मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में मंगलवार को चार चीता शावकों की मौत हो गई। वन अधिकारियों को संदेह है कि किसी तेंदुए ने इन शावकों पर हमला किया है। नियमित निगरानी के दौरान अधिकारी शावकों को उनके मांद में मृत पाए। ये शावक चीता KGP12 के थे।
वन टीम को मिले आधे खाए गए शव
वन विभाग की टीम को जंगल क्षेत्र में शावकों के आधे खाए हुए शव मिले। अधिकारियों ने बताया कि शावकों की मां चीता KGP12 सुरक्षित है और घटना के बाद उसे पास ही घूमते हुए देखा गया।
इन शावकों का जन्म 11 अप्रैल को हुआ था। अधिकारियों ने इन्हें भारत के चीता पुनर्स्थापन कार्यक्रम के तहत देश में जंगली अवस्था में जन्मे पहले शावकों के रूप में सराहा था।
अधिकारियों को तेंदुए के हमले का संदेह
कूनो नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने बताया कि वनकर्मी बिना किसी हस्तक्षेप के शावकों की 24 घंटे निगरानी कर रहे थे।
उन्होंने कहा, “शावकों की 24x7 बिना किसी दखल के निगरानी की जा रही थी। 11 मई को वे जीवित और स्वस्थ थे, लेकिन मंगलवार सुबह उन्हें गहरे घावों और आधे खाए हुए शरीर के साथ मृत पाया गया। प्रथम दृष्टया यह तेंदुए का हमला प्रतीत होता है।”
अधिकारियों ने मौत के सही कारण की पुष्टि के लिए शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
जन्म को माना गया था बड़ी सफलता
KGP12, भारत के चीता स्थानांतरण कार्यक्रम के तहत दक्षिण अफ्रीका से लाई गई चीता गामिनी की संतान है। इन शावकों का जन्म परियोजना के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना गया था। पहली बार किसी भारतीय मूल की, जंगली में पली-बढ़ी चीता ने खुले जंगल में शावकों को जन्म दिया था।
वन अधिकारियों ने पहले इसे भारत में चीतों के प्राकृतिक प्रजनन और दीर्घकालिक अस्तित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया था।
कूनो में अभी भी 50 चीते मौजूद
अधिकारियों के अनुसार कूनो नेशनल पार्क के भीतर अभी कम से कम 14 वयस्क चीते जंगली अवस्था में सक्रिय हैं। पिछले तीन वर्षों में इस परियोजना में 57 शावकों का जन्म दर्ज किया गया है, जिनमें से 37 जीवित रहे।
इनमें केवल चार शावकों का जन्म पूरी तरह जंगल में हुआ था। बाकी 33 शावकों को सॉफ्ट-रिलीज़ एनक्लोजर में पाला गया था। वर्तमान में कूनो नेशनल पार्क में 50 चीते और गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में तीन चीते दर्ज हैं
