटनीतिक वार्ता के बाद इज़राइल और लेबनान युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं। यह घोषणा ऐसे समय में हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को घरेलू राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ा, क्योंकि अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ईरान को लेकर उनकी सैन्य शक्तियों को सीमित करने के उद्देश्य से एक प्रस्ताव पारित किया।
एक संयुक्त बयान में अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि “इज़राइल और लेबनान युद्धविराम लागू करने पर सहमत हो गए हैं”, हालांकि यह कुछ विशेष सुरक्षा शर्तों पर आधारित होगा।
सुरक्षा शर्तों से जुड़ा युद्धविराम
बयान के अनुसार, यह समझौता “हिज़्बुल्लाह की ओर से पूरी तरह गोलीबारी बंद करने और दक्षिण लितानी सेक्टर से सभी हिज़्बुल्लाह लड़ाकों की निकासी” पर निर्भर करेगा। दोनों देशों ने ऐसे पायलट क्षेत्रों की स्थापना की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने पर भी सहमति जताई, जहां लेबनानी सशस्त्र बलों का पूर्ण नियंत्रण होगा।
बयान में कहा गया कि इन क्षेत्रों में “सभी गैर-राज्य तत्वों को बाहर रखा जाएगा”, यानी सरकार के नियंत्रण से बाहर किसी भी सशस्त्र समूह को वहां गतिविधि की अनुमति नहीं होगी।
संप्रभुता और सुरक्षा पर जोर
नया ढांचा सीमा के दोनों ओर सुरक्षा और स्थिरता मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। बयान के अनुसार, इसका लक्ष्य “लेबनान और इज़राइल की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता को स्थायी रूप से सुनिश्चित करना” है।
इस उद्देश्य को हासिल करने के लिए दोनों पक्षों ने “गैर-राज्य सशस्त्र समूहों को खत्म करने और उनकी दोबारा वापसी रोकने” की आवश्यकता पर सहमति जताई।
अमेरिका ने लेबनानी सेना को समर्थन जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। बयान में कहा गया कि वॉशिंगटन लेबनानी सशस्त्र बलों को मजबूत करने और पूरे देश में सरकारी अधिकार लागू करने की उनकी क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा।
इस महीने आगे और वार्ता होगी
समझौते के अगले चरण के तहत इज़राइल और लेबनान 22 जून वाले सप्ताह में राजनीतिक और सुरक्षा वार्ता फिर शुरू करेंगे। दोनों देशों को उम्मीद है कि यह बातचीत एक व्यापक और अधिक समग्र समझौते की दिशा में आगे बढ़ेगी।
अमेरिका ने कहा कि वह पूरी प्रक्रिया के दौरान दोनों देशों के बीच संवाद को सुगम बनाने का काम जारी रखेगा।
पहले के युद्धविराम हिंसा रोकने में नाकाम रहे
इज़राइल और लेबनान इससे पहले अप्रैल में युद्धविराम पर सहमत हुए थे और बाद में इसे मई तक बढ़ाया गया था। हालांकि, इन समझौतों के बावजूद झड़पें और सैन्य अभियान जारी रहे।
बुधवार को इज़राइली हमलों में दक्षिणी लेबनान में कम से कम छह लोगों की मौत की खबर सामने आई। एक हमला बेरूत के दक्षिण में एक वाहन को भी निशाना बनाकर किया गया। वहीं इज़राइल ने दावा किया कि उसने एक संदिग्ध विमान को मार गिराया, जिसे उसके अनुसार हिज़्बुल्लाह ने भेजा था।
अमेरिकी मध्यस्थता से पहले तनाव कम हुआ था
सोमवार को घोषित अमेरिका समर्थित एक अलग समझौते से तनाव कम करने में मदद मिली थी। उस समझौते के तहत इज़राइल ने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों, जहां हिज़्बुल्लाह का प्रभाव माना जाता है, पर हमले की योजना से पीछे हटने का फैसला किया था। बदले में ईरान समर्थित समूह ने सीमा पार हमले रोक दिए थे।
इस कदम से बड़े स्तर पर संघर्ष टला, लेकिन क्षेत्रीय तनाव बना रहा।
व्यापक क्षेत्रीय तनाव से जुड़ा संघर्ष
इज़राइल ने मार्च में लेबनान में सैन्य अभियान शुरू किया था और कहा था कि यह सीमा पार हिज़्बुल्लाह के लगातार हमलों की प्रतिक्रिया है। यह संघर्ष अब ईरान, इज़राइल और अमेरिका से जुड़े व्यापक क्षेत्रीय तनावों से जुड़ गया है।
ईरान पहले ही कह चुका है कि फरवरी के अंत से शुरू हुए व्यापक संघर्ष को समाप्त करने वाले किसी भी समझौते को वह तब तक स्वीकार नहीं करेगा जब तक उसमें लेबनान भी शामिल न हो।
सीधी बातचीत जारी रहेगी
ताजा बयान में कहा गया कि इज़राइल और लेबनान भरोसा बढ़ाने और लंबित विवादों को सुलझाने के लिए प्रत्यक्ष वार्ता जारी रखने पर सहमत हुए हैं। दोनों देशों के राजनयिक और सुरक्षा अधिकारी 22 जून वाले सप्ताह में फिर मुलाकात करेंगे।
उनका उद्देश्य राजनीतिक और सुरक्षा वार्ताओं को आगे बढ़ाना और दीर्घकालिक समझौते की दिशा में काम करना होगा, जिससे क्षेत्र में अधिक स्थिरता लाई जा सके।
