क्वाड देशों ने मंगलवार को समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा स्थिरता, महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं और स्वतंत्र एवं खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर एकजुट रुख पेश किया। यह रुख ईरान संघर्ष और होर्मुज़ जलडमरूमध्य संकट से जुड़े बढ़ते तनाव के बीच सामने आया।
भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्रियों ने समुद्री निगरानी, बंदरगाह अवसंरचना, ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों पर केंद्रित कई नई पहलों की घोषणा की। चारों देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून, नौवहन की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय स्थिरता के महत्व पर भी जोर दिया।
क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि सदस्य देशों ने आतंकवाद के प्रति “शून्य सहिष्णुता” बनाए रखने पर सहमति जताई है। उन्होंने स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बनाए रखने की समूह की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
जयशंकर ने कहा कि आतंकवादी हमलों का सामना करने वाले देशों को “अपनी रक्षा करने का अधिकार” है। उन्होंने कहा कि चारों लोकतांत्रिक देश समुद्री सुरक्षा, आर्थिक साझेदारी और तकनीकी सहयोग के माध्यम से सहयोग को मजबूत कर रहे हैं।
समुद्री सुरक्षा पर क्वाड का फोकस
विदेश मंत्रियों ने समुद्री सुरक्षा के बढ़ते महत्व पर चर्चा की, क्योंकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधानों और उनके वैश्विक ऊर्जा व्यापार पर प्रभाव को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
जयशंकर ने कहा कि देशों ने सुरक्षित और निर्बाध समुद्री व्यापार तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान के महत्व पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि क्वाड देशों के बीच सहयोग समुद्री निगरानी, लॉजिस्टिक्स, समुद्र के भीतर बिछी केबलों, प्रशिक्षण, मानवीय सहायता और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में लगातार बढ़ा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सदस्य देशों के बीच सूचना साझा करने को बेहतर बनाने के लिए इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम सर्विलांस कोऑपरेशन इनिशिएटिव शुरू करने की घोषणा की। रुबियो ने इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस इनिशिएटिव के विस्तार की भी पुष्टि की, जो क्षेत्र के देशों को लगभग वास्तविक समय में समुद्री ट्रैकिंग डेटा उपलब्ध कराएगा।
उन्होंने कहा कि समुद्री सुरक्षा इसलिए और महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि वैश्विक समुद्री व्यापार का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा हिंद-प्रशांत क्षेत्र से होकर गुजरता है। रुबियो ने यह भी घोषणा की कि क्वाड प्रशांत क्षेत्र में अपने पहले सामूहिक बंदरगाह प्रोजेक्ट के तहत फिजी के साथ मिलकर बंदरगाह अवसंरचना परियोजना पर काम करेगा।
ईरान संघर्ष से बढ़ी ऊर्जा सुरक्षा की चिंता
ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने कहा कि बिगड़ती रणनीतिक स्थिति और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने की ईरान की धमकी ने ऊर्जा सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता पर मजबूत सहयोग की आवश्यकता बढ़ा दी है।
उन्होंने एक नई इंडो-पैसिफिक एनर्जी सिक्योरिटी इनिशिएटिव शुरू करने की घोषणा की। वोंग ने महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को प्रभावित करने वाले किसी भी “टोलिंग प्रस्ताव” का भी विरोध किया। उन्होंने समुद्री निगरानी, साइबर सुरक्षा, कानून प्रवर्तन तथा अवैध मछली पकड़ने और तस्करी से निपटने के प्रयासों में क्वाड देशों के बीच बढ़ते सहयोग को रेखांकित किया।
रुबियो ने अतिरिक्त रूप से क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क की घोषणा की। इस पहल का उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों के खनन, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण में समन्वित निवेश के माध्यम से आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना है।
जापान ने जबरदस्ती और उत्तर कोरिया पर जताई चिंता
जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने कहा कि “स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत” को हासिल करने में क्वाड की केंद्रीय भूमिका बनी हुई है। चीन का सीधे नाम लिए बिना मोतेगी ने कहा कि देश “बल या दबाव के जरिए यथास्थिति को एकतरफा बदलने” के प्रयासों का कड़ा विरोध करते हैं।
उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों के निर्यात पर प्रतिबंधों को लेकर भी चिंता जताई और उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के समर्थन को दोहराया। मोतेगी ने चेतावनी दी कि ईरान और होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जुड़ा तनाव हिंद-प्रशांत क्षेत्र, विशेषकर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर “भारी प्रभाव” डाल सकता है। उन्होंने इस रणनीतिक जलमार्ग में सुरक्षित और स्वतंत्र नौवहन सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।
