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कांगो के इतुरी प्रांत में घातक बुंडीबुग्यो इबोला प्रकोप की पुष्टि
पूर्वी कांगो में इबोला के नए प्रकोप से 65 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य एजेंसियों ने सीमा पार संक्रमण फैलने और संभावित गैर-जायरे वायरस स्ट्रेन से जुड़ी चुनौतियों को लेकर चेतावनी दी है।

कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के पूर्वी इतुरी प्रांत में इबोला का नया प्रकोप सामने आया है, जहां अब तक 65 मौतों की पुष्टि हो चुकी है। देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इस बार संक्रमण इबोला वायरस के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन से जुड़ा है। स्वास्थ्य मंत्री सैमुअल रोजर कांबा मुलाम्बा ने शुक्रवार को पुष्टि की कि प्रयोगशाला जांच में र्वामपारा, मोंगवालु और बुनिया स्वास्थ्य क्षेत्रों में आठ पॉजिटिव मामले पाए गए हैं। अधिकारियों ने अब तक 246 संदिग्ध मामलों की पहचान की है।

क्या है इबोला?

इबोला वायरस रोग एक गंभीर और अक्सर जानलेवा बीमारी है, जो आमतौर पर कांगो के उष्णकटिबंधीय वन क्षेत्रों में पाई जाती है। अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार यह वायरस संक्रमित लोगों के शारीरिक द्रवों, संक्रमित सतहों या बीमारी से मर चुके लोगों के सीधे संपर्क से फैलता है।

अधिकारियों का मानना है कि इस नए प्रकोप का पहला संदिग्ध मरीज बुनिया स्थित इवेंजेलिकल मेडिकल सेंटर की एक नर्स थी। बाद में तेज बुखार, उल्टी, रक्तस्राव और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण विकसित होने के बाद उसकी मौत हो गई।

मोंगवालु और र्वामपारा में सबसे ज्यादा मामले

स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि सबसे ज्यादा संदिग्ध संक्रमण और मौतें मोंगवालु तथा र्वामपारा स्वास्थ्य क्षेत्रों में दर्ज की गई हैं। अधिकारियों ने प्रयोगशाला में पुष्टि किए गए इबोला मामलों में चार मौतों की भी पुष्टि की है। प्रांतीय राजधानी बुनिया में भी अतिरिक्त संदिग्ध संक्रमण सामने आए हैं।

अफ्रीका CDC ने शुक्रवार को आधिकारिक रूप से प्रकोप की पुष्टि की और तुरंत युगांडा तथा दक्षिण सूडान सहित पड़ोसी देशों के साथ आपातकालीन समन्वय प्रयास शुरू कर दिए।

नए इबोला स्ट्रेन को लेकर बढ़ी चिंता

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार शुरुआती निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि यह प्रकोप इबोला वायरस के गैर-जायरे स्ट्रेन से जुड़ा हो सकता है।

इबोला के सह-खोजकर्ता और किंशासा स्थित कांगो के राष्ट्रीय जैव-चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के प्रमुख जीन-जैक मुएम्बे ने कहा कि कांगो में पहले हुए 16 प्रकोपों में से 15 जायरे स्ट्रेन से जुड़े थे।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि अलग स्ट्रेन की पहचान बड़ी चुनौती बन सकती है, क्योंकि मौजूदा टीके और उपचार मुख्य रूप से जायरे वैरिएंट को ध्यान में रखकर विकसित किए गए हैं। अफ्रीका CDC ने यह भी चिंता जताई कि प्रभावित क्षेत्रों में खनन गतिविधियों और सीमा पार आवाजाही के कारण संक्रमण के व्यापक फैलाव का खतरा बढ़ सकता है।

एजेंसी ने कहा, “बुनिया और र्वामपारा के शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ युगांडा और दक्षिण सूडान के पास भारी जनसंख्या आवाजाही के कारण संक्रमण के और फैलने का खतरा है।”

अफ्रीका CDC के महानिदेशक जीन कासेया ने कहा, “प्रभावित क्षेत्रों और पड़ोसी देशों के बीच भारी आवाजाही को देखते हुए तेज क्षेत्रीय समन्वय बेहद जरूरी है।”

युगांडा में संक्रमित व्यक्ति की मौत

इस बीच युगांडा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि बुंडीबुग्यो स्ट्रेन से संक्रमित एक कांगोली नागरिक की कंपाला में मौत हो गई। अधिकारियों ने कहा कि संक्रमण कांगो से आया था और फिलहाल युगांडा में स्थानीय स्तर पर संक्रमण फैलने की पुष्टि नहीं हुई है।

WHO ने बढ़ते मामलों की पुष्टि की

विश्व स्वास्थ्य संगठन को 5 मई को पहली बार संदिग्ध इबोला मामलों की जानकारी मिली थी, जिसके बाद उसने जांच में सहायता के लिए तुरंत इतुरी प्रांत में एक टीम भेजी। WHO के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने कहा कि शुरुआती फील्ड सैंपल पहले निगेटिव आए थे। हालांकि किंशासा की एक प्रयोगशाला ने गुरुवार को इबोला के पॉजिटिव मामलों की पुष्टि कर दी।

अब कुल पुष्ट संक्रमणों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। टेड्रोस ने कहा कि WHO ने संपर्क खोज, निगरानी, प्रयोगशाला परीक्षण और चिकित्सा देखभाल के लिए अपने आपातकालीन कोष से 5 लाख डॉलर जारी किए हैं।

इतुरी में हिंसा ने बढ़ाया स्वास्थ्य संकट

यह प्रकोप ऐसे समय में सामने आया है जब इतुरी प्रांत पहले से ही बढ़ती हिंसा का सामना कर रहा है। प्रतिद्वंद्वी मिलिशिया समूहों के बीच हालिया झड़पों में दर्जनों नागरिक मारे गए हैं और पूरे प्रांत में स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हुई हैं।

इस महीने की शुरुआत में डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने चेतावनी दी थी कि हिंसा के कारण कई अस्पतालों पर भारी दबाव पड़ गया है और कुछ स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह काम करने में असमर्थ हो गए हैं। संगठन ने यह भी चेतावनी दी कि विस्थापन शिविरों में खराब स्वच्छता और भीड़भाड़ संक्रामक बीमारियों के प्रकोप का खतरा बढ़ा सकती है।

1976 में देश में पहली बार वायरस की पहचान होने के बाद यह कांगो का 17वां इबोला प्रकोप है। इससे पहले कसाई प्रांत में फैला पिछला प्रकोप तीन महीने बाद 1 दिसंबर को समाप्त हुआ था। उस प्रकोप में 64 मामले सामने आए थे, जिनमें 45 मौतें और 19 लोग स्वस्थ हुए थे।