अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई करने के अपने फैसले का मजबूती से बचाव किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने सही समय पर हस्तक्षेप किया और एक वैश्विक संकट को टाल दिया। फ्लोरिडा के द विलेजेस चार्टर स्कूल में बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं न सिर्फ क्षेत्र बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा थीं।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने कार्रवाई नहीं की होती, तो यूरोप और मध्य पूर्व “पूरी तरह तबाह हो गए होते।”
अमेरिका ने रोकी ईरान की परमाणु प्रगति
ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अमेरिका ने सीधे तौर पर ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोका। उन्होंने कहा, “हमें एक खूबसूरत देश ईरान तक जाना पड़ा और यह सुनिश्चित करना पड़ा कि उनके पास परमाणु हथियार न हों।”
उन्होंने आगे कहा, “हमने उन्हें B2 बॉम्बर्स के जरिए रोका। अगर हम ऐसा नहीं करते, तो उनके पास परमाणु हथियार होता। इज़राइल, मध्य पूर्व और यूरोप तबाह हो जाते।”
इस तरह उन्होंने साफ किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने निर्णायक भूमिका निभाई।
वैश्विक तबाही की चेतावनी
ट्रंप ने चेतावनी दी कि ईरान की परमाणु क्षमता से व्यापक स्तर पर विनाश हो सकता था। उन्होंने कहा, “आप ईरान को परमाणु हथियार नहीं दे सकते — क्योंकि वे इसे बहुत जल्दी इज़राइल पर इस्तेमाल करते, फिर मध्य पूर्व में, फिर यूरोप में, और फिर हमारी बारी आती। ऐसा नहीं होने वाला।”
इसलिए उन्होंने कहा कि अमेरिका ने संभावित संघर्ष की श्रृंखला को रोक दिया।
ईरान के नेतृत्व पर हमला
ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें क्रूर और अक्षम बताया। उन्होंने कहा, “ईरान के नेता बुरे लोग थे। उन्होंने दो हफ्तों में 42,000 प्रदर्शनकारियों को मार डाला। हमें यह कदम उठाना ही था।”
ईरान की सेना कमजोर होने का दावा
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत काफी कमजोर हो चुकी है। उन्होंने कहा, “ईरान बुरी तरह टूट रहा है। उनके पास न नौसेना है, न वायुसेना, न एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम, न रडार। उनके नेता भी नहीं बचे।”
नेतृत्व संकट पर जोर
ट्रंप ने ईरान में नेतृत्व संकट की भी बात कही। उन्होंने कहा, “हमें पता ही नहीं कि हम किससे बात कर रहे हैं। हम फोन करते हैं तो कोई कहता है ‘मैं फलां मोहम्मद बोल रहा हूं।’ मैं पूछता हूं, ‘क्या आप नेता हैं?’ हम तो नेता ढूंढ रहे हैं।”
उन्होंने आगे दावा किया कि कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।
“दुनिया में यह एकमात्र देश है जहां कोई नेता बनना नहीं चाहता। लोग पूछते हैं, ‘क्या कोई राष्ट्रपति बनना चाहता है?’ और कोई तैयार नहीं होता,” उन्होंने कहा।
