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ट्रंप प्रशासन अगले सप्ताह क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो पर आपराधिक आरोप लगाने की तैयारी में
ट्रंप प्रशासन 1996 में विमान गिराए जाने की घटना को लेकर क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो के खिलाफ आपराधिक आरोप दायर करने की तैयारी कर रहा है, जिससे वॉशिंगटन और हवाना के बीच तनाव और बढ़ सकता है।

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन अगले बुधवार को क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो के खिलाफ आपराधिक आरोपों की घोषणा करने की तैयारी कर रहा है। इसके परिणामस्वरूप आने वाले दिनों में वॉशिंगटन और हवाना के बीच तनाव तेज़ी से बढ़ सकता है।

अमेरिकी न्याय विभाग के एक अधिकारी के अनुसार संघीय अभियोजक 20 मई को मियामी में 94 वर्षीय पूर्व क्यूबाई नेता के खिलाफ अभियोग सार्वजनिक करने की योजना बना रहे हैं। यह मामला 1996 में क्यूबाई निर्वासित समूह द्वारा संचालित विमानों को मार गिराने की घटना से जुड़ा है।

1996 विमान गिराए जाने की घटना से जुड़े आरोप

प्रस्तावित आरोप 1996 की उस घटना से जुड़े हैं, जिसमें क्यूबा के लड़ाकू विमानों ने “ब्रदर्स टू द रेस्क्यू” नामक निर्वासित संगठन के विमानों को नष्ट कर दिया था। इस हमले में चार लोगों की मौत हो गई थी और इससे अमेरिका तथा क्यूबा के बीच हाल के दशकों का सबसे बड़ा कूटनीतिक संकट पैदा हो गया था।

उस समय राउल कास्त्रो क्यूबा के रक्षा मंत्री थे। वहीं क्यूबाई अधिकारियों का कहना था कि विमानों ने क्यूबा के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया था और उन्होंने इस हमले को वैध रक्षात्मक कार्रवाई बताया था।

हालांकि अमेरिका ने इस हमले की कड़ी निंदा की और बाद में क्यूबा पर प्रतिबंध लगा दिए। अमेरिकी अभियोजकों ने 2003 में क्यूबा के तीन सैन्य अधिकारियों पर आरोप लगाए थे, लेकिन क्यूबा ने उन्हें कभी प्रत्यर्पित नहीं किया।

इसके अलावा मियामी के अभियोजक उसी दिन पीड़ितों की याद में एक स्मृति कार्यक्रम आयोजित करने की भी तैयारी कर रहे हैं, जिस दिन अभियोग सार्वजनिक हो सकता है। हालांकि औपचारिक कार्रवाई से पहले ग्रैंड जूरी को इस अभियोग को मंजूरी देनी होगी।

क्यूबा में अब भी प्रभावशाली प्रतीक हैं राउल कास्त्रो

राउल कास्त्रो दिवंगत क्यूबाई क्रांतिकारी फिदेल कास्त्रो के छोटे भाई हैं। फिदेल कास्त्रो ने दशकों तक क्यूबा पर शासन किया और शीत युद्ध के दौरान अमेरिका के सबसे बड़े भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों में शामिल रहे।

बाद में राउल कास्त्रो ने अपने भाई की जगह ली और 2018 तक क्यूबा के राष्ट्रपति रहे। इसके बाद उन्होंने 2021 में कम्युनिस्ट पार्टी का नेतृत्व भी छोड़ दिया। हालांकि पद छोड़ने के बाद भी राउल कास्त्रो क्यूबा की राजनीति में प्रभाव बनाए हुए हैं और देश के कम्युनिस्ट नेतृत्व के बड़े प्रतीक माने जाते हैं।

ट्रंप प्रशासन ने क्यूबा पर बढ़ाया दबाव

इस बीच ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिका और क्यूबा के संबंध लगातार खराब होते गए हैं। वॉशिंगटन ने कई बार क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार पर भ्रष्टाचार और आर्थिक कुप्रबंधन के आरोप लगाए हैं। साथ ही ट्रंप प्रशासन ने खुले तौर पर क्यूबा में राजनीतिक बदलाव का समर्थन किया है।

इसके अलावा ट्रंप ने उन देशों पर प्रतिबंध लगाने की धमकी देकर आर्थिक दबाव बढ़ाया है, जो अब भी क्यूबा को ईंधन की आपूर्ति कर रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप देशभर में ईंधन संकट और बिजली कटौती की स्थिति और खराब होने की खबरें सामने आई हैं।

इसी बीच CIA प्रमुख जॉन रैटक्लिफ हाल ही में हवाना पहुंचे और उन्होंने कथित तौर पर ट्रंप का सीधा संदेश क्यूबाई अधिकारियों तक पहुंचाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक रैटक्लिफ ने क्यूबाई अधिकारियों से कहा कि अमेरिका आर्थिक और सुरक्षा मामलों पर हवाना के साथ तभी बातचीत करेगा, जब क्यूबा सरकार “मौलिक बदलाव” लागू करेगी।

मादुरो मामले से की जा रही तुलना

विश्लेषकों ने राउल कास्त्रो के खिलाफ संभावित मामले की तुलना वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ पहले की गई कानूनी कार्रवाई से भी की है। पहले ट्रंप प्रशासन ने मादुरो के खिलाफ आपराधिक आरोपों को जनवरी में चलाए गए उस अभियान के औचित्य के रूप में इस्तेमाल किया था, जिसके तहत उन्हें मुकदमे का सामना करने के लिए अमेरिका लाया गया था। मादुरो ने आरोपों से इनकार किया है और खुद को निर्दोष बताया है।

मार्च में ट्रंप ने तब अटकलों को और तेज कर दिया था, जब उन्होंने चेतावनी दी थी कि वेनेजुएला के बाद “अब क्यूबा की बारी है।”

मियामी अभियोजक संभाल रहे हैं संवेदनशील जांच

रिपोर्ट्स के अनुसार यह मामला मियामी के शीर्ष संघीय अभियोजक जेसन रेडिंग क्विनोनेस देख रहे हैं, जिन्हें ट्रंप का करीबी सहयोगी माना जाता है। इसी दौरान क्विनोनेस पूर्व CIA निदेशक जॉन ब्रेनन से जुड़ी जांचों की भी निगरानी कर रहे हैं। यह जांच ट्रंप से संबंधित पहले की जांचों की व्यापक समीक्षा का हिस्सा है।

कुल मिलाकर प्रस्तावित अभियोग क्यूबा के खिलाफ वॉशिंगटन के दबाव अभियान में बड़ा उभार माना जा रहा है और इससे दोनों देशों के पहले से तनावपूर्ण संबंध और खराब हो सकते हैं।