दक्षिण कोरिया 2030 के दशक के मध्य तक अपनी पहली परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बी विकसित कर लॉन्च करेगा। रक्षा मंत्री आह्न ग्यु-बैक ने मंगलवार को कहा कि यह कदम उत्तर कोरिया की पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली परमाणु और मिसाइल क्षमताओं से पैदा खतरे के खिलाफ देश की रक्षा क्षमता मजबूत करने के लिए उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना में कम संवर्धित यूरेनियम को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा और इसका डिजाइन तथा निर्माण पूरी तरह दक्षिण कोरिया में ही किया जाएगा।
घरेलू रक्षा और औद्योगिक बढ़ावा
आह्न ने बताया कि यह कार्यक्रम दक्षिण कोरिया की परमाणु तकनीक, जहाज निर्माण क्षमता और रक्षा उद्योग की विशेषज्ञता को एक साथ लाएगा। साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि देश परमाणु हथियार विकसित या हासिल नहीं करने की अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखेगा।
अमेरिका और IAEA के साथ सहयोग
रक्षा मंत्री ने कहा कि दक्षिण कोरिया पनडुब्बियों के लिए कम संवर्धित यूरेनियम ईंधन हासिल करने हेतु अमेरिका के साथ करीबी सहयोग करेगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक अप्रसार नियमों के पूर्ण पालन को सुनिश्चित करने के लिए देश अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ भी समन्वय करेगा।
पहली पनडुब्बी 2030 के दशक के मध्य तक अपेक्षित
सरकार ने 2030 के दशक के मध्य तक पहली परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बी लॉन्च करने का लक्ष्य तय किया है। अधिकारियों का मानना है कि परमाणु प्रणोदन दक्षिण कोरिया की नौसैनिक शक्ति को काफी मजबूत करेगा।
पानी के भीतर अधिक क्षमता
नई पनडुब्बियां मौजूदा पारंपरिक मॉडलों की तुलना में कहीं अधिक समय तक पानी के भीतर रह सकेंगी। साथ ही इनमें बेहतर गतिशीलता और लंबी परिचालन क्षमता होगी, जिससे क्षेत्रीय खतरों के खिलाफ दक्षिण कोरिया की समुद्री रक्षा स्थिति और मजबूत होगी।
