अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह भविष्य में ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई से मिलना चाहेंगे, क्योंकि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बावजूद वॉशिंगटन और तेहरान के बीच कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।
न्यूयॉर्क पोस्ट के पॉड फोर्स वन पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि उनके अनुसार ईरान में अंतिम फैसले मोजतबा खामेनेई लेते हैं और परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो दोनों की मुलाकात हो सकती है।
ट्रंप ने कहा, “मैं उनसे मिलना चाहूंगा और संभवतः किसी समय हमारी मुलाकात भी होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आगे हालात कैसे बनते हैं।”
पिता की मृत्यु के बाद मोजतबा खामेनेई ने संभाली जिम्मेदारी
अमेरिका, इज़राइल और ईरान से जुड़ा संघर्ष 28 फरवरी को उस समय तेज हो गया जब ईरान पर सैन्य हमले किए गए। हमलों की शुरुआती श्रृंखला में ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई थी।
उनकी मृत्यु के बाद ईरान ने उनके 56 वर्षीय बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया। तब से मोजतबा खामेनेई ईरान के राजनीतिक और सैन्य निर्णयों के केंद्र में आ गए हैं।
ट्रंप का दावा— नए ईरानी नेता घायल हुए थे
पॉडकास्ट के दौरान ट्रंप ने मोजतबा खामेनेई की स्वास्थ्य स्थिति पर आई रिपोर्टों पर भी टिप्पणी की। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि अमेरिका-इज़राइल सैन्य हमलों के दौरान ईरान के नए सर्वोच्च नेता को गंभीर चोटें आई हो सकती हैं।
ट्रंप ने मंगलवार को पॉडकास्ट में कहा, “मैं यह नहीं सुन रहा कि उनकी हालत बहुत अच्छी है। अगर रिपोर्टों पर विश्वास करें तो उनके शरीर के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा है।”
हालांकि ट्रंप ने अपने इस दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया।
ट्रंप ने नेतन्याहू के साथ तीखी बातचीत स्वीकार की
ट्रंप ने इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ हाल की फोन बातचीत का भी जिक्र किया। रिपोर्टों में कहा गया था कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत असामान्य रूप से तनावपूर्ण रही।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने लेबनान में इज़राइल की सैन्य कार्रवाई को लेकर नेतन्याहू की कड़ी आलोचना की थी। सूत्रों का दावा था कि बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने ऊंची आवाज़ में भी बात की। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने बातचीत में कठोर भाषा का इस्तेमाल किया था, तो ट्रंप ने इसकी पुष्टि की।
साक्षात्कारकर्ता ने पूछा, “क्या आपने कहा था— ‘क्या तुम पागल हो गए हो? तुम क्या कर रहे हो? मैंने तुम्हें जेल से बाहर रहने में मदद की।’ क्या यह सच है?”
ट्रंप ने जवाब दिया, “हाँ, मैंने ऐसा कहा।”
उन्होंने आगे बताया कि उनकी प्रतिक्रिया इतनी तीखी क्यों थी।
उन्होंने कहा, “मैं लेबनान के साथ लगातार लड़ाई को लेकर परेशान था। मैंने कहा— ‘बीबी, हमें इसे रोकना होगा।’”
लेबनान संघर्ष से सहयोगियों के बीच बढ़ा तनाव
बताया गया कि यह बातचीत उस समय हुई जब इज़राइल ने दक्षिणी लेबनान में अपने सैन्य अभियान का विस्तार किया। इज़राइली सेना ने हिज़्बुल्लाह के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है, जो ईरान समर्थित सशस्त्र समूह है और इज़राइल के प्रमुख क्षेत्रीय विरोधियों में शामिल है। इस सैन्य तनाव ने वॉशिंगटन और तेल अवीव के रिश्तों पर भी दबाव बढ़ा दिया है।
जहां इज़राइल लेबनान में अपने अभियान जारी रखे हुए है, वहीं ट्रंप प्रशासन क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत भी आगे बढ़ा रहा है।
ईरान के साथ व्यापक समझौते की कोशिश
अमेरिका तेहरान के साथ एक व्यापक समझौते की दिशा में काम कर रहा है, जिसमें कई प्रमुख मुद्दे शामिल हैं। इनमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को फिर से खोलना, क्षेत्रीय तनाव कम करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगाना प्राथमिकताओं में शामिल है।
ट्रंप की टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि सैन्य और राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद उनका प्रशासन ईरानी नेतृत्व के साथ सीधा संवाद बनाए रखने में रुचि रखता है।
अमेरिका-इज़राइल संबंधों में तनाव के संकेत
ट्रंप और नेतन्याहू के बीच कथित बहस ने दोनों सहयोगी देशों के बीच बढ़ते मतभेदों को भी उजागर किया है। हालांकि अमेरिका और इज़राइल अब भी करीबी साझेदार हैं, लेकिन सैन्य रणनीति और क्षेत्रीय कूटनीति को लेकर मतभेद पहले से अधिक दिखाई देने लगे हैं।
ट्रंप द्वारा सार्वजनिक रूप से इस तीखी बातचीत को स्वीकार करना यह दिखाता है कि वॉशिंगटन के सामने इज़राइल के समर्थन और ईरान के साथ व्यापक समझौते की कोशिशों के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
