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ईरान ने अमेरिका वार्ता पर पाकिस्तान की मध्यस्थता की पेशकश ठुकराई
ईरान ने अमेरिका के साथ संभावित वार्ता की मेजबानी करने के पाकिस्तान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिससे संकेत मिलता है कि वह भविष्य की किसी भी बातचीत पर पूरा नियंत्रण अपने हाथ में रखना चाहता है।

ईरान ने संयुक्त राज्य अमेरिका और तेहरान के बीच संभावित वार्ता की मेजबानी करने के पाकिस्तान के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। इस प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि चल रहे संघर्ष में पाकिस्तान के औपचारिक मध्यस्थ की भूमिका निभाने की संभावना कम है।

पाकिस्तान ने पहले कहा था कि वह बातचीत आयोजित करने के लिए तैयार है। हालांकि, ईरान ने स्पष्ट कर दिया कि ऐसे प्रस्ताव समय से पहले हैं और तेहरान की ओर से मंजूर नहीं किए गए हैं।

तेहरान ने इस्लामाबाद के प्रस्ताव से दूरी बनाई

यह प्रतिक्रिया उन रिपोर्टों के बाद आई जिनमें कहा गया था कि पाकिस्तान अमेरिका-ईरान वार्ता की मेजबानी करना चाहता है। इस्लामाबाद ने ईरान और खाड़ी देशों के साथ अपने मजबूत संबंधों का हवाला देते हुए खुद को एक उपयुक्त स्थान के रूप में पेश किया था।

लेकिन ईरान ने इस विचार को सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया। मुंबई स्थित उसके वाणिज्य दूतावास द्वारा साझा किए गए एक संदेश में कहा गया, “पाकिस्तान के मंच उनके अपने हैं,” जिससे यह साफ हो गया कि वार्ता वहां होने के सुझाव से ईरान खुद को अलग रख रहा है।

पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशों को झटका

यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच खुद को एक पुल के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा था। उसने शांति वार्ता की मेजबानी करके तनाव कम करने में मदद की पेशकश की थी।

हालांकि, न तो संयुक्त राज्य अमेरिका और न ही ईरान ने आधिकारिक रूप से ऐसी किसी बातचीत में शामिल होने पर सहमति जताई है। अब ईरान के इनकार से मध्यस्थ की भूमिका निभाने की पाकिस्तान की कोशिशें कमजोर पड़ गई हैं।

ईरान कूटनीति के लिए खुला, लेकिन अपनी शर्तों पर

पाकिस्तान के प्रस्ताव को ठुकराने के बावजूद ईरान ने बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं किए हैं। वह फिलहाल संयुक्त राज्य अमेरिका के एक व्यापक प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान इस योजना का अध्ययन कर रहा है। हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान तब तक किसी वार्ता में शामिल नहीं होगा जब तक उसकी शर्तें पूरी नहीं होतीं।

इससे स्पष्ट होता है कि ईरान यह तय करना चाहता है कि बातचीत कब, कहां और कैसे होगी।

पाकिस्तान के सामने कूटनीतिक चुनौती

पाकिस्तान के लिए यह स्थिति जटिल है। उसने ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ संबंध बनाए रखते हुए तटस्थ रहने की कोशिश की है।

यह स्थिति पाकिस्तान को सभी पक्षों तक पहुंच देती है। लेकिन ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया से यह भी स्पष्ट हो गया है कि केवल संबंध होने से मध्यस्थता में प्रभाव की गारंटी नहीं मिलती।

मध्यस्थता के लिए मंच की तलाश जारी

संघर्ष अभी जारी है और वॉशिंगटन तथा तेहरान के बीच भरोसा अभी भी कम है। विभिन्न देश बातचीत के लिए एक भरोसेमंद मंच की तलाश कर रहे हैं। फिलहाल पाकिस्तान को मध्यस्थ के रूप में ईरान का समर्थन मिलता हुआ नहीं दिख रहा है। उपयुक्त कूटनीतिक रास्ते की तलाश अभी भी जारी है।