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राघव चड्ढा ने तोड़ी चुप्पी, पूछा— ‘क्या जनता के मुद्दे उठाना अपराध है?’
राघव चड्ढा ने उन्हें हटाए जाने के आम आदमी पार्टी के फैसले पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या संसद में जनता के मुद्दे उठाना अब “अपराध” बन गया है।

राघव चड्ढा ने राज्यसभा में उपनेता पद से हटाए जाने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने X पर एक वीडियो संदेश साझा किया और इस फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या संसद में जनता के मुद्दे उठाना अब “अपराध” बन गया है। उन्होंने कहा, “क्या मैंने कुछ गलत किया है?”

संसद में अपनी भूमिका का बचाव

वीडियो में चड्ढा ने कहा कि उन्हें जब भी संसद में बोलने का मौका मिलता है, वह हमेशा जनता से जुड़े मुद्दे उठाते हैं। उन्होंने सवाल किया कि पार्टी उन्हें ऐसा करने से क्यों रोकना चाहती है।

उन्होंने कहा, “जब भी मुझे संसद में बोलने का मौका मिलता है, मैं जनता के मुद्दे उठाता हूँ… लेकिन क्या ऐसा करना अपराध या गलती है? मैं यह इसलिए पूछ रहा हूँ क्योंकि आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से कहा है कि राघव चड्ढा के संसद में संबोधन पर रोक लगाई जाए।”

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि कोई उन्हें चुप क्यों कराना चाहता है। उन्होंने कहा, “कोई मुझे चुप क्यों कराना चाहेगा?”

चड्ढा ने लोगों के समर्थन के लिए धन्यवाद भी दिया। अपने संदेश के अंत में उन्होंने एक मजबूत पंक्ति कही, “मेरी चुप्पी को मेरी हार मत समझिए।”

चड्ढा द्वारा उठाए गए मुद्दे

चड्ढा ने संसद में उठाए गए कई मुद्दों का जिक्र किया। इनमें हवाई अड्डों पर महंगे खाद्य पदार्थों की कीमतें, गिग वर्कर्स की समस्याएँ, प्रीपेड मोबाइल प्लान से जुड़ी दिक्कतें और मध्यम वर्ग द्वारा चुकाए जाने वाले टैक्स से संबंधित चिंताएँ शामिल थीं।

पद से हटाए जाने के तुरंत बाद उन्होंने X पर एक और वीडियो पोस्ट किया। इस क्लिप में संसद में दिए गए उनके भाषणों का संकलन दिखाया गया था। उन्होंने पोस्ट में केवल 🧿 इमोजी जोड़ा और फैसले पर कोई अतिरिक्त टिप्पणी नहीं की।

हाल के हफ्तों में उन्होंने फ्लाइट देरी, कथित परीक्षा पेपर लीक और कानूनी पितृत्व अवकाश की मांग जैसे मुद्दे भी संसद में उठाए थे।

AAP ने चड्ढा की जगह अशोक मित्तल को बनाया उपनेता

पार्टी ने गुरुवार को चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया और यह जिम्मेदारी अशोक मित्तल को सौंप दी।

AAP के भीतर मतभेद की अटकलें

कई पर्यवेक्षक इस कदम को AAP के भीतर आंतरिक मतभेद का संकेत मान रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी।

वीरेंद्र सचदेवा ने इस स्थिति की तुलना 2024 में स्वाति मालीवाल और अरविंद केजरीवाल के बीच हुए विवाद से की।

सचदेवा ने कहा,
“पहले स्वाति मालीवाल और अब राघव चड्ढा—AAP दिल्ली के दो अहम चेहरे—ऐसा लगता है कि केजरीवाल की कार्यशैली से दूर हो गए हैं।”

उन्होंने यह भी दावा किया कि चड्ढा ने केजरीवाल के कथित “अराजक और भ्रष्ट नेतृत्व” से दूरी बना ली है।

इस फैसले के पीछे संभावित कारण

कुछ रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चड्ढा की चुप्पी इस फैसले की वजह बन सकती है। मार्च 2024 में आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के समय चड्ढा ने विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा नहीं लिया था। उस समय उन्होंने कहा था कि वह आंख की सर्जरी के लिए लंदन में थे।

रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि केजरीवाल की लगभग छह महीने की जेल अवधि के दौरान भी वह उनसे दूर रहे। सितंबर 2024 में केजरीवाल की रिहाई के कुछ दिनों बाद ही उनकी मुलाकात हुई।

AAP ने मतभेद के दावों को खारिज किया

AAP ने पार्टी के भीतर किसी भी तरह के मतभेद के दावों को खारिज कर दिया है। पार्टी नेताओं ने कहा कि यह फैसला नियमित संगठनात्मक फेरबदल का हिस्सा है। उन्होंने यह भी नकारा कि पार्टी के कोटे के तहत चड्ढा को संसद में बोलने से रोका गया था।