रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के पांच प्रोटोटाइप के विकास और निर्माण के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए तीन बोलीदाताओं को रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी किए। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये है और इससे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के बाहर भारत की दूसरी फाइटर जेट निर्माण सुविधा का रास्ता खुलने की उम्मीद है।
शॉर्टलिस्ट किए गए तीन बोलीदाता हैं — टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL), लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) की साझेदारी, तथा भारत फोर्ज और भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड का समूह।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के अंतर्गत एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) विमान की डिजाइन और विकास प्रक्रिया का नेतृत्व करेगी। AMCA में शुरुआती चरण में अमेरिकी GE-414 इंजन का इस्तेमाल किया जाएगा।
भारत का लक्ष्य पांचवीं पीढ़ी की लड़ाकू क्षमता
अधिकारियों के अनुसार, पहला AMCA प्रोटोटाइप 2027 की शुरुआत तक तैयार होने की उम्मीद है। इस पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की पहली उड़ान 2028 से 2029 के बीच होने की संभावना है।
भारत इस विमान का सीरियल प्रोडक्शन 2030 के दशक के मध्य तक शुरू करने की योजना बना रहा है। फाइटर जेट के भविष्य के संस्करणों में फ्रांसीसी कंपनी सफ्रान द्वारा विकसित और भारत में निर्मित 120 kN इंजन इस्तेमाल किए जाने की संभावना है।
इसी महीने की शुरुआत में आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी में 15,803 करोड़ रुपये की इंटीग्रेशन एंड फ्लाइट टेस्टिंग कॉम्प्लेक्स की आधारशिला रखी गई थी। कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी पहले ही AMCA के पांच प्रोटोटाइप के विकास को मंजूरी दे चुकी है।
AMCA करेगा वैश्विक स्टेल्थ फाइटर्स से मुकाबला
AMCA में उन्नत स्टेल्थ तकनीक, इंटरनल वेपन बे, सुपर-क्रूज क्षमता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम होंगे। भारत इस लड़ाकू विमान को दुनिया के प्रमुख स्टेल्थ विमानों — अमेरिकी F-35, चीन के J-20 और रूस के Su-57 — के मुकाबले में उतारने की योजना बना रहा है। यह विमान अंततः भारतीय वायुसेना के Su-30 MKI बेड़े की जगह लेगा।
फाइटर जेट में स्वदेशी अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइलें, एयर-टू-सर्फेस मिसाइलें, लेजर-गाइडेड बम और ग्लाइड बम लगाए जाएंगे। इसमें उन्नत रडार और सेंसर सिस्टम भी होंगे, जिन्हें दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली से बचने के लिए डिजाइन किया गया है।
विदेशी फाइटर जेट्स पर बहस जारी
इसी बीच भारतीय वायुसेना ने “मेक इन इंडिया” कार्यक्रम के तहत रूस के Su-57 लड़ाकू विमानों की दो स्क्वाड्रन खरीदने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, सरकार ने अभी इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला नहीं लिया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हाल के संघर्षों ने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की स्टेल्थ क्षमता पर सवाल खड़े किए हैं। इसमें उन रिपोर्ट्स का उल्लेख किया गया, जिनमें दावा किया गया कि पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम ने हीट-सीकिंग मिसाइल से अमेरिकी F-35 को नुकसान पहुंचाया।
भारत रक्षा निर्माण को दे रहा बढ़ावा
बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक हालात के बीच भारत घरेलू रक्षा उत्पादन मजबूत करने और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने के प्रयास बढ़ा रहा है। सरकार का मानना है कि भारतीय निजी कंपनियों को HAL सुविधाओं के बाहर उन्नत पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाकर अपनी क्षमता साबित करनी होगी।
इसी दौरान भारत ने फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन के साथ 114 लड़ाकू विमानों की सीधी खरीद और बाद में स्थानीय उत्पादन को लेकर लागत वार्ता भी शुरू कर दी है। इस कदम का उद्देश्य भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता बनाए रखना है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि 7 मई 2025 से चार दिनों तक चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर ने युद्ध की बदलती प्रकृति को उजागर किया। रिपोर्ट के अनुसार, आधुनिक युद्ध अब पारंपरिक टैंक और पैदल सेना की लड़ाइयों के बजाय लंबी दूरी से मिसाइल और बम दागने वाले विमानों पर अधिक निर्भर होते जा रहे हैं।
