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ट्रंप की समय-सीमा से पहले ईरान के खार्ग द्वीप पर अमेरिकी हवाई हमले
ईरान के खार्ग द्वीप पर अमेरिकी हवाई हमलों से तनाव बढ़ गया है, क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तय की गई समय-सीमा नजदीक आ रही है। इससे खाड़ी क्षेत्र में बड़े संघर्ष और तेल आपूर्ति में बाधा को लेकर आशंकाएं बढ़ गई हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर हवाई हमले किए गए हैं। यह हमला डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तय की गई समय-सीमा से ठीक पहले हुआ, जिससे क्षेत्र में बड़े टकराव की आशंका बढ़ गई है।

अमेरिका ने प्रमुख सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना

एक अमेरिकी अधिकारी ने फॉक्स न्यूज़ को बताया कि सेना ने रात भर द्वीप पर हवाई हमले किए। इन हमलों में कथित तौर पर बंकर, रडार सिस्टम और गोला-बारूद भंडारण स्थलों को निशाना बनाया गया।

अधिकारी ने यह भी कहा कि बंदरगाह के डॉकिंग क्षेत्र को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया गया। हालांकि, यदि उन स्थानों से ईरानी बलों ने हमला किया होता तो वे भी हमलों की चपेट में आ सकते थे।

एक्सियोस और अल अरबिया टीवी की अलग-अलग रिपोर्टों में भी इन हवाई हमलों की पुष्टि की गई है।

खार्ग द्वीप का रणनीतिक महत्व

खार्ग द्वीप को ईरान के तेल निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि देश के लगभग 90 प्रतिशत पेट्रोलियम निर्यात इसी मार्ग से होते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि किसी संभावित अमेरिका–इज़राइल सैन्य अभियान में यह एक प्रमुख लक्ष्य हो सकता है।

संयुक्त राज्य अमेरिका इससे पहले 13 और 14 मार्च के बीच भी इस द्वीप पर सैन्य ठिकानों पर हमले कर चुका है।

वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता

ट्रंप पहले भी यह सुझाव दे चुके हैं कि ईरान की तेल संरचना पर कब्जा करना या उसे नष्ट करना सजा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऐसा कदम वैश्विक तेल आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

उनका अनुमान है कि अगर द्वीप की तेल संरचना को नुकसान पहुंचता है तो कच्चे तेल की कीमतें प्रति बैरल 10 से 12 डॉलर तक बढ़ सकती हैं।

वर्तमान में ब्रेंट क्रूड लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। यह पिछले महीने संघर्ष के दौरान पहुंचे 119 डॉलर के शिखर से कम है, लेकिन युद्ध से पहले के 72 डॉलर स्तर से काफी अधिक है।

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव

ट्रंप द्वारा ईरान को आत्मसमर्पण के लिए रात 8 बजे (ET) की समय-सीमा देने के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। दोनों पक्षों ने संकेत दिया है कि यदि यह समय-सीमा गुजर जाती है तो हमले और तेज हो सकते हैं।

क्षेत्र के देश संभावित टकराव की तैयारी कर रहे हैं। कतर ने चेतावनी दी है कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।

सोमवार को ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, “हर बिजली संयंत्र बंद हो जाएगा, जल जाएगा, फट जाएगा और फिर कभी इस्तेमाल नहीं हो सकेगा। मेरा मतलब है पूरी तरह ध्वस्त कर दिया जाएगा। अगर हम चाहें तो यह सब चार घंटे के भीतर हो सकता है।”

ऊर्जा और जल संरचना पर खतरा

खाड़ी देशों को ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई का भी डर है। किसी भी पलटवार में तेल, गैस और डिसेलिनेशन (समुद्री पानी को मीठा बनाने वाले) संयंत्रों को निशाना बनाया जा सकता है, जो क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

ऊर्जा ढांचे पर हमले पहले ही अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर चुके हैं, लेकिन यदि डिसेलिनेशन संयंत्रों पर हमला हुआ तो पानी की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।

दुबई, अबू धाबी और दोहा जैसे बड़े शहर पीने के पानी के लिए इन संयंत्रों पर काफी हद तक निर्भर हैं।

एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, डिसेलिनेशन संयंत्र कुवैत के लगभग 90 प्रतिशत, ओमान के 86 प्रतिशत और सऊदी अरब के 70 प्रतिशत पीने के पानी की आपूर्ति करते हैं।